India में पहली बार: छोटे प्लेन बिना लाइसेंस वाली स्ट्रिप पर टेक ऑफ और लैंडिंग कर सकेंगे
नई दिल्ली: India एविएशन सेक्टर में एक नया बदलाव आने वाला है। सरकार और एविएशन रेगुलेटर्स (DGCA) 19 सीटर तक के छोटे हवाई जहाजों को बिना लाइसेंस वाले रनवे (अनकंट्रोल्ड एयर स्ट्रिप) से टेक ऑफ और लैंडिंग करने की अनुमति देने पर काम कर रहे हैं। यह कदम छोटे एयरलाइन ऑपरेशन्स को बढ़ावा देने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
क्या है नया नियम?
सूत्रों के अनुसार, अगर यह नियम लागू होता है तो 19 सीट तक के पैसेंजर एयरक्राफ्ट को दिल्ली, मुंबई या अन्य किसी बड़े एयरपोर्ट से परमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी। इन छोटे एयरक्राफ्ट को अनकंट्रोल्ड रनवे से भी टेक ऑफ और लैंडिंग करने की अनुमति मिल जाएगी।
यह नियम उसी तरह काम करेगा जैसे अफ्रीका समेत कई देशों में छोटे पैसेंजर एयरक्राफ्ट को अनकंट्रोल्ड एयर स्ट्रिप से ऑपरेट करने की परमिशन दी जाती है। इसके तहत एयरलाइंस अपने रिस्क पर एयरक्राफ्ट को उतारेंगी और यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी एयरलाइंस और पायलटों पर होगी।
नियम के पीछे कारण
India में छोटी एयरलाइंस और हवाई यात्रा को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। देश के कई छोटे शहरों और हिल स्टेशनों तक पहुंच बढ़ाने के लिए बड़े एयरपोर्ट्स पर निर्भरता कम करना जरूरी है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ेगी।
इसके अलावा, इस नियम से एयरलाइंस को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की सुविधा मिलेगी। एयरलाइंस छोटे हवाई जहाजों में यात्रियों को ऑनलाइन टिकटिंग के साथ-साथ मौके पर टिकट देकर भी सेवाएं दे सकेंगी।
सुरक्षा पर होगी जिम्मेदारी
हालांकि, सूत्रों ने साफ किया है कि भारत में यह मसला थोड़ा अलग है। कई बार एयरलाइंस इस सुविधा का फायदा उठाकर सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर सकती हैं, जिससे बड़े हादसे की संभावना बढ़ जाती है।
19 सीट तक के एयरक्राफ्ट को अनकंट्रोल्ड एयर स्ट्रिप पर उतारने और टेक ऑफ करने में पायलटों को काफी जोखिम उठाना होगा क्योंकि ऐसी स्ट्रिप्स पर आमतौर पर फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस या इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम मौजूद नहीं होते।
इसलिए, नए नियम को लागू करने से पहले पब्लिक डोमेन में इसे रखा जाएगा और कई कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा। इसके बाद ही यह नियम लागू किया जाएगा।
बारामती हादसे का उदाहरण
इस नियम के महत्व को समझाने के लिए हाल ही में महाराष्ट्र के बारामती में हुए हादसे का उदाहरण दिया जा सकता है। 28 जनवरी 2026 की सुबह, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का विमान अनकंट्रोल्ड एयर स्ट्रिप पर उतारा गया था। दुर्भाग्यवश यह क्रैश हो गया और उसमें सवार पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई।
यह घटना दर्शाती है कि अनकंट्रोल्ड एयर स्ट्रिप पर टेक ऑफ और लैंडिंग कितनी जोखिम भरी हो सकती है। नए नियम में इसे ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और पायलट की जिम्मेदारी को स्पष्ट किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव
दुनिया के कई देशों में, विशेषकर अफ्रीका में, छोटे पैसेंजर एयरक्राफ्ट को अनकंट्रोल्ड एयर स्ट्रिप से ऑपरेट करने की अनुमति मिलती है। इन देशों में इसका अनुभव सकारात्मक रहा है।
India में इसे लागू करने का उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाना है। इससे छोटे शहर और हिल स्टेशन हवाई यात्रा के दायरे में आएंगे।
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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस
इस कदम के पीछे सरकार का लक्ष्य एयरलाइंस ऑपरेशन्स को आसान बनाना भी है। इस नियम के लागू होने के बाद एयरलाइंस छोटे हवाई जहाजों से यात्रियों को जल्दी और सस्ती सुविधा दे पाएंगी।
यात्रियों के लिए भी यह एक बड़ी सुविधा होगी। लोग अब छोटे शहरों से बड़े शहरों की यात्रा आसानी से कर पाएंगे। एयरलाइंस ऑनलाइन बुकिंग और मौके पर टिकटिंग दोनों विकल्प उपलब्ध करा पाएंगी।
नियम लागू होने की प्रक्रिया
नए नियम को अंतिम रूप देने से पहले कई कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। इसमें नियम को पब्लिक डोमेन में रखना, सुझाव लेना और सुरक्षा मानकों को तय करना शामिल है। इसके बाद ही इसे लागू किया जाएगा।
फायदे और जोखिम
फायदे:
- ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ेगी
- छोटे एयरलाइन ऑपरेशन्स को बढ़ावा मिलेगा
- यात्रियों को सुविधा और समय की बचत मिलेगी
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत छोटे एयरक्राफ्ट ऑपरेट करना आसान होगा
जोखिम:
- अनकंट्रोल्ड एयर स्ट्रिप पर टेक ऑफ और लैंडिंग में सुरक्षा जोखिम
- फायर, एंबुलेंस और इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम की अनुपस्थिति
- एयरलाइंस और पायलटों पर यात्रियों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी
निष्कर्ष
India में यह पहला कदम होगा, जब छोटे पैसेंजर एयरक्राफ्ट को बिना लाइसेंस वाले रनवे से ऑपरेट करने की अनुमति मिलेगी। यह नियम देश में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने, छोटे शहरों को जोड़ने और एयरलाइंस ऑपरेशन्स को आसान बनाने के लिए अहम साबित होगा।
हालांकि, सुरक्षा और पायलट की जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए इसे लागू किया जाएगा। भविष्य में यह छोटे एयरक्राफ्ट ऑपरेशन्स के लिए भारत में एक नया रास्ता खोल सकता है।
