राष्ट्र गौरव Paras Jain “पार्श्वमणि” पत्रकार को मिला परम पूज्य माताओं का मंगल आशीर्वाद
तलवंडी स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में हाल ही में एक अद्वितीय और प्रेरक घटना हुई, जब राष्ट्रीय Journalist राष्ट्र गौरव Paras Jain “पार्श्वमणि” आर के पुरम, कोटा को परम पूज्य गणनी आर्यिका गुरु मां विशुद्ध मति माता जी एवं परम पूज्य विज्ञमति माता जी ससंघ ने प्रसन्नचित होकर मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। यह अवसर न केवल पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए गौरवपूर्ण था, बल्कि जैन समाज में शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रभावना को बढ़ावा देने वाले कार्यों का सम्मान भी था।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर पत्रकार के सिर पर मयूर पिच्छिका भी रखी गई, जो शुद्ध सम्मान और आशीर्वाद का प्रतीक है। माता जी ने पत्रकार को बताया कि उनका यह आशीर्वाद उनके लगातार किए जा रहे राष्ट्र सेवा और समाज सुधार के प्रयासों को मान्यता देने का प्रतीक है।
“मेरी भावना” – राष्ट्रहित और शिक्षा के लिए समर्पित प्रयास
Journalist ने माता जी को अपनी फाइल “मेरी भावना” समर्पित की, जिसमें उनके द्वारा कई वर्षों में लिखे गए आलेख, रिपोर्ट और पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख शामिल थे। यह फाइल समस्त भारत के शिक्षण संस्थानों में पढ़े जाने योग्य सामग्री पर आधारित थी, जिसका उद्देश्य युवा पीढ़ी में नैतिकता, अनुशासन, शिक्षा और राष्ट्रप्रेम की भावना को बढ़ावा देना है।
माता जी ने फाइल को अपने कर कमलों में लेकर देखा और प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने पत्रकार से कहा कि उनकी यह भावना केवल व्यक्तिगत प्रयास नहीं बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा और समाज सुधार का महत्वपूर्ण योगदान है। यह आशीर्वाद इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसमें माता जी की ओर से गहरी श्रद्धा और संतोष झलक रहा था।
35 वर्षों की पत्रकारिता का सम्मान
Journalist ने माता जी को पिछले 35 वर्षों की कवरेज फाइलें प्रस्तुत की। इन फाइलों में उनके द्वारा किए गए समाचार कवरेज, सामाजिक लेखन और शिक्षा तथा राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा देने वाले लेख शामिल थे।
माता जी ने इन फाइलों का गहन अध्ययन किया और अत्यंत प्रसन्नचित होकर पत्रकार को विशेष आशीर्वाद और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पत्रकार के लगातार किए गए समर्पित प्रयासों और अनुशासन की सराहना की और कहा कि इस तरह की दीर्घकालीन सेवा राष्ट्र और समाज के लिए अत्यंत प्रेरक है।
पूर्व आचार्यों और वरिष्ठ मुनियों का मार्गदर्शन
इससे पूर्व भी पत्रकार ने अपने प्रयासों के प्रति सम्मान और मार्गदर्शन प्राप्त किया है। जब टोंक, राजस्थान में वात्सल्य वारिधि परम पूज्य वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ विराजमान थे, तब पत्रकार ने उन्हें अपनी फाइल प्रस्तुत की थी। उस समय आचार्य श्री ने प्रसन्न होकर कहा कि यह कार्य निश्चित रूप से पूरा होगा और इसे आगे बढ़ाने के लिए सभी राज्यों के मुख्य मंत्रियों से भी संपर्क किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर आचार्य श्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पत्रकार की फाइल “मेरी भावना” राष्ट्रगान की श्रेणी में आती थी, लेकिन आकार में बड़ी होने के कारण तत्काल पूर्ण रूप से स्वीकृति नहीं मिल पाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि इसका महत्व राष्ट्रीय स्तर पर है और इसे प्रचारित करना आवश्यक है।
महान आचार्यों और मुनियों के आशीर्वाद
पत्रकार के इस पुण्य और राष्ट्रहित कार्य के लिए पहले भी कई महान आचार्यों और मुनियों ने अपने मंगल आशीर्वाद प्रदान किए हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- आचार्य प्रज्ञा सागर जी महाराज ससंघ
- परम पूज्य आचार्य सुंदर सागर जी महाराज ससंघ
- परम पूज्य आचार्य विनिश्चय सागर जी महाराज ससंघ
- आचार्य शशांक सागर जी महाराज ससंघ
- बालाचार्य निपूर्ण नंदी जी महाराज ससंघ
- परम पूज्य मुनि प्रज्ञान सागर जी महाराज
- परम पूज्य प्रसिद्ध सागर जी महाराज ससंघ
इन सभी संतों और आचार्यों ने पत्रकार के राष्ट्रीय और सामाजिक दृष्टिकोण वाले प्रयासों की सराहना की और उन्हें अपने आशीर्वाद से नवाजा। यह आशीर्वाद पत्रकार के लिए मार्गदर्शक और प्रेरक दोनों साबित हुआ।
“मेरी भावना” और इसका राष्ट्रीय महत्व
माता जी ने Journalist को बताया कि उनकी भावना राष्ट्रगान की श्रेणी में आती है, और इसमें समाहित विचार और संदेश राष्ट्रीय शिक्षा और युवा जागरूकता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि फाइल का आकार बड़ा होने के कारण तत्काल इसे स्वीकार नहीं किया गया था, लेकिन इसकी महत्ता और सार्थकता कभी कम नहीं होती। माता जी ने आशा व्यक्त की कि यह कार्य भविष्य में पूरे देश में फैलाया जाएगा और इसे शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रहित के दृष्टिकोण से अपनाया जाएगा।
Journalist के इस प्रयास ने स्पष्ट किया कि सच्ची निष्ठा, समर्पण और लंबे समय तक किए गए प्रयास समाज और राष्ट्र में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
पत्रकारिता और राष्ट्र सेवा का संगम
राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार का यह प्रयास केवल पत्रकारिता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय चेतना, शिक्षा और समाज सुधार के लिए प्रेरक है। माता जी और ससंघ के आशीर्वाद ने इस कार्य को और भी अधिक महत्त्वपूर्ण बना दिया है।
इस अवसर पर माता जी ने पत्रकार से कहा कि उनके प्रयासों को जारी रखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके विचार और संदेश युवाओं तक पहुंचें और शिक्षा संस्थाओं में प्रेरणा स्रोत बने।
निष्कर्ष
इस प्रकार, पत्रकार राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि” ने 35 वर्षों की मेहनत और समर्पण के बाद परम पूज्य माताओं और आचार्य ससंघ से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस आशीर्वाद ने उनके प्रयासों को सम्मान और मान्यता प्रदान की।
यह घटना न केवल पत्रकार के लिए गौरवपूर्ण है, बल्कि जैन समाज, शिक्षाविदों और राष्ट्रहित कार्यों में योगदान देने वाले हर व्यक्ति के लिए प्रेरक उदाहरण भी है। इस प्रकार के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से यह स्पष्ट होता है कि संघ और संतों का आशीर्वाद किसी भी समाज सुधारक या राष्ट्रसेवी कार्यकर्ता के लिए मार्गदर्शक और प्रेरक हो सकता है।
राष्ट्र गौरव पारस जैन का यह प्रयास आने वाले वर्षों में युवाओं को नैतिक, शारीरिक और मानसिक रूप से प्रेरित करेगा, और यह सुनिश्चित करेगा कि उनके संदेश और “मेरी भावना” जैसी राष्ट्रहित की पहलें व्यापक स्तर पर स्वीकार और लागू हों।
