MP में स्लीपर बसों की सघन जांच यात्रियों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग सख्त
MP में स्लीपर बसों से यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए परिवहन विभाग ने कड़े और व्यापक निर्देश जारी किए हैं। हाल के वर्षों में स्लीपर बसों में आग लगने, आपात स्थिति में बाहर निकलने में दिक्कत और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसी घटनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। नए नियमों के तहत प्रदेश में संचालित सभी स्लीपर बसों की विशेष जांच की जाएगी और इसके लिए सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों RTO को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक बस की तकनीकी, संरचनात्मक और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की जाएगी। सभी RTO को निर्देश दिए गए हैं कि वे सात दिनों के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट परिवहन आयुक्त कार्यालय को भेजें।
ड्राइवर के केबिन में लगी पार्टिशन डोर हटाना अनिवार्य
परिवहन विभाग द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों में सबसे अहम फैसला यह लिया गया है कि स्लीपर बसों में ड्राइवर के केबिन में लगी पार्टिशन डोर (Partition Door) को अनिवार्य रूप से हटाया जाएगा। विभाग का मानना है कि आपात स्थिति, जैसे आग लगने या दुर्घटना के समय यह पार्टिशन डोर यात्रियों के बाहर निकलने में बाधा बनती है। कई मामलों में देखा गया है कि इसी कारण यात्रियों को समय पर सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका।
अब किसी भी स्लीपर बस में ड्राइवर के केबिन और यात्री क्षेत्र के बीच स्थायी या अस्थायी पार्टिशन की अनुमति नहीं होगी। जांच के दौरान यदि ऐसी व्यवस्था पाई जाती है तो बस संचालक पर कार्रवाई की जाएगी।
फायर डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम होगा अनिवार्य
यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी स्लीपर बसों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम लगाया जाना अनिवार्य होगा। यह सिस्टम आग लगते ही अलार्म के माध्यम से संकेत देगा और स्वतः आग बुझाने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
विभाग ने इसके लिए एक महीने की समय-सीमा तय की है। यदि तय अवधि के भीतर किसी बस में यह सिस्टम नहीं लगाया गया तो उसे संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह कदम विशेष रूप से रात के समय लंबी दूरी तय करने वाली स्लीपर बसों में यात्रियों की जान बचाने के लिए अहम माना जा रहा है।
सभी स्लीपर बसों की विशेष जांच के निर्देश
परिवहन आयुक्त कार्यालय द्वारा MP के सभी जिलों के RTO को विशेष अभियान चलाकर स्लीपर बसों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। उप परिवहन आयुक्त (शिकायत) किरण कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान पूरी गंभीरता से चलाया जाए और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जांच के दौरान बसों के दस्तावेज, बॉडी स्ट्रक्चर, फायर सेफ्टी उपकरण, आपात निकास, इलेक्ट्रिक वायरिंग और लेआउट का विशेष रूप से निरीक्षण किया जाएगा। सभी RTO को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्यालय भेजनी होगी, ताकि राज्य स्तर पर नियमों के पालन की समीक्षा की जा सके।

स्लीपर बस में लगे स्लाइडर हटाने के निर्देश
नए नियमों के तहत स्लीपर बसों में बर्थ के साथ लगाए गए स्लाइडर को तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग के अनुसार, ये स्लाइडर आपात स्थिति में यात्रियों के बाहर निकलने में रुकावट पैदा करते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि स्लाइडर फंस जाने के कारण यात्री समय पर बाहर नहीं आ पाए।
अब किसी भी स्लीपर बस में ऐसा कोई उपकरण या संरचना नहीं होगी जो यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही में बाधा बने।
फायर एक्सटिंग्विशर रखना अनिवार्य
परिवहन विभाग ने प्रत्येक स्लीपर बस में कम से कम 10 किलोग्राम क्षमता का फायर एक्सटिंग्विशर रखना अनिवार्य कर दिया है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि फायर एक्सटिंग्विशर चालू हालत में हो और चालक व स्टाफ को इसके उपयोग की जानकारी हो।
जांच के दौरान यदि फायर एक्सटिंग्विशर अनुपस्थित या खराब हालत में पाया गया तो बस के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
चेसिस में एक्सटेंशन वाली बसें होंगी बंद
परिवहन विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चेसिस में एक्सटेंशन कर बनाई गई बस बॉडी को तत्काल संचालन से बाहर किया जाएगा। ऐसी बसें न केवल नियमों का उल्लंघन करती हैं, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में अत्यधिक खतरनाक साबित हो सकती हैं।
जांच के दौरान यदि किसी बस में अवैध एक्सटेंशन पाया गया तो उसका परमिट निरस्त किया जा सकता है।
पंजीयन के समय लेआउट ड्राइंग अनिवार्य
अब स्लीपर बसों के पंजीयन के समय पूरा लेआउट ड्राइंग देना भी अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें बस के अंदर बर्थ की स्थिति, आपात निकास, ड्राइवर केबिन, फायर सेफ्टी उपकरण और अन्य तकनीकी विवरण शामिल होंगे।
इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि बस का निर्माण और संचालन परिवहन नियमों के अनुसार ही किया गया है।
यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
परिवहन विभाग का कहना है कि इन नए नियमों और सख्त जांच अभियान का मुख्य उद्देश्य स्लीपर बसों में यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत करना है। विभाग ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले बस संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
MP में स्लीपर बसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह कदम यात्रियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन से स्लीपर बस यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद होने की उम्मीद
