सरस्वती शिशु मंदिर देपालपुर सांस्कृतिक महोत्सव में विद्यार्थियों की मनमोहक प्रस्तुतियां, अतिथियों की घोषणाएं और शिक्षा-संस्कार का अनुपम संगम।
सरस्वती शिशु मंदिर देपालपुर सांस्कृतिक महोत्सव से शुरुआत
सरस्वती शिशु मंदिर देपालपुर सांस्कृतिक महोत्सव शिक्षा के साथ संस्कारों को जोड़ने वाला ऐसा आयोजन रहा, जिसने नगर देपालपुर में शैक्षणिक और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी। दिनांक 30 दिसंबर 2025, मंगलवार को आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों की प्रतिभा, अनुशासन और आत्मविश्वास का सजीव उदाहरण बना।
यह आयोजन सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देपालपुर के प्रांगण में संपन्न हुआ, जहां शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम का उद्देश्य
सरस्वती शिशु मंदिर देपालपुर सांस्कृतिक महोत्सव का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को मंच प्रदान करना था—
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आत्मविश्वास का विकास
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सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण
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कला, संगीत एवं नाट्य प्रतिभा को निखारना
शुभारंभ: दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। इस पावन क्षण ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर दिया।
अतिथि परिचय समिति के सह-सचिव श्री पीयूष विजयवर्गीय द्वारा कराया गया, जिसके पश्चात भैया-बहनों ने पारंपरिक तरीके से अतिथियों का स्वागत किया।

मुख्य अतिथियों एवं गणमान्यजनों की उपस्थिति
इस गरिमामयी आयोजन में अनेक प्रतिष्ठित अतिथि उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
- सूरज बोड़ाना (पूर्व डिप्टी रेंजर)
- डॉ. कुणाल अग्रवाल एवं श्रीमती डॉ. चिन्मय अग्रवाल (इंदौर अस्पताल संचालक)
- शैक्षणिक विकास समिति अध्यक्ष कैलाश ददरवाल
- उपाध्यक्ष महेश नागर, सचिव अखिलेश रावल
- कोषाध्यक्ष पंकज जैन, सहित समिति सदस्य, अभिभावकगण एवं आचार्य परिवार उपस्थित रहा।

विद्यार्थियों की मनमोहक प्रस्तुतियां
सरस्वती शिशु मंदिर देपालपुर सांस्कृतिक महोत्सव का सबसे आकर्षक पक्ष रहा विद्यार्थियों द्वारा दी गई रंगारंग प्रस्तुतियां।
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देशभक्ति नृत्य
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सांस्कृतिक समूह गीत
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नाट्य प्रस्तुतियां
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शास्त्रीय एवं लोक नृत्य
इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और हर प्रस्तुति पर तालियों की गूंज सुनाई दी।
प्रोत्साहन और पुरस्कार घोषणाएं
मुख्य अतिथि सूरज बोड़ाना द्वारा—
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विद्यालय को ₹1,00,000 नगद सहयोग
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कक्षा 12वीं प्रथम स्थान: ₹12,000
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कक्षा 10वीं प्रथम स्थान: ₹10,000
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कक्षा 8वीं प्रथम स्थान: ₹8,000
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कक्षा 5वीं प्रथम स्थान: ₹5,000
वहीं डॉ. कुणाल अग्रवाल द्वारा विद्यालय विकास हेतु ₹51,000 की घोषणा की गई।
शिक्षा और संस्कार पर अतिथियों के विचार
अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि—
“संस्कारयुक्त शिक्षा ही राष्ट्र निर्माण की नींव होती है।”
सरस्वती शिशु मंदिर देपालपुर सांस्कृतिक महोत्सव जैसे आयोजन बच्चों को केवल मंच नहीं देते, बल्कि उन्हें जीवन मूल्य भी सिखाते हैं।
कार्यक्रम संचालन
पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन श्री बसंत यादव द्वारा किया गया। उनकी वाणी, संतुलन और मंच संचालन ने कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा।
अभिभावकों की सहभागिता
अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन और आचार्य परिवार की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विद्यालय परिवार की भूमिका
आचार्यगण, समिति सदस्य और स्वयंसेवकों के सहयोग से सरस्वती शिशु मंदिर देपालपुर सांस्कृतिक महोत्सव पूर्ण अनुशासन और गरिमा के साथ संपन्न हुआ।
निष्कर्ष
सरस्वती शिशु मंदिर देपालपुर सांस्कृतिक महोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और समाज के बीच सेतु बना। यह आयोजन भविष्य में भी प्रेरणा देता रहेगा।


