Padma Shri Rajaram Jain Death News ने पूरे देश के जैन समाज, साहित्य जगत और अकादमिक समुदाय को गहरे शोक में डुबो दिया है। जैन रत्न, पद्मश्री सम्मानित, बुंदेलखंड गौरव, भारतविद् एवं महान पांडुलिपि विशेषज्ञ प्रो. राजाराम जैन का 95 वर्ष की आयु में नोएडा में निधन हो गया। उनके जाने से न केवल जैन समाज बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा को अपूरणीय क्षति हुई है।
राजेश जैन दद्दू
प्रो. राजाराम जैन का जीवन परिचय
मध्यप्रदेश के सागर जिले के पास स्थित मालथोन (बुंदेलखंड) में जन्मे प्रो. राजाराम जैन प्रारंभ से ही मेधावी और जिज्ञासु प्रवृत्ति के थे। उनका जीवन ज्ञान-साधना, अनुसंधान और भारतीय विरासत के संरक्षण को समर्पित रहा।
Padma Shri Rajaram Jain Death News केवल एक व्यक्ति के निधन की सूचना नहीं है, बल्कि यह उस युग का अंत है जिसने मौन साधना के साथ भारतीय पांडुलिपियों को नया जीवन दिया।
Padma Shri Rajaram Jain Death News: समाज में शोक की लहर
उनके निधन का समाचार मिलते ही इंदौर, भोपाल, दिल्ली, जयपुर, सागर, विदिशा सहित पूरे देश में जैन समाज स्तब्ध रह गया।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि 95 वर्ष की आयु में उनका देहावसान हुआ।
पांडुलिपि संरक्षण में अतुलनीय योगदान
Padma Shri Rajaram Jain Death News इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि प्रो. जैन पिछले 64 वर्षों से अधिक समय तक—
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प्राचीन और मध्यकालीन भारतीय पांडुलिपियों का
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संरक्षण (Restoration)
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संपादन (Editing)
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अनुवाद (Translation)
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और अनुसंधान (Research)
करते रहे।
उन्होंने सैकड़ों दुर्लभ जैन, बौद्ध और भारतीय दर्शन से जुड़ी पांडुलिपियों को नष्ट होने से बचाया।
भाषाओं के मनीषी विद्वान
प्रो. राजाराम जैन को—
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प्राकृत
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पाली
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अपभ्रंश
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संस्कृत
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हिंदी
पर समान अधिकार प्राप्त था।
उनकी यह बहुभाषिक विद्वता ही उन्हें भारतविद् (Indologist) और एपिग्राफिस्ट के रूप में विशिष्ट बनाती है।
सम्मान और उपलब्धियाँ
Padma Shri Rajaram Jain Death News में जिन सम्मानों का उल्लेख आवश्यक है:
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पद्मश्री सम्मान
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अटल सम्मान
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जैन रत्न
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बुंदेलखंड गौरव
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अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सम्मान
ये सभी सम्मान उनके मौन, तपस्वी और निस्वार्थ कार्य के साक्ष्य हैं।
जैन समाज और विद्वानों की श्रद्धांजलि
इंदौर दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी—
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डॉ. जैनेन्द्र जैन
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अमित कासलीवाल (महावीर ट्रस्ट)
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मनोहर झांझरी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, फेडरेशन)
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हंसमुख गांधी
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टीके वेद
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सुशील पांड्या
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मयंक जैन
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नरेंद्र वेद
सहित फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका श्रीमती पुष्पा कासलीवाल, श्रीमती रेखा जैन, श्रीफल, श्रीमती मुक्ता जैन ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा—
“प्रो. राजाराम जैन का जाना जैन समाज ही नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति है।”
क्यों ऐतिहासिक है Padma Shri Rajaram Jain Death News
Padma Shri Rajaram Jain Death News और भारतीय ज्ञान परंपरा
उनका कार्य केवल अकादमिक नहीं था, बल्कि—
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भारतीय संस्कृति का संरक्षण
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जैन दर्शन का वैश्विक प्रचार
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प्राचीन ग्रंथों को नई पीढ़ी तक पहुँचाना
था।
भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा
प्रो. जैन का जीवन यह सिखाता है कि—
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बिना शोर किए
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बिना प्रचार के
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निरंतर साधना से
भी इतिहास रचा जा सकता है।
निष्कर्ष
Padma Shri Rajaram Jain Death News केवल एक खबर नहीं, बल्कि एक युग के समापन की सूचना है।
उनकी स्मृति, उनका साहित्य और उनका कार्य आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
