Dr Bharat Sharma’s के मुख्य आतिथ्य में कथक नृत्य की अद्भुत छटा का अनुभव
इंदौर।
ध्रुपद डांस अकैडमी के संस्थापक आशीष पिल्लई द्वारा आयोजित नूपुरतरंग कथक महोत्सव हाल ही में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। महोत्सव का आरंभ मंच, रंग देवी और नटराज की आराधना से किया गया, जिसमें संस्कृति मंत्रालय सदस्य डॉ. भरत शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर उन्होंने कथक नृत्य की महत्ता, इतिहास और सांस्कृतिक योगदान पर प्रकाश डाला।
कथक – Bharat की शास्त्रीय नृत्य परंपरा
मुख्य अतिथि Dr Bharat Sharma’s ने अपने उद्बोधन में कहा कि कथक नृत्य केवल नृत्य की कला नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का सांस्कृतिक प्रतीक है। उन्होंने बताया कि कथक की जड़ें वैदिक काल से जुड़ी हैं और यह नृत्य गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से विकसित हुआ।
Dr.Sharma’s ने आगे कहा कि कथक ने समय के साथ धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों को आत्मसात किया। पं. लच्छू महाराज, पं. शंभू महाराज और पं. बिरजू महाराज जैसे आचार्यों ने कथक को आधुनिक संदर्भ में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। कथक नृत्य में ताल, लय और भावनाओं का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। इसमें नवरस, श्रृंगार, रौद्र, वीर और भयानक रस को नृत्य मुद्राओं और अभिनय के माध्यम से दर्शाया जाता है।
Dr. Sharma’s ने विशेष रूप से यह भी कहा कि कथक की अनुकूलन क्षमता इसे सभी समयों और समाजों में प्रासंगिक बनाती है। यह नृत्य शब्दों के बिना भी अपनी कथा और भावनाओं को व्यक्त करने की शक्ति रखता है। यही कारण है कि कथक नृत्य भारत के शास्त्रीय और आध्यात्मिक वैभव का प्रतिनिधित्व करता है।
महोत्सव का आरंभ
महोत्सव की शुरुआत तीन ताल में गणेश वंदना, पारंपरिक ठाठ, आमद और गतनिकास से हुई। इसके बाद नृत्य प्रस्तुतियों का शृंगार हुआ जिसमें स्तुति, तांडव, आमद, तोड़े, परण, कवित्त और तिहाइया शामिल थे।
विशेष प्रस्तुति में अष्ट रसों – प्रेम, श्रृंगार, रौद्र, वीर, भयानक, करुण, हास्य और अद्भुत रस – पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों में न केवल कथक की पारंपरिक तकनीक दिखाई गई, बल्कि फ्यूज़न नृत्य और आधुनिक प्रस्तुति शैली का भी सम्मिलन किया गया। ताल वाद्यों के साथ यह प्रदर्शन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया।
मंच पर कलाकारों ने प्रत्येक भाव और मुद्रा को अत्यंत सजीव रूप में प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गहनता और लयबद्धता का अनुभव कराया।
वरिष्ठ कलाकारों का सम्मान
कार्यक्रम में वरिष्ठ कलाकारों संजय महाजन, माधवी चंदोलीकर और रोहन पटवर्धन को डॉ. भरत शर्मा तथा मंचसीन अतिथियों कमल डाबी, मंजूषा जौहरी, ऋषिना नातु, दीपक लवंगड़े और वीरेंद्र पौराणिक द्वारा शॉल और प्रशस्ति पत्र देकर कलाकीर्ति सम्मान से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा सभी अतिथियों का शॉल और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर शहर के वरिष्ठ नागरिक और कला प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। सभागार खचाखच भरा हुआ था और उपस्थित लोग कथक की इस अद्भुत प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध हो गए।
कथक की विशेषताएँ और आधुनिक प्रस्तुति
ध्रुपद डांस अकैडमी द्वारा प्रस्तुत कथक महोत्सव में कथक के आमद, तोड़े, परण, कवित्त और तिहाइया जैसे पारंपरिक तत्वों के साथ फ्यूज़न नृत्य और अभिनव प्रस्तुति भी शामिल थे। अष्ट रसों पर आधारित नृत्य ने दर्शकों को भाव और ताल के अद्भुत संगम का अनुभव कराया।
महोत्सव ने यह भी दिखाया कि कथक नृत्य प्राचीन परंपरा और आधुनिक अभिव्यक्ति का अद्भुत मिश्रण है। इसके माध्यम से दर्शक न केवल सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य का वैभव और गौरव भी महसूस कर पाते हैं।
महोत्सव के आयोजन की विशेषताएँ
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मुख्य अतिथि: डॉ. भरत शर्मा, सदस्य – संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार।
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आरंभ: तीन ताल में गणेश वंदना और पारंपरिक ठाठ।
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प्रस्तुतियाँ: अष्ट रसों और फ्यूज़न नृत्य के माध्यम से प्रेम, श्रृंगार, रौद्र, वीर, भयानक रस की अभिव्यक्ति।
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सम्मान: वरिष्ठ कलाकारों को कलाकीर्ति सम्मान।
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उपस्थिति: शहर के वरिष्ठ नागरिक, कला प्रेमी और कथक के अनुयायी।
युवा पीढ़ी और कथक नृत्य
Dr Bharat Sharma’s ने यह भी कहा कि ऐसे महोत्सव युवा पीढ़ी के लिए प्रेरक हैं। ये कार्यक्रम उन्हें कथक और अन्य शास्त्रीय नृत्यों के प्रति जागरूक करते हैं और उनकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समझ को बढ़ाते हैं। कथक नृत्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का माध्यम भी है।
महोत्सव के दौरान उपस्थित सभी कलाकारों और श्रद्धालुओं ने इसे सफल और प्रेरणादायक आयोजन बताया। कार्यक्रम ने दर्शकों को गहन आध्यात्मिक अनुभव और सांस्कृतिक समृद्धि प्रदान की।
निष्कर्ष
नूपुरतरंग कथक महोत्सव ने कथक नृत्य की गहनता, लय और भावानुभूति को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। यह महोत्सव भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संस्कृति की विरासत, गौरव और आध्यात्मिकता का प्रतिनिधित्व करता है।
Dr Bharat Sharma’s ने कहा कि ऐसे आयोजन कला और संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और युवा पीढ़ी को नृत्य कला में अनुशासन, समर्पण और आध्यात्मिक अनुभव की ओर प्रेरित करते हैं।
महोत्सव ने यह साबित किया कि कथक नृत्य केवल कला नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का जीवंत प्रतीक है। उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने महोत्सव का भरपूर आनंद लिया और इसे भविष्य में लगातार आयोजित करने की कामना की।
