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MP News: कारम डैम मामले में सीएम मोहन यादव का एक्शन, 6 अधिकारियों को नोटिस, 2022 में टूटने से सरकार को 100 करोड़ का नुकसान

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Published On: 10 February 2026
MP News: CM Mohan Yadav Takes Action in Karam Dam Case, 6 Officers Served Notices
— MP News: CM Mohan Yadav Takes Action in Karam Dam Case, 6 Officers Served Notices

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कारम डैम मामला: सीएम मोहन यादव ने लिया बड़ा कदम, 6 अधिकारियों को नोटिस, 2022 में बांध टूटने से हुआ 100 करोड़ का नुकसान

MP में कारम डैम के टूटने के मामले ने अब नई दिशा पकड़ ली है। साल 2022 में बारिश के दौरान बांध टूटने से राज्य को लगभग 100 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ था। तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार के कार्यकाल में बांध में तकनीकी कमियों और निर्माण की अनियमितताओं के कारण यह बड़ी घटना हुई थी। उस समय दोषी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद ब्लैकलिस्ट की गई कंपनी की डमी मदर कंपनी को फिर से काम सौंप दिया गया था।

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए CM मोहन यादव ने अब फाइल खोलने का निर्णय लिया है। जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने तत्कालीन मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन नियंत्रक और अन्य छह अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को 17 फरवरी को उपस्थित होकर अपना जवाब देने का निर्देश दिया गया है। यदि कोई अधिकारी तय समय पर जवाब नहीं देता है तो उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।

नोटिस प्राप्त अधिकारियों की सूची

नोटिस प्राप्त अधिकारियों में शामिल हैं:

  • तत्कालीन मुख्य अभियंता घटोले (रिटायर्ड)
  • तत्कालीन अधीक्षण यंत्री पी. जोशी
  • तत्कालीन कार्यपालन नियंत्रक बी.एल. निनमा
  • तत्कालीन अनुभागीय अधिकारी विकास अहमद सिद्दीकी
  • तत्कालीन उप यंत्री विजय कुमार
  • तत्कालीन उप यंत्री दशावंता सिसोदिया

अधिकारियों को अतिरिक्त मुख्य सचिव के कार्यालय में विभागीय जांच के संबंध में सुनवाई का समय निर्धारित किया गया है। इस सुनवाई के आधार पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बांध टूटने का प्रभाव और नुकसान

2022 में कारम डैम के टूटने के कारण किसानों को सबसे अधिक नुकसान हुआ। बांध की चपेट में आने से खेतों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई और खेत की उपजाऊ मिट्टी भी बह गई। आदिवासी किसान परिवारों को बाद में सरकार ने मुआवजा दिया, लेकिन प्रभावित किसानों का कहना है कि यह मुआवजा उनकी क्षति के अनुपात में बेहद कम था।

बांध टूटने से न केवल किसानों का नुकसान हुआ बल्कि आसपास के गांवों और कस्बों में भी जलभराव के कारण कई घर और सड़कों को नुकसान पहुंचा। इससे यह स्पष्ट होता है कि बांध निर्माण की तकनीकी खामियों और निरीक्षण में लापरवाही की वजह से इतनी बड़ी आपदा हुई।

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कारम डैम परियोजना का इतिहास

कारम बांध निर्माण की स्वीकृति 10 अगस्त 2018 को मिली थी। प्रारंभिक योजना के अनुसार 36 महीनों के भीतर निर्माण पूरा होना था, यानी साल 2021 में बांध तैयार हो जाना था। लेकिन तकनीकी कमियों और निर्माण में अनियमितताओं के कारण 12 अगस्त 2022 को बांध की दीवार में रिसाव शुरू हो गया।

फूटने की आशंका के चलते प्रशासन ने बांध की पाल को एक साइड से तोड़कर पानी निकालने का मार्ग बनाया। 2022 और 2023 में कार्य बंद रहा और 2024 में पुनः निर्माण कार्य चालू हुआ। अब सरकार का दावा है कि 2026 तक बांध का निर्माण पूरा हो जाएगा।

आर्थिक और तकनीकी विवरण

कारम बांध के लिए कुल 304 करोड़ रुपये प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी। अब तक इस पर 99.86 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

बांध की तकनीकी विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • जल ग्रहण क्षमता: 44.53 एमसीएम
  • कैचमेंट एरिया: 342.50 वर्ग किलोमीटर
  • ऊंचाई: 52 मीटर
  • लंबाई: 584 मीटर
  • निर्माण के अंतर्गत दो नहरें बनाई जाएंगी

यह डैम क्षेत्र के सिंचाई, जल प्रबंधन और किसानों की फसल सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है।

ब्लैकलिस्टेड कंपनियों और भ्रष्टाचार का मामला

बारिश के दौरान बांध टूटने से सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। इसके बाद तत्कालीन सरकार ने दो कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। लेकिन इस मामले की गंभीरता यह है कि बाद में उसी कंपनी की डमी मदर कंपनी को बांध निर्माण का कार्य सौंप दिया गया।

इससे यह स्पष्ट होता है कि निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार और लापरवाही भी प्रमुख कारण रहे। चार साल बीत जाने के बाद भी परियोजना पूरी तरह तैयार नहीं हो पाई, जो इस पूरे मामले को और भी चिंताजनक बनाता है।

सरकार की आगामी योजना और कार्रवाई

CM मोहन यादव ने साफ संकेत दिए हैं कि अब बांध निर्माण और जल संसाधन विभाग में तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 17 फरवरी को सभी अधिकारियों को विभागीय जांच में उपस्थित होकर अपने उत्तर देने होंगे।

यदि अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई, निलंबन और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके अलावा, भविष्य में बांध निर्माण के सभी कार्यों में पारदर्शिता और तकनीकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी टीम बनाई जाएगी।

किसानों और ग्रामीणों के लिए राहत

साल 2022 में बांध टूटने से प्रभावित किसानों और ग्रामीणों को मुआवजा दिया गया, लेकिन यह राशि उनकी वास्तविक हानि के अनुसार नहीं थी। सरकार अब किसानों को अधिक न्यायसंगत मुआवजा देने और बांध सुरक्षा के मानक बढ़ाने के लिए कदम उठा रही है।

भविष्य में बांध के निर्माण और निरीक्षण में तकनीकी खामियों को दूर करने और किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

निष्कर्ष

कारम डैम मामला मध्य प्रदेश में जल संसाधन विभाग और निर्माण परियोजनाओं में भ्रष्टाचार और लापरवाही की गंभीर समस्या को उजागर करता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की कार्रवाई, जिसमें छह अधिकारियों को नोटिस दिया गया है, इस दिशा में पहला कदम है।

इस कदम से यह संदेश भी जाता है कि भविष्य में तकनीकी खामियों और अनियमितताओं पर सरकार कड़ी नजर रखेगी। किसानों और ग्रामीणों की सुरक्षा, बांध निर्माण की गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कारम डैम परियोजना के सफल और सुरक्षित निर्माण से न केवल जल संरक्षण और सिंचाई में सुधार होगा, बल्कि राज्य में भविष्य में इस तरह की आपदाओं से बचाव संभव होगा।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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