MP रायसेन में पुलिस के खिलाफ गुस्सा उभरा, 38 दिन से लापता नाबालिग लड़की का कोई सुराग नहीं; साहू समाज ने थाने का किया घेराव
MP के रायसेन जिले के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के लापता होने का मामला अब लोगों के गुस्से में बदलता जा रहा है। मामला इतना गंभीर रूप ले चुका है कि आज यहां साहू समाज के सैकड़ों लोगों ने थाना सुल्तानगंज का घेराव कर विरोध जताया और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लापरवाही और आरोपियों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए हैं, क्योंकि 38 दिन बीतने के बावजूद लड़की का कोई सुराग नहीं मिला है।
यह स्थिति कानून‑व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रही है और स्थानीय लोगों में भारी रोष पैदा कर रही है। न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर कटु आलोचना हो रही है, बल्कि यह मामला अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बढ़ते तनाव का कारण बनता जा रहा है।
लड़कियों के लापता होने का मामला और आरोप
प्रदर्शन की शुरुआत उस समय हुई जब समाज के नेताओं और परिजनों ने कहा कि लड़कियों के लापता होने की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस ने आवश्यक कदम नहीं उठाए। आरोप है कि जिस रात बच्ची लापता हुई थी, उसी रात उसके छोटे भाई ने अपनी आंखों से देखा कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति उसे बाइक पर ले जाते हुए दिखाई दिए। इस महत्वपूर्ण गवाह के होने के बावजूद, पुलिस ने मामले को लेकर तत्काल कदम नहीं उठाए और अब तक किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
साहू समाज ने पुलिस पर यह भी आरोप लगाया कि खोज‑बीन के नाम पर पीड़ित परिवार ही खर्च बनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि पुलिस और प्रशासन आरोपियों को राजनीतिक या अन्य किसी प्रभाव के तहत संरक्षण दे रहे हैं। समाजजनों का कहना है कि 38 दिनों से कोशिश के बावजूद पुलिस के पास अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं है।
प्रदर्शन में मौजूद एक परिवार के सदस्य ने बताया कि वे लगातार धमकियों का सामना कर रहे हैं, जिससे परिवार को भय का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में विरोध का स्वर और भी तेज हो गया है, क्योंकि लोगों को लगता है कि पुलिस समय पर मामला गंभीरता से नहीं ले रही है और इस वजह से बच्ची की तलाश में देरी हो रही है।
साहू समाज का विरोध प्रदर्शन
शनिवार को साहू समाज के जिला पदाधिकारियों और समर्थकों ने सुल्तानगंज स्थित समाज की धर्मशाला में बैठक की। बैठक के बाद समुदाय ने पैदल मार्च के रूप में थाने की ओर रुख किया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने थाने के बाहर नारेबाजी करते हुए “न्याय दो” और “हम न्याय चाहते हैं” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन में भजन‑कीर्तन भी हुआ, जिससे माहौल में विरोध की गंभीरता और स्पष्ट हो गई।
समूह ने स्पष्ट कहा कि वे केवल मौखिक आश्वासन से नहीं मानेंगे और पुलिस से तीन दिन के भीतर लड़की की खोज और आरोपियों की गिरफ्तारी का ठोस आश्वासन देने को कहा।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर यह समयसीमा पूरी नहीं हुई, तो उनका आंदोलन सुल्तानगंज तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद वे यह मामला मध्य प्रदेश विधानसभा स्तर तक ले जाएंगे और यहां तक कि राजधानी भोपाल में भी उग्र प्रदर्शन करेंगे, ताकि सरकार और प्रशासन को मजबूर किया जा सके कि वे निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई करें।
MP प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुल्तानगंज थाने पर भारी भीड़ जमा हो गई। इस बीच सिलवानी एसडीओपी अनिल मौर्य और नायब तहसीलदार देवेंद्र शुक्ला मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि वे स्थिति को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द समाधान के लिए कार्यरत हैं।
पुलिस प्रशासन ने विरोधकारियों को आश्वासन दिया कि अगले तीन दिनों के भीतर जांच को और व्यापक रूप से तेज किया जाएगा और बच्ची के बरामदगी के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। वहीं अधिकारियों ने यह भी कहा कि वे जांच के हर पहलू पर ध्यान दे रहे हैं और कोई भी जानकारी जो सामने आती है, उसका उपयोग मामले को सुलझाने में किया जाएगा।
समाज के नेताओं ने हालांकि कहा कि केवल लिखित आश्वासन से जनता शांत नहीं होगी, बल्कि उन्हें प्रभावी कार्रवाई और सफलता की उम्मीद चाहिए, जो कि फिलहाल नजर नहीं आ रही।
लापता नाबालिगों के खिलाफ बढ़ता विरोध
यह मामला एक अकेला घटना नहीं है देश के विभिन्न हिस्सों में नाबालिगों के साथ होने वाले अपराध और उन मामलों की जांच में देरी को लेकर जनता में रोष देखा गया है। हाल के महीनों में नैनीताल, हरियाणा और अन्य जगहों पर भी इसी तरह के विरोध और प्रदर्शन हुए हैं, जहां नाबालिगों के साथ अपराध के विरोध में लोगों ने आवाज उठाई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नाबालिगों के मामले में पुलिस और प्रशासन की तेज और पारदर्शी कार्रवाई न सिर्फ न्याय दिलाने में मदद करती है, बल्कि समाज में शांति और विश्वास भी कायम रखती है। संकेत हैं कि अगर इन मामलों पर जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है, तो जनता का विरोध और गुस्सा और भी बढ़ सकता है।
क्या होगा आगे?
अब सवाल यह है कि इस विवादित मामले का अंत कैसे होगा। साहू समाज ने प्रशासन को स्पष्ट रूप से चेतावनी दे दी है कि अगर तीन दिनों के भीतर परिणाम नहीं दिखे, तो वे राज्य पूरे में आंदोलन तेज करेंगे। यह विरोध सिर्फ सुल्तानगंज का मुद्दा नहीं रह जाएगा, बल्कि राजधानी भोपाल तक भी पहुंच सकता है, जहां अन्य संगठनों और नागरिकों के समर्थन के साथ व्यापक प्रदर्शन हो सकता है।
