मध्य प्रदेश वन्य जीव पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में अहम निर्णय—सर्पदंश रोकथाम, देसी डॉग स्क्वॉड, कूनो, गांधी सागर, पेंच सहित कई परियोजनाएँ।
मध्य प्रदेश वन्य जीव पर्यटन: जंगल से जन-जन तक संरक्षण और पर्यटन का नया मॉडल
मध्य प्रदेश वन्य जीव पर्यटन को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा और प्रभावशाली कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की 31वीं बैठक में वन्य जीव संरक्षण को पर्यटन, जन-जागरूकता और ग्रामीण सहभागिता से जोड़ने का निर्णय लिया गया।
सरकार का उद्देश्य अब केवल संरक्षण नहीं, बल्कि मानव-वन्य जीव सह-अस्तित्व का व्यवहारिक मॉडल विकसित करना है।
वन्य जीव पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार
बैठक में निर्देश दिए गए कि वन विभाग और पर्यटन विभाग के बीच समन्वय बढ़ाया जाए, ताकि मध्य प्रदेश वन्य जीव पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में वन्य जीवों की बढ़ती संख्या सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसके साथ जागरूकता जरूरी है।
विशेष रूप से हाथियों की बढ़ती उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए हाथी-आधारित पर्यटन गतिविधियों पर भी चर्चा की गई।
राज्यों के बीच वन्य जीवों का आदान-प्रदान
जैव विविधता को समृद्ध बनाने के लिए अंतरराज्यीय वन्य जीव विनिमय योजना लागू की जा रही है।
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गांधी सागर अभयारण्य, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व और कूनो नेशनल पार्क में
846 कृष्णमृग और 67 नीलगायों का पुनर्स्थापन। -
वन विहार नेशनल पार्क से 6 मगरमच्छ ओंकारेश्वर क्षेत्र में छोड़े गए।
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पेंच टाइगर रिजर्व से एक मादा बाघ राम टाइगर रिजर्व (राजस्थान) भेजी गई।
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असम से आने वाले प्रस्तावित वन्य जीव:
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50 जंगली भैंसें
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गैंडे का जोड़ा
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किंग कोबरा
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मध्य प्रदेश से भेजे जाएंगे:
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बाघ
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मगरमच्छ
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गौर
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यह पहल मध्य प्रदेश वन्य जीव पर्यटन को राष्ट्रीय जैव-विविधता हब बना सकती है।
कूनो नेशनल पार्क: चीता परियोजना बनी पहचान
नामीबिया से लाई गई मादा चीता ‘आशा’ ने पाँच शावकों को जन्म दिया है।
इसके बाद प्रदेश में चीतों की संख्या 35 पहुँच गई है—जो भारत की सबसे चर्चित संरक्षण परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।
यह उपलब्धि मध्य प्रदेश वन्य जीव पर्यटन को वैश्विक नक्शे पर स्थापित कर रही है।
सर्पदंश रोकथाम: हर ग्राम पंचायत में प्रशिक्षित दल
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि:
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प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम दो व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया जाएगा
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प्रशिक्षण में शामिल होगा:
- सांप पकड़ने की सुरक्षित तकनीक
- सर्पदंश की प्राथमिक चिकित्सा
- ग्रामीण जागरूकता अभियान
यह निर्णय स्वास्थ्य सुरक्षा और वन्य जीव संरक्षण दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
देसी डॉग स्क्वॉड होंगे तैनात
वन्य जीव संरक्षण में अब विदेशी नस्लों की जगह भारतीय देसी कुत्तों को डॉग स्क्वॉड में शामिल किया जाएगा।
इनका उपयोग होगा:
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शिकारियों की पहचान
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वन्य जीवों की ट्रैकिंग
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अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण
यह कदम कम लागत और स्थानीय अनुकूलता के कारण प्रभावी माना जा रहा है।
वन्य जीव तस्करी पर बड़ी कार्रवाई
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की संयुक्त कार्रवाई में
10 वर्षों से फरार एक अंतरराष्ट्रीय बाघ तस्कर को भारत-चीन सीमा के पास गिरफ्तार किया गया।
यह कार्रवाई वन्य अपराध नियंत्रण में बड़ी सफलता मानी जा रही है।
जिन संरक्षित क्षेत्रों पर हुई विशेष चर्चा
बैठक में निम्न प्रस्तावों को अनुमोदन मिला:
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पन्ना टाइगर रिजर्व
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संजय टाइगर रिजर्व
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सोन घड़ियाल अभयारण्य
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कूनो नेशनल पार्क
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गांधी सागर अभयारण्य
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पेंच टाइगर रिजर्व
पर्यटन, रोजगार और पर्यावरण—तीनों को लाभ
मध्य प्रदेश वन्य जीव पर्यटन मॉडल से संभावित लाभ:
स्थानीय युवाओं को गाइड, ट्रैकर, ईको-टूरिज्म रोजगार
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
जैव विविधता संरक्षण
मानव-वन्य जीव संघर्ष में कमी
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन आकर्षण
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश वन्य जीव पर्यटन अब केवल सफारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि
संरक्षण + जनभागीदारी + रोजगार + वैज्ञानिक प्रबंधन का संयुक्त मॉडल बनेगा।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में लिए गए ये निर्णय प्रदेश को भारत का अग्रणी वन्य जीव पर्यटन राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।


