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Nagda: उद्योगों और एसिड माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की मांग, Chambal नदी प्रदूषण का मामला गंभीर

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Published On: 20 January 2026
Nagda: Farmers Demand Strict Action on Industries and Acid Mafia Polluting Chambal River
— Nagda: Farmers Demand Strict Action on Industries and Acid Mafia Polluting Chambal River

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Chambal नदी में रासायनिक अपशिष्ट रोकने की मांग, किसान यूनियन ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

Nagda(नि.प्र.)।
Chambal नदी में रासायनिक अपशिष्ट और हज़ारडस्ट एसिड के लगातार डाले जाने के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन मंच ने मंगलवार को एसडीएम नागदा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उद्योगों और एसिड माफियाओं द्वारा नदी में अपशिष्ट डालने की गंभीर शिकायत करते हुए रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

ज्ञापन सौंपने का नेतृत्व मंच के प्रदेश अध्यक्ष कवि देव सिंह गुर्जर ने किया। ज्ञापन में बताया गया कि चम्बल नदी में उद्योगों और एसिड माफियाओं द्वारा डाले जा रहे रासायनिक अपशिष्ट से 14 गांव गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण भूजल स्रोत दूषित हो रहे हैं और खेती योग्य जमीनें बंजर हो रही हैं।

Chambal नदी में रासायनिक अपशिष्ट डालने की स्थिति

ज्ञापन में कहा गया है कि उद्योग बिना किसी ट्रीटमेंट के अपने रासायनिक अपशिष्ट को सीधे नालों के माध्यम से Chambal नदी में डाल रहे हैं। इसके अलावा, एसिड माफिया खतरनाक हज़ारडस्ट रसायन अन्यत्र से लेकर आए हैं और टैंकरों के जरिए विभिन्न नालों और नदी में लगातार छोड़ रहे हैं।

विशेषकर मुक्तेश्वर महादेव मंदिर और कब्रिस्तान के मध्य स्थित नाले में अपशिष्ट छोड़ने की स्थिति गंभीर बताई गई है। बड़े-बड़े गोदामों के माध्यम से टैंकर रात में पाइपलाइन के जरिए अपशिष्ट छोड़ते हैं, जिससे नदी में अत्यधिक प्रदूषण फैलता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस कारण उनके भूजल स्रोत प्रदूषित हो गए हैं और खेती योग्य जमीनों की उर्वरता भी कम हो गई है।

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स्वास्थ्य पर गंभीर असर

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि प्रदूषण के कारण बच्चों में जन्मजात विकलांगता बढ़ रही है। इसके अलावा, कैंसर, हार्ट अटैक और अन्य गंभीर बीमारियों की दर भी इस क्षेत्र में बढ़ गई है। किसान यूनियन ने कहा कि यह सिर्फ पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि मानव जीवन पर सीधा असर डालने वाला मुद्दा बन चुका है।

ग्रामीणों के अनुसार, नदी में डाले जाने वाले रसायनिक अपशिष्ट से उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। पीने के पानी के स्रोत प्रदूषित होने के कारण लोग सुरक्षित पानी के लिए दूर-दूर तक जाते हैं।

औद्योगिक लापरवाही और प्रशासन की मिलीभगत

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि विधानसभा चुनाव 2023 के बाद से नागदा के उद्योग बिना किसी ट्रीटमेंट के रसायनिक अपशिष्ट पानी नदी में लगातार छोड़ रहे हैं। इससे लाखों रुपये प्रतिदिन की लागत बचाई जा रही है। उद्योग प्रशासन को यह बताकर संतुष्ट कर रहे हैं कि उनका निस्त्राव “जीरो” है, जबकि रात में भारी मात्रा में प्रदूषित रसायन नालों में छोड़ा जा रहा है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि ट्रांसपोर्टरों को लाखों रुपये देकर ट्रीटमेंट प्लांट तक अपशिष्ट न पहुंचाने और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण रात्रीकालीन नाले के माध्यम से नदी में अपशिष्ट छोड़ा जा रहा है। इससे चम्बल नदी अत्यधिक प्रदूषित हो रही है और इलाके के पर्यावरणीय संतुलन को खतरा है।

सत्तारूढ़ संरक्षण का आरोप

किसान यूनियन ने आरोप लगाया कि एसिड माफियाओं को सत्तारूढ़ लोगों का संरक्षण प्राप्त है। पुलिस प्रशासन और अन्य अधिकारी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। माफियाओं का यह तक कहना है कि वे अधिकारियों को अपने हिस्से के अनुसार वितरित कर देते हैं, जिससे प्रशासन अनदेखी करता है और स्थिति बढ़ती जा रही है।

कवि देव सिंह गुर्जर ने चेतावनी दी कि यदि एसिड माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भारतीय किसान यूनियन मंच जनहित में आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

ग्रामीणों और किसान नेताओं की उपस्थिति

ज्ञापन सौंपते समय बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान नेता उपस्थित रहे। प्रमुख उपस्थित व्यक्तियों में शामिल थे:

  • किसान यूनियन जिला अध्यक्ष एवं जनपद उपाध्यक्ष देवीलाल चन्द्रवंशी
  • सरपंच प्रकाश गुर्जर, गोपाल सिंह गुर्जर
  • ब्लॉक युवक कांग्रेस अध्यक्ष रवि पटेल, रजला, विक्रम गुर्जर, रवि डोडिया, राहुल बना गुराडिया
  • अन्य किसान साथी और स्थानीय ग्रामीण

ग्रामीणों ने कहा कि नदी के प्रदूषण से उनके जीवन, स्वास्थ्य और कृषि दोनों प्रभावित हो रहे हैं। बच्चों और किसानों के जीवन पर इसका सीधा असर पड़ा है।

कृषि और पर्यावरण पर खतरा

ज्ञापन में बताया गया कि नदी में डाले जा रहे रासायनिक अपशिष्ट के कारण भूमि की उर्वरता कम हो रही है। खेत बंजर हो रहे हैं और फसलें प्रभावित हो रही हैं। भूजल स्रोत प्रदूषित होने से पीने और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता घट रही है।

किसान यूनियन ने प्रशासन से आग्रह किया कि प्रदूषण को रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और नदी के आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणीय निगरानी बढ़ाई जाए।

आगामी कदम और आंदोलन की चेतावनी

कवि देव सिंह गुर्जर ने कहा कि यदि प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या को अनदेखा करता है, तो भारतीय किसान यूनियन मंच सार्वजनिक आंदोलन और कानूनी कार्रवाई के लिए मजबूर होगा। उनका कहना है कि चम्बल नदी और उसके आसपास के गांवों के लोगों का स्वास्थ्य और जीवन सुरक्षा सबसे प्राथमिक है।

निष्कर्ष

Chambal नदी में रासायनिक अपशिष्ट डालने की समस्या सिर्फ पर्यावरणीय नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, स्वास्थ्य और कृषि पर गंभीर प्रभाव डाल रही है। किसान यूनियन ने प्रशासन से स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन और जनहित संरक्षण के लिए कदम उठाए जाएंगे।

ज्ञापन के माध्यम से यह भी स्पष्ट किया गया कि एसिड माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई तत्काल आवश्यक है, अन्यथा इस क्षेत्र में पर्यावरणीय और सामाजिक संकट गहराता जाएगा।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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