India-EU Trade Deal:
India-EU Trade Deal: India-EU के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते को वैश्विक स्तर पर “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है। इस डील को भारत की आर्थिक ताकत और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। दुनिया भर के अर्थशास्त्री, निवेशक और नीति-निर्माता इस समझौते की जमकर तारीफ कर रहे हैं। यहां तक कि अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने भी इसे भारत के तेज़ी से बढ़ते आर्थिक प्रभाव का प्रमाण बताया है।
हालांकि, जहां भारत की इस उपलब्धि पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहना हो रही है, वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान में इस डील को लेकर चिंता और बेचैनी साफ देखी जा रही है। माना जा रहा है कि India-EU Trade Deal का सीधा असर पाकिस्तान को मिलने वाली GSP+ (Generalised System of Preferences Plus) योजना पर पड़ सकता है, जिससे उसके निर्यात और अर्थव्यवस्था पर बड़ा झटका लग सकता है।
India-EU डील से क्यों परेशान है पाकिस्तान?
India और EU संघ के बीच हुआ यह व्यापार समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। इससे भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी, निवेश बढ़ेगा और व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। लेकिन इसी के साथ पाकिस्तान की चिंता इसलिए बढ़ गई है क्योंकि अब यूरोपीय बाजार में भारत एक और मजबूत प्रतिस्पर्धी के रूप में उभर रहा है।
पाकिस्तान को आशंका है कि इस डील के बाद यूरोपीय संघ उसकी GSP+ सुविधा को खत्म या सीमित कर सकता है, जिससे पाकिस्तानी उत्पादों पर फिर से टैरिफ लगने की संभावना बढ़ जाएगी।

पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री ने जताई चिंता
पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री डॉ. गोहर एजाज ने India-EU Trade Deal को लेकर खुलकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इस डील के चलते पाकिस्तान के निर्यात पर बहुत बड़ा जोखिम मंडरा रहा है। अगर यूरोपीय संघ ने GSP+ योजना को समाप्त कर दिया, तो पाकिस्तान के लिए ‘शून्य टैरिफ वाला सुनहरा दौर’ खत्म हो जाएगा।
डॉ. गोहर एजाज के मुताबिक, इस योजना की वजह से पाकिस्तान को यूरोपीय संघ के बाजार में करीब 9 अरब डॉलर के निर्यात का फायदा मिल रहा था। लेकिन India-EU डील के बाद यह लाभ समाप्त हो सकता है।
फिर से लागू होंगे टैरिफ, बढ़ेंगी कीमतें
पूर्व वाणिज्य मंत्री ने कहा कि अगर GSP+ खत्म होता है, तो पाकिस्तान के सभी उत्पादों पर दोबारा टैरिफ लगाए जाएंगे। इससे पाकिस्तानी सामान की कीमतें बढ़ेंगी और वे अन्य देशों की तुलना में महंगे हो जाएंगे। इसका सीधा असर पाकिस्तान के टेक्सटाइल, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान का उद्योग पहले ही भारी आर्थिक दबाव में है और अब वह अतिरिक्त बोझ उठाने की स्थिति में नहीं है। टैरिफ लागू होने से न केवल निर्यात घटेगा, बल्कि देश में महंगाई भी बढ़ेगी और व्यापार घाटा और गहरा जाएगा।
1 करोड़ नौकरियों पर खतरा
डॉ. गोहर एजाज ने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान को मिलने वाली GSP+ सुविधा समाप्त होती है, तो इससे करीब 1 करोड़ नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिरता का भी मुद्दा है।
उनके अनुसार, पाकिस्तान सरकार को इस स्थिति से निपटने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने की जरूरत है, वरना हालात और बिगड़ सकते हैं।
GSP+ से पाकिस्तान को क्या फायदा मिला?
अब तक पाकिस्तान को यूरोपीय संघ की Generalised System of Preferences Plus (GSP+) योजना का बड़ा लाभ मिलता रहा है। यह योजना यूरोपीय संघ द्वारा विकासशील और कमजोर देशों को दी जाने वाली विशेष व्यापारिक रियायत है।
इस योजना के तहत यूरोपीय बाजार में करीब 7200 से ज्यादा उत्पादों पर 0 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लागू होती है। पाकिस्तान के टेक्सटाइल और कपड़ा उद्योग को इससे सबसे ज्यादा फायदा हुआ, जो उसके कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा है।
लेकिन India-EU Trade Deal के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि यूरोपीय संघ अब GSP+ जैसी योजनाओं पर दोबारा विचार कर सकता है, जिससे पाकिस्तान की स्थिति कमजोर हो सकती है।
भारत के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा
पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि भारत के अलावा वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देश भी अपनी उत्पादन क्षमता और निर्यात क्षमता को तेजी से बढ़ा रहे हैं। इन देशों ने वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है, जबकि पाकिस्तान इस मामले में पीछे रह गया है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भी अपनी इंडस्ट्रियल पॉलिसी, एक्सपोर्ट स्ट्रैटेजी और उत्पादन क्षमता पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है, वरना वैश्विक बाजार में उसकी स्थिति और कमजोर होती जाएगी।
भारत की बढ़ती वैश्विक साख
India-EU Trade Deal को भारत की बढ़ती वैश्विक साख के तौर पर देखा जा रहा है। यह समझौता भारत को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच देगा और विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा। यही वजह है कि अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों के अर्थशास्त्री इस डील को भारत के लिए एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक कदम मान रहे हैं।
वहीं, पाकिस्तान में यह डील भारत की कूटनीतिक और आर्थिक सफलता के रूप में देखी जा रही है, जिससे वहां असहजता और चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, India -EU संघ व्यापार समझौता वैश्विक व्यापार परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है। जहां भारत को इससे दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है, वहीं पाकिस्तान के लिए यह डील एक चेतावनी बनकर सामने आई है।
अब यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान इस बदलते वैश्विक व्यापार माहौल में खुद को कैसे ढालता है और क्या वह समय रहते अपनी आर्थिक नीतियों में सुधार कर पाता है या नहीं।

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