वैश्य महासम्मेलन महिला इकाई इटारसी बसंत पंचमी आयोजन में सरस्वती पूजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, हल्दी-कुमकुम और बाल कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति ने सभी को भावविभोर कर दिया।
वैश्य महासम्मेलन महिला इकाई इटारसी बसंत पंचमी आयोजन – संस्कार, संस्कृति और सशक्तिकरण का अनुपम संगम
इटारसी, 23 जनवरी 2026।
वैश्य महासम्मेलन महिला इकाई इटारसी बसंत पंचमी आयोजन एक ऐसा आयोजन रहा, जिसने धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक सौंदर्य और महिला एकता को एक ही मंच पर जीवंत कर दिया। मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सामाजिक संगठन वैश्य महासम्मेलन की महिला इकाई द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम बसंत पंचमी के पावन अवसर पर अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ।
सरस्वती पूजन और वंदना से हुआ शुभारंभ
इस भव्य आयोजन की शुरुआत मां सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना और सरस्वती वंदना से हुई। ज्ञान, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर सभी ने शिक्षा, संस्कार और रचनात्मकता की कामना की।
पूजन के पश्चात श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया, जिससे पूरे वातावरण में भक्तिमय ऊर्जा का संचार हुआ।
वंशिका डांस एकेडमी के बच्चों ने मोहा मन
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और भावनात्मक क्षण तब आया, जब वंशिका डांस एकेडमी की होनहार बाल कलाकारों — खुशी, नव्या और शाम्भवी — ने सरस्वती वंदना पर अत्यंत सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया।
बच्चों की भाव-भंगिमा, ताल-लय और प्रस्तुति ने उपस्थित सभी महिलाओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
इन प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानस्वरूप पारितोषिक भी प्रदान किए गए।
हल्दी-कुमकुम कार्यक्रम में दिखी नारी एकता
वैश्य महासम्मेलन महिला इकाई इटारसी बसंत पंचमी आयोजन के अंतर्गत हल्दी-कुमकुम का आयोजन भी किया गया।
महिलाओं ने एक-दूसरे को हल्दी और कुमकुम लगाकर शुभकामनाएं दीं और सामाजिक सौहार्द, प्रेम व सम्मान का संदेश दिया।
यह आयोजन न केवल परंपरा का निर्वहन था, बल्कि महिलाओं के बीच आत्मीयता और एकता का सशक्त प्रतीक भी बना।
जिला अध्यक्ष श्रद्धा अग्रवाल का प्रेरणादायक संबोधन
कार्यक्रम की जिला अध्यक्ष श्रीमती श्रद्धा अग्रवाल ने अपने संबोधन में बसंत पंचमी के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा—
“बसंत पंचमी माघ मास की शुक्ल पंचमी को मनाया जाने वाला अत्यंत पावन पर्व है। यह दिन मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मां सरस्वती ज्ञान, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी हैं तथा ब्रह्मा जी की पत्नी मानी जाती हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि बसंत पंचमी से वसंत ऋतु का आगमन होता है, जो प्रकृति में नवजीवन, रंग-बिरंगे फूलों और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
बसंत पंचमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
बसंत पंचमी का त्योहार भारतीय संस्कृति में शिक्षा, कला और सृजनात्मकता के महत्व को दर्शाता है।
इस दिन पीले वस्त्र धारण करने, मीठे व्यंजन बनाने और सरस्वती पूजन की परंपरा है।
वैश्य महासम्मेलन महिला इकाई इटारसी बसंत पंचमी आयोजन ने इन सभी परंपराओं को गरिमा के साथ निभाया।
महिला सशक्तिकरण का सशक्त मंच
यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिला सशक्तिकरण, सामाजिक भागीदारी और नेतृत्व का भी सशक्त उदाहरण बना।
महिला इकाई द्वारा किए गए ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक सोच, संस्कार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हैं।
कार्यक्रम में रहीं ये गणमान्य महिलाएं उपस्थित
इस अवसर पर अनेक सक्रिय और सम्मानित महिलाएं उपस्थित रहीं, जिनमें प्रमुख रूप से—
श्रद्धा अग्रवाल, अंजू गुप्ता, भावना अग्रवाल, रेखा अग्रवाल, आशा भारद्वाज, रानी नामदेव, दमयंती सैनी, अर्चना अग्रवाल, पूजा अग्रवाल, विनीता गर्ग, सुमेधा, रंजीता सोनी सहित अन्य महिलाएं शामिल रहीं।
आयोजन का सामाजिक प्रभाव
वैश्य महासम्मेलन महिला इकाई इटारसी बसंत पंचमी आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब महिलाएं संगठित होकर परंपरा और आधुनिकता को साथ लेकर चलती हैं, तो समाज को नई दिशा मिलती है।
यह आयोजन आने वाली पीढ़ी के लिए संस्कार, संस्कृति और सेवा की प्रेरणा बनकर उभरा।
संवाददाता जीवनलाल जैन नागदा की रिपोर्ट

