इंदौर।
Jain धर्म की आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र, आदिनाथ भगवान की निर्वाण स्थली अष्टापद तीर्थ बद्रीनाथ के पावन कपाट आगामी 23 अप्रैल 2026 को विधि-विधान एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोले जाएंगे। यह ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अवसर श्रंमण संस्कृति के महामहिम संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज की परम प्रभावक शिष्या, आध्यात्मिक श्रमणी एवं सजग साधिका आर्यिकारत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में संपन्न होगा।
यह आयोजन जैन समाज के लिए अत्यंत गौरव और उल्लास का विषय है, क्योंकि अष्टापद तीर्थ को जैन धर्म में मोक्ष और निर्वाण की पावन भूमि के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है।
अष्टापद तीर्थ का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
अष्टापद तीर्थ को Jain धर्म में भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) की निर्वाण स्थली माना जाता है। हिमालय की गोद में स्थित यह तीर्थ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि साधना, तपस्या और आत्मिक शांति का अनुपम केंद्र भी है। वर्षों से यह तीर्थ जैन समाज की आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन एवं साधना के लिए पहुंचते हैं।
अष्टापद तीर्थ बद्रीनाथ क्षेत्र में स्थित होने के कारण इसकी भौगोलिक स्थिति अत्यंत दुर्गम रहती है, जिसके चलते हर वर्ष सीमित अवधि के लिए ही इसके कपाट खोले जाते हैं। कपाट खुलने का यह अवसर श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
पूर्णमति माताजी ससंघ का सानिध्य बनेगा आयोजन की विशेषता
इस वर्ष कपाट उद्घाटन समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह आयोजन आर्यिकारत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में संपन्न होगा। पूर्णमति माताजी, श्रंमण संस्कृति के महान संत आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज की प्रभावक शिष्या हैं और उनके सानिध्य में होने वाला कोई भी धार्मिक आयोजन समाज के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन जाता है।
माताजी ससंघ के सानिध्य में होने वाला यह कार्यक्रम जैन समाज के लिए साधना, संयम और धर्म के मूल सिद्धांतों को आत्मसात करने का अनुपम अवसर प्रदान करेगा।
ट्रस्ट कमेटी ने की आधिकारिक घोषणा
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने जानकारी देते हुए बताया कि अष्टापद तीर्थ ट्रस्ट कमेटी द्वारा कपाट उद्घाटन की सभी तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। ट्रस्ट कमेटी के गौरवशाली अध्यक्ष श्री आदित्यजी कासलीवाल एवं महामंत्री श्री कीर्ति जी पांड्या ने संयुक्त रूप से यह घोषणा की कि वर्ष 2026 में अष्टापद तीर्थ के कपाट पूर्णमति माताजी ससंघ के सानिध्य में विधिवत रूप से खोले जाएंगे।
उन्होंने बताया कि इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान, मंत्रोच्चार, पूजन-विधि एवं विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो सके।
देशभर के श्रद्धालुओं में उत्साह
कपाट उद्घाटन की घोषणा के बाद से ही देशभर के जैन समाज में उत्साह का माहौल है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पावन अवसर पर अष्टापद तीर्थ के दर्शन की योजना बना रहे हैं। यह तीर्थ वर्षों से जैन समाज की एकता, आस्था और धर्मप्रेम का प्रतीक रहा है।
राजेश जैन दद्दू ने बताया कि अष्टापद तीर्थ के दर्शन को Jain धर्म में विशेष पुण्यदायी माना गया है। यहां दर्शन करने से आत्मिक शुद्धि, मानसिक शांति और मोक्ष मार्ग की प्रेरणा प्राप्त होती है।
श्रद्धालुओं से विशेष अपील
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने देशभर के समाजजनों, धर्मप्रेमी बंधुओं एवं श्रद्धालुओं से विशेष आग्रह किया है कि वे इस पुण्य अवसर पर अष्टापद बद्रीनाथ तीर्थ के दर्शन का लाभ अवश्य प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल दर्शन का नहीं, बल्कि आत्मिक उत्थान और धर्म से जुड़ने का भी है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि यात्रा की पूर्व तैयारी समय पर करें, अनुशासन और संयम का पालन करें तथा तीर्थ की पवित्रता बनाए रखने में सहयोग करें।
आध्यात्मिक साधना का अनुपम अवसर
अष्टापद तीर्थ के कपाट खुलना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि यह आध्यात्मिक चेतना के जागरण का अवसर भी है। हिमालय की शांत वादियों में स्थित यह तीर्थ साधकों और श्रद्धालुओं को आत्ममंथन और साधना का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है।
पूर्णमति माताजी ससंघ के सानिध्य में होने वाला यह आयोजन निश्चित रूप से जैन समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा और धर्म, संयम एवं अहिंसा के मूल सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाएगा।
निष्कर्ष
23 अप्रैल 2026 को अष्टापद बद्रीनाथ तीर्थ के कपाट खुलना Jain समाज के लिए एक ऐतिहासिक और अत्यंत पावन क्षण होगा। पूर्णमति माताजी ससंघ का सानिध्य, ट्रस्ट कमेटी की सुदृढ़ व्यवस्थाएं और श्रद्धालुओं की आस्था—इन सबके समन्वय से यह आयोजन निश्चित ही सफल और स्मरणीय बनेगा।
यह अवसर सभी धर्मप्रेमी बंधुओं के लिए अपने जीवन को पुण्य से परिपूर्ण करने, धर्म से जुड़ने और आत्मिक शांति प्राप्त करने का एक दुर्लभ अवसर है।

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