Indore जल संकट: दूषित पानी से मरने वालों की संख्या 31 पहुंची, शहर के 85 वार्डों में खुलेंगे वाटर टेस्टिंग लैब
Indore ।
मध्य प्रदेश के Indore में जल संकट एक बार फिर गंभीर रूप ले चुका है। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से अब तक मरने वालों की संख्या 31 हो गई है। शुक्रवार (30 जनवरी 2026) को एकनाथ सूर्यवंशी (72 वर्ष) की मौत हुई। सूर्यवंशी पिछले एक महीने से बीमार चल रहे थे और इलाज के दौरान वे वेंटिलेटर पर थे। उनकी मौत ने पूरे शहर में चिंता और आक्रोश बढ़ा दिया है।
इस घटना के बाद इंदौर नगर निगम ने शहर के 85 वार्डों में वाटर टेस्टिंग लैब खोलने के लिए टेंडर जारी कर दिया है। इन लैब की मदद से अब प्रत्येक वार्ड में पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच की जा सकेगी और दूषित पानी के मामले में तत्काल कार्रवाई संभव होगी।
एकनाथ सूर्यवंशी का मामला
जानकारी के अनुसार, एकनाथ सूर्यवंशी को 29 दिसंबर 2025 को उल्टी, दस्त और अन्य शारीरिक परेशानियों की शिकायत के बाद शैल्बी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। शुरुआती इलाज के बाद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद 3 जनवरी 2026 को उन्हें बॉम्बे अस्पताल रेफर किया गया।
जब उनकी स्थिति और गंभीर हो गई, तो 4 जनवरी 2026 को उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। पूरे महीने तक इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। डॉक्टरों के अनुसार, उनके दोनों किडनी और लीवर काम करना बंद कर चुके थे, और लीवर की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। बीमारी के असर ने उनके मस्तिष्क और हृदय को भी प्रभावित किया था। सूर्यवंशी जल संसाधन विभाग में 1983 से कार्यरत थे।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के इंदौर दौरे के दौरान उन्होंने सूर्यवंशी के परिवार से मुलाकात की थी और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली थी। इस मुलाकात के बाद भी उनकी हालत सुधर नहीं पाई।
Indore में दूषित पानी की समस्या
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। पिछले कुछ महीनों में कई लोग इसी कारण से बीमार पड़े और अस्पतालों में भर्ती हुए। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि अब तक शहर में पानी की जांच सीमित स्तर पर ही की जाती थी।
भागीरथपुरा की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि वार्ड स्तर पर पानी की जांच करना अत्यंत जरूरी है। इसी कारण नगर निगम ने 85 वार्डों में वाटर टेस्टिंग लैब खोलने का निर्णय लिया है। इन लैब की मदद से पेयजल की नियमित जांच होगी और दूषित पानी पर तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी।
नगर निगम की योजना
Indore नगर निगम ने इन लैब के लिए टेंडर जारी कर दिया है। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, इन लैब में पानी की गुणवत्ता, शुद्धता और हानिकारक तत्वों का परीक्षण किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी वार्ड में दूषित पानी की आपूर्ति तुरंत रोकी जा सके।
अधिकारियों ने कहा कि इससे पहले पानी की जांच सभी वार्डों में नियमित रूप से नहीं होती थी, लेकिन भागीरथपुरा की घटना ने दिखा दिया कि यह कदम आवश्यक है। अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर वार्ड के नागरिकों को सुरक्षित और शुद्ध पानी मिले।
मृतकों की संख्या और स्वास्थ्य संकट
भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने के कारण मरने वालों की संख्या 31 तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी के सेवन से उल्टी, दस्त, किडनी और लीवर की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इंदौर के अस्पतालों में इन मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
सूर्यवंशी के मामले ने यह साफ कर दिया कि दूषित पानी केवल असुविधा का कारण नहीं है, बल्कि यह जीवन के लिए गंभीर खतरा है। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर इलाज और पानी की शुद्धता सुनिश्चित करने के कदम ही ऐसी मौतों को रोके सकते हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
सूर्यवंशी की मौत के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के दौरे के दौरान इस मुद्दे पर जोर दिया गया और उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मामला न केवल स्वास्थ्य संकट का है, बल्कि नगर निगम और राज्य सरकार की जवाबदेही का भी प्रश्न है।
नगर निगम ने जनता से अपील की है कि वे शहर में पानी की गंदगी या दूषित जल स्रोत की सूचना तुरंत दें। जनता के सहयोग से ही प्रशासन जल्दी और प्रभावी कार्रवाई कर सकता है।
भविष्य की दिशा
Indore में 85 वार्डों में खुल रही वाटर टेस्टिंग लैब आने वाले समय में शहर में पेयजल संकट को कम करने में मदद करेगी। इससे हर वार्ड के नागरिकों तक सुरक्षित और स्वच्छ पानी पहुंचाना संभव होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित जांच और गुणवत्ता नियंत्रण से दूषित पानी से होने वाले रोगों में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है। नगर निगम अधिकारियों ने यह भी कहा कि इन लैब में पानी के नमूने, जल स्रोतों की निगरानी और समय-समय पर रिपोर्टिंग की जाएगी।
निष्कर्ष
Indore जल संकट ने फिर एक बार चेतावनी दे दी है कि शहरी क्षेत्रों में पानी की शुद्धता सुनिश्चित करना अत्यंत जरूरी है। भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से मरने वालों की संख्या 31 तक पहुँच गई, और इसने प्रशासन और जनता दोनों को सतर्क किया है।
नगर निगम की पहल, जिसमें 85 वार्डों में वाटर टेस्टिंग लैब स्थापित की जा रही हैं, आने वाले समय में शहर के जल संकट को कम करने में अहम भूमिका निभाएगी। इसके माध्यम से शहरवासियों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल मिल सकेगा और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकेगा।
Indore जल संकट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा के लिए समय पर कदम उठाना और पानी की गुणवत्ता पर निगरानी रखना आवश्यक है।
