Bharat-अमेरिका रिश्तों में दरार? 20 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा रिश्ता: जसदीप सिंह जस्सी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में Bharat-अमेरिका संबंधों में तनाव और जटिलता देखने को मिल रही है। व्यापार, सुरक्षा और सामरिक सहयोग के मुद्दों पर बातचीत जारी है, लेकिन विशेषज्ञ और भारतीय-अमेरिकी नेताओं का कहना है कि यह रिश्ता लगभग दो दशकों में अपने सबसे निचले स्तर पर है। हाल ही में सिख्स फॉर अमेरिका और सिख्स फॉर ट्रंप के फाउंडर जसदीप सिंह जस्सी ने Bharat-अमेरिका संबंधों पर अपनी चिंता व्यक्त की है।
ट्रंप के पहले साल की सफलता
जसदीप सिंह जस्सी का कहना है कि ट्रंप प्रशासन ने अपने पहले साल में अभूतपूर्व काम किया। उन्होंने कहा:
“राष्ट्रपति ट्रंप ने इतिहास के किसी अन्य अमेरिकी राष्ट्रपति की तुलना में अधिक काम किया। जो काम अन्य राष्ट्रपति 10 साल में करते, वह उन्होंने सिर्फ एक साल में किया।”
जस्सी ने विशेष रूप से घरेलू मामलों में ट्रंप प्रशासन की उपलब्धियों की तारीफ की, जैसे रोजगार सृजन, महंगाई नियंत्रण और अमेरिकी व्यापार घाटे में कमी। उन्होंने बताया कि प्राइवेट सेक्टर में 6,80,000 नई नौकरियां सृजित हुई हैं और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में गिरावट आई है।
अमेरिका में सीमा सुरक्षा और इमिग्रेशन
जस्सी ने अमेरिकी सीमा सुरक्षा और इमिग्रेशन नीतियों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि ट्रंप सरकार ने गैरकानूनी प्रवासन को रोकने और सीमा को पूरी तरह से सुरक्षित करने में सफलता हासिल की है।
“आज अमेरिका में शून्य बॉर्डर क्रॉसिंग है। बाइडेन सरकार के समय हर दिन लगभग 10,000 लोग अमेरिका में प्रवेश करते थे, लेकिन अब यह संख्या नगण्य हो गई है।”
इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका में अपराध पर नियंत्रण के लिए नेशनल गार्ड की तैनाती और बड़े शहरों में अपराध के आंकड़ों में गिरावट को भी उल्लेखनीय बताया।
व्यापार, रोजगार और महंगाई में सुधार
जस्सी के अनुसार, ट्रंप सरकार ने अमेरिका में व्यापार घाटे में 35 प्रतिशत की कमी की और घरेलू रोजगार सृजन के क्षेत्र में रिकॉर्ड कायम किया। उन्होंने कहा:
- प्राइवेट सेक्टर में 6,80,000 नई नौकरियां बनीं।
- रोजमर्रा की वस्तुओं और गैस की कीमतों में गिरावट आई।
- सालाना आय 75,000 डॉलर से कम वाले नागरिकों और शादीशुदा जोड़ों के लिए 2,000 डॉलर की राहत पैकेज योजना लागू की गई।
यह पहल आम अमेरिकी परिवारों के लिए राहत और आर्थिक स्थिरता का संकेत है।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय की स्थिति
जस्सी ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वाभाविक नागरिक, स्थायी निवासी और अमेरिका में जन्मे बच्चे सभी अमेरिकी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।
“वे भारतीय-अमेरिकी हैं, उनके बच्चे यहीं जन्मे हैं और उनका भविष्य अमेरिका में ही है। अमेरिका की समृद्धि के साथ, भारतीय-अमेरिकी समुदाय भी फल-फूल रहा है।”
जस्सी का कहना है कि अमेरिकी प्रशासन की प्रगति भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए भी सकारात्मक अवसर पैदा कर रही है।
Bharat-अमेरिका संबंधों पर चिंता
हालांकि, जस्सी ने दोनों देशों के रिश्तों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस साल भारत-अमेरिका संबंध मजबूत होने की उम्मीद थी, लेकिन वर्तमान स्थिति बहुत गंभीर है।
“मैंने पिछले लगभग 20 वर्षों में Bharat और अमेरिका के रिश्तों को इतना कमजोर और निचले स्तर पर नहीं देखा।”
व्यापार, सुरक्षा और तकनीकी सहयोग के मुद्दों पर मतभेद और राजनीतिक रुख के अंतर ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
व्यापार और सुरक्षा पर असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप प्रशासन के राष्ट्रवादी रुख और सुरक्षा-केंद्रित नीति ने भारत सहित कई देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा किया है। जस्सी ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा, हथियारों की बिक्री, उच्च तकनीक और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर सहमति अभी भी लंबित है।
उन्होंने यह भी कहा कि उच्च स्तरीय अधिकारी वार्ता जारी है, लेकिन राजनीतिक मतभेद और नीतिगत अंतर दोनों देशों के संबंधों में ठहराव पैदा कर रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएं
जस्सी का मानना है कि अगर Bharat और अमेरिका व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएं और व्यापार, सुरक्षा तथा तकनीकी सहयोग को प्राथमिकता दें, तो यह रिश्ता फिर से मजबूत हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय इस प्रक्रिया में एक पुल का काम कर सकता है।
“Bharatऔर अमेरिका दोनों के नेताओं को सक्रिय कूटनीतिक प्रयास करने होंगे। द्विपक्षीय सहयोग के लिए पारदर्शिता और आपसी समझ बेहद जरूरी है।”
निष्कर्ष
जसदीप सिंह जस्सी के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनावी वादों को लागू करने में सफलता पाई है। घरेलू मामलों में उन्होंने रिकॉर्ड स्तर की उपलब्धियां हासिल की हैं।
लेकिन Bharat-अमेरिका संबंध वर्तमान में अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। व्यापार, सुरक्षा और तकनीकी सहयोग में मतभेद विद्यमान हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों को कूटनीतिक संवाद तेज करना होगा ताकि यह संबंध फिर से मजबूत हो सके।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय भी इस बदलाव और द्विपक्षीय संबंधों के विकास पर नजर रख रहा है, और इसका असर उनके भविष्य और अवसरों पर भी पड़ सकता है।
