बम्होरी स्वास्थ्य सुविधा संकट ने विकराल रूप ले लिया है। PHC में डॉक्टर न होने से ग्रामीणों का गुस्सा फूटा, सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन।
बम्होरी स्वास्थ्य सुविधा संकट ने गांव को आंदोलन की आग में झोंक दिया
बम्होरी में बम्होरी स्वास्थ्य सुविधा संकट अब सिर्फ़ एक प्रशासनिक समस्या नहीं रहा, बल्कि यह सरकार की संवेदनहीनता और सिस्टम फेल होने का खुला प्रमाण बन चुका है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की बदहाली से त्रस्त ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे चुका है और इसी के चलते गांव की जनता सड़कों पर उतर आई है।
बम्होरी स्वास्थ्य सुविधा संकट की पृष्ठभूमि
ग्राम बम्होरी का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिछले तीन वर्षों से स्थायी डॉक्टर के बिना संचालित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस दौरान इलाज के लिए उन्हें 30–40 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, जिससे कई बार जानलेवा स्थिति बन जाती है।
PHC की बदहाली और जनता का फूटा गुस्सा
स्थायी चिकित्सक, पूरा स्टाफ, दवाइयों की उपलब्धता और 24 घंटे की आपात सेवाओं की मांग को लेकर समस्त ग्रामवासी एवं आंदोलन समिति ने शांतिपूर्ण लेकिन आक्रोशपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया।इस आंदोलन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों भी मौजूद रहे।
अस्थायी व्यवस्था पर भड़के ग्रामीण
अनुविभागीय अधिकारी द्वारा आंदोलन समिति के प्रतिनिधि मोहन सोनी (एडवोकेट) को फोन पर डॉक्टर की अस्थायी व्यवस्था की सूचना दी गई, लेकिन ग्रामीणों ने इसे जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा कदम बताया।
“अस्थायी इंतजाम जनता को बहलाने का तरीका है, हमें स्थायी समाधान चाहिए।”
तीन साल से बिना डॉक्टर – लापरवाही या अपराध?
ग्रामीणों का आरोप है कि दर्जनों ज्ञापन देने के बावजूद प्रशासन, CMHO और स्वास्थ्य विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
लोगों का सवाल है —“अगर पद भरे थे, तो डॉक्टर गए कहां?”
एक युवा की मौत ने खोली सिस्टम की पोल
हाल ही में गांव के एक युवक की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि
“यह मौत बीमारी से नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही से हुई है।”
इसी घटना के बाद कस्बा बंद और बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ।
भूख हड़ताल की चेतावनी
आंदोलन समिति ने नायब तहसीलदार कार्यालय में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की अनुमति के लिए आवेदन सौंप दिया है।स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि अगर जल्द लिखित आदेश नहीं मिला तो आंदोलन और उग्र होगा।
युवा नेतृत्व का ऐलान – अब मुद्दे चलेंगे
ग्राम बम्होरी के युवाओं ने घोषणा की है कि वे अब किसी भी राजनीतिक स्वार्थ का हिस्सा नहीं बनेंगे।
नारा साफ है —
“गांव पहले, राजनीति बाद में।”
‘एक गांव, एक परिवार’ का सामाजिक संकल्प
ग्रामीणों ने तय किया है —एक का दुःख पूरे गांव का दुःख, एक का विकास पूरे गांव का विकास।
नारा गूंज रहा है —“ग्राम बम्होरी, परिवार हमारा।”
स्वास्थ्य विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप
आंदोलनकारियों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मांग की गई है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो।
सरकार के नाम अंतिम चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि यह सब स्वास्थ्य राज्यमंत्री के गृह जिले में हो रहा है, जो सरकार की बड़ी विफलता को दर्शाता है।
अगर अब भी समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन जिला स्तर से आगे बढ़ेगा।

