धार्मिक बाल संस्कार योजना के तहत नागदा में 44 बच्चों का सम्मान हुआ। जानिए योजना का उद्देश्य, आयोजन की पूरी कहानी और समाज पर इसका प्रभाव।
धार्मिक बाल संस्कार योजना: नागदा में संस्कारों की रोशनी, 44 बच्चों का गौरवपूर्ण सम्मान
धार्मिक बाल संस्कार योजना क्या है?
धार्मिक बाल संस्कार योजना समाज के बच्चों को धार्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने की एक प्रेरणादायक पहल है। इस योजना का उद्देश्य बच्चों को अनुशासन, सेवा, भक्ति और संस्कारों की राह पर ले जाना है ताकि वे भविष्य में एक जिम्मेदार और संस्कारी नागरिक बन सकें।
यह योजना अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन महिला परिषद की प्रांतीय इकाई द्वारा संचालित की जाती है, जिसमें बच्चों को नियमित धार्मिक शिक्षा, सामूहिक पूजन, प्रार्थना और नैतिक संस्कार सिखाए जाते हैं।
नागदा में धार्मिक बाल संस्कार योजना का भव्य समापन
नागदा नगर में धार्मिक बाल संस्कार योजना का भव्य समापन समारोह बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ। पूरे नगर में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। समाजजन, महिलाएं, युवा और बच्चे—सभी ने मिलकर इस संस्कार यात्रा को एक पर्व का रूप दे दिया।
कार्यक्रम में बच्चों की मुस्कान, अभिभावकों का गर्व और समाज की एकजुटता साफ झलक रही थी। मंच को सुंदर धार्मिक प्रतीकों और पुष्प सज्जा से सजाया गया था।
धार्मिक बाल संस्कार योजना में 44 बच्चों का सम्मान
समापन अवसर पर नागदा शाखा के 44 बच्चों को विशेष सम्मान दिया गया। बच्चों को –
-
लैपटॉप बैग
-
पानी की बोतल
-
प्रभावना सामग्री
भेंट की गई। इसके साथ ही लकी ड्रॉ के माध्यम से एक बच्चे को चांदी का सिक्का भी प्रदान किया गया, जिसने बच्चों में और अधिक उत्साह भर दिया।
यह सम्मान लाभार्थी कोलन परिवार की ओर से दिया गया, जो समाज सेवा में निरंतर सक्रिय रहता है।
धार्मिक बाल संस्कार योजना की कार्यप्रणाली
धार्मिक बाल संस्कार योजना के अंतर्गत पूरे वर्ष हर रविवार –
-
सामूहिक स्नात्र पूजन
-
धार्मिक पाठ
-
भक्ति गीत
-
नैतिक शिक्षा
जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे। बच्चों को खेल-खेल में धर्म, संस्कार और अनुशासन सिखाया गया।
नागदा में इस योजना का संचालन प्रीति सकलेचा और सपना बोहरा द्वारा सफलतापूर्वक किया गया। उनके समर्पण से ही यह योजना इतनी प्रभावी बन सकी।
महिला परिषद और नवकार बहु परिषद की भूमिका
इस योजना की रीढ़ हैं –
-
अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन महिला परिषद
-
नवकार बहु परिषद
इन दोनों संस्थाओं ने मिलकर बच्चों के अंदर धार्मिक भावना, सेवा भाव और अनुशासन को विकसित करने का बीड़ा उठाया। महिला गुरुजी और धार्मिक पाठशाला संचालिकाओं को सम्मान स्वरूप समायिक बैग भेंट किए गए।
कोलन परिवार का योगदान
यह पूरी योजना स्वर्गीय बाबूलालजी कोलन की स्मृति में आयोजित की गई। उनके परिवार –
-
सुशीला देवी कोलन
-
धर्मेन्द्र-सारिका कोलन
-
हर्ष-प्रियंशी कोलन
-
जय कोलन परिवार
ने इसे लाभार्थी स्वरूप संचालित किया। उनका उद्देश्य केवल एक ही था – बच्चों को संस्कार देना।
बच्चों में दिखा संस्कारों का असर
धार्मिक बाल संस्कार योजना का सबसे सुंदर परिणाम यह रहा कि बच्चों के व्यवहार में –
-
शिष्टाचार
-
अनुशासन
-
सेवा भावना
-
बड़ों के प्रति सम्मान
जैसे गुण स्पष्ट दिखाई देने लगे। अभिभावकों ने बताया कि बच्चे घर पर भी पूजा, प्रार्थना और अच्छे व्यवहार को अपनाने लगे हैं।
समाज पर पड़ा सकारात्मक प्रभाव
इस योजना ने पूरे समाज में –
-
धार्मिक जागरूकता
-
बच्चों के प्रति जिम्मेदारी
-
संस्कारों की अहमियत
को और मजबूत किया। लोग अब बच्चों को मोबाइल और टीवी से हटाकर धार्मिक गतिविधियों से जोड़ने लगे हैं।
पहले भी सफल रही धार्मिक बाल संस्कार योजना
महिला परिषद की प्रांतीय अध्यक्ष सारिका कोलन ने बताया कि इससे पहले धार्मिक बाल संस्कार योजना–1 के अंतर्गत लगभग 1000 बच्चों को पुरस्कृत किया जा चुका है। यह इस बात का प्रमाण है कि यह योजना केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन चुकी है।
भविष्य की दिशा
आने वाले समय में धार्मिक बाल संस्कार योजना को और अधिक शाखाओं में शुरू करने की योजना है। लक्ष्य है कि –
-
हर बच्चे तक संस्कार पहुंचे
-
हर घर में धार्मिक वातावरण बने
-
समाज मजबूत बने
निष्कर्ष
धार्मिक बाल संस्कार योजना केवल बच्चों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने का प्रयास है। नागदा में हुआ यह समापन समारोह इस बात का प्रमाण है कि जब समाज मिलकर बच्चों के भविष्य के लिए सोचता है, तो संस्कारों की रोशनी पूरे जीवन को उजाला कर देती है।


