ब्रह्माबाबा पुण्य स्मृति दिवस पर इंदौर के ज्ञानशिखर में भव्य आयोजन हुआ। समाधि प्रतिकृति, मौन साधना, पुष्प सजावट और ध्यान से गूंजा वातावरण।
ब्रह्माबाबा पुण्य स्मृति दिवस: श्रद्धा, साधना और सादगी का अनुपम संगम
ब्रह्माबाबा पुण्य स्मृति दिवस के अवसर पर इंदौर के न्यू पलासिया स्थित ज्ञानशिखर परिसर में आस्था, भक्ति और मौन साधना का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्माबाबा की पुण्य स्मृति में पूरा परिसर एक क्विंटल फूलों से सजाया गया।
हजारों ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारियों ने मौन रहकर बाबा को श्रद्धासुमन अर्पित किए। वातावरण में शांति, प्रेम और पवित्रता की अनुभूति हो रही थी।
ज्ञानशिखर में दिव्य साज-सज्जा
ज्ञानशिखर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया। यहां:
-
माउंट आबू में स्थित ब्रह्माबाबा की समाधि ‘शांति स्तंभ’ की प्रतिकृति
-
बाबा की कुटिया
-
जीवन यात्रा दर्शाती चित्र प्रदर्शनी
-
मेडिटेशन रूम
इन सभी को फूलों, दीपों और श्वेत वस्त्रों से सजाया गया।
ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी के प्रेरणादायी विचार
इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कहा –
“ब्रह्माबाबा का जीवन त्याग, तपस्या और सादगी का संगम था।”
उन्होंने बताया कि पिताश्री ब्रह्माबाबा, जिन्हें दादा लेखराज के नाम से जाना जाता था, एक प्रसिद्ध हीरे-जवाहरात के व्यापारी थे। उनका जीवन वैभव, धन-धान्य और सुख-सुविधाओं से भरा था।
लेकिन परमात्मा शिव की प्रवेशता के बाद उन्होंने अपना तन, मन, धन और जीवन ईश्वरीय सेवा में समर्पित कर दिया।
दादा लेखराज से ब्रह्माबाबा तक की यात्रा
दादा लेखराज से ब्रह्माबाबा बनने की यात्रा आत्म-परिवर्तन की मिसाल है।
उन्होंने:
-
सांसारिक वैभव छोड़ा
-
सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया
-
त्याग और तपस्या को मूल मंत्र बनाया
उनका जीवन यह सिखाता है कि सच्चा सुख बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति में है।
नारी सशक्तिकरण का आधार
ब्रह्माबाबा ने उस समय नारी को सशक्त किया, जब समाज में उसे अबला और भोग्या समझा जाता था।
उन्होंने महिलाओं में:
-
आत्मसम्मान जगाया
-
नेतृत्व की शक्ति दी
-
दैवी स्वरूप का बोध कराया
आज ब्रह्माकुमारी संस्थान विश्व का सबसे बड़ा नारी शक्ति द्वारा संचालित आध्यात्मिक संगठन बन चुका है।
मौन साधना और योग तपस्या
ब्रह्माबाबा पुण्य स्मृति दिवस पर सभी ने मौन साधना की।
मौन के माध्यम से:
-
आत्मा की आवाज सुनी गई
-
मन की अशांति शांत हुई
-
परमात्मा से जुड़ाव महसूस हुआ
साथ ही सामूहिक योग तपस्या द्वारा विश्व में शांति, प्रेम और सद्भाव के प्रकंपन फैलाने का संकल्प लिया गया।
भोग अर्पण और ईश्वरीय महावाक्य
कार्यक्रम की शुरुआत ईश्वरीय महावाक्यों के वाचन से हुई।
इसके बाद:
-
सभी ब्रह्माकुमारी बहनों ने मिलकर
-
परमात्मा शिव को भोग अर्पण किया
यह क्षण अत्यंत भावुक और दिव्य था।
समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता
इस अवसर पर:
-
मीडिया
-
प्रशासन
-
व्यापार
-
उद्योग
-
चिकित्सा
-
शिक्षा जगत
से जुड़े अनेक प्रबुद्धजनों ने भाग लिया।
सभी ने एक साथ ध्यान और योग कर विश्व शांति की कामना की।
ध्यान कक्ष और चित्र प्रदर्शनी
ध्यान कक्ष में विशेष शांति का अनुभव हुआ।
चित्र प्रदर्शनी में:
-
ब्रह्माबाबा का जीवन
-
सेवा यात्रा
-
त्याग और तपस्या
-
नारी सशक्तिकरण
को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया।
विश्व शांति का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी ने संकल्प लिया कि:
-
स्वयं में शांति लाएंगे
-
परिवार में प्रेम बढ़ाएंगे
-
समाज में सद्भाव फैलाएंगे
-
विश्व शांति के लिए कार्य करेंगे
समापन
ब्रह्माबाबा पुण्य स्मृति दिवस केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्म-जागरण का पर्व है।
यह दिन हमें सिखाता है कि:
-
त्याग में शक्ति है
-
सादगी में सुंदरता है
-
तपस्या में दिव्यता है
ज्ञानशिखर में हुआ यह आयोजन हर श्रद्धालु के दिल में शांति और प्रेम की अमिट छाप छोड़ गया।



