आध्यात्म और एकता पर केंद्रित प्रेरक विचार—ब्रह्माकुमारी मनोरमा दीदी ने ध्यान को बताया जीवन की स्थिरता और आपसी विश्वास का सबसे बड़ा आधार।
आध्यात्म और एकता: विश्वास के सूत्र को जोड़ने का संदेश
आध्यात्म और एकता—आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। जब समाज भीतर से बिखर रहा हो, रिश्तों में अविश्वास बढ़ रहा हो और व्यक्ति अकेलापन महसूस कर रहा हो, तब आध्यात्म ही वह सेतु बनता है जो इंसान को इंसान से जोड़ता है।
इसी भावना को केंद्र में रखते हुए इंदौर स्थित ज्ञानशिखर ओमशांति भवन में एक विशेष आयोजन संपन्न हुआ।
पुण्यतिथि पर श्रद्धा और संकल्प
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ज्ञानशिखर ओमशांति भवन में इंदौर जोन के संस्थापक एवं क्षेत्रीय निदेशक रहे ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश भाईजी की दसवीं पुण्यतिथि श्रद्धा, स्मृति और संकल्प के साथ मनाई गई।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथियों, प्रशासनिक अधिकारियों, समाजसेवियों और ब्रह्माकुमारी परिवार के सदस्यों ने सहभागिता की।
ब्रह्माकुमारी मनोरमा दीदी का संदेश
प्रयागराज से पधारी ब्रह्माकुमारी मनोरमा दीदी ने “आपसी एकता एवं विश्वास के लिए ध्यान” विषय पर बोलते हुए कहा—
“ध्यान से वह शक्ति मिलती है, जो हमें जीवन में फिसलने नहीं देती।”
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति सर्वे भवंतु सुखिनः की रही है, जहां परस्पर विश्वास, संवाद और अपनत्व जीवन का आधार था। लेकिन आज बाहरी चमक बढ़ी है और भीतर अंधकार गहराता जा रहा है।

ध्यान: आत्मबल का आधार
आध्यात्म और एकता का मूल आधार स्वयं को जानना है। जब व्यक्ति स्वयं को समझता है, तब वह दूसरों को भी समझ पाता है। ध्यान हमें यही सिखाता है—
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स्वयं से जुड़ना
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नकारात्मकता से ऊपर उठना
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संबंधों में स्थिरता लाना
समाज में बढ़ता विभाजन: एक गंभीर संकेत
मनोरमा दीदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज समाज अनेकता की ओर बढ़ रहा है। स्वार्थ, अविश्वास और घृणा ने प्रेम और भाईचारे की जगह ले ली है।
इस स्थिति से बाहर निकलने का एकमात्र मार्ग है—
आध्यात्मिक जागरूकता और राजयोग ध्यान
प्रशासन का दृष्टिकोण
दिलीप यादव, इंदौर नगर निगम आयुक्त ने कहा कि—
“अगर हम रोज थोड़े समय का निवेश स्वयं के लिए करें, तो ध्यान हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।”
एकता का सूत्र: आध्यात्मिक ज्ञान
इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान ही वह शक्ति है जो—
- स्नेह
- सद्भाव
- विश्वास
- बंधुत्व
को फिर से जीवित कर सकती है।

मीडिया और मूल्य
क्रांति चतुर्वेदी, नवभारत ग्रुप के समूह संपादक ने कहा कि—
“समाज को मूल्यनिष्ठ बनाना है तो मूल्य आधारित मीडिया जरूरी है।”
उन्होंने ओमप्रकाश भाईजी को एक साधारण लेकिन असाधारण व्यक्तित्व बताया।
श्रद्धांजलि और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
कार्यक्रम में—
- भावपूर्ण गीत
- नृत्य नाटिका
- दीप प्रज्वलन
के माध्यम से आध्यात्म और एकता के संदेश को जीवंत किया गया।
निष्कर्ष: एकता की ओर वापसी
आज जब दुनिया बिखराव की ओर बढ़ रही है, तब आध्यात्म और एकता ही वह मार्ग है जो मानवता को बचा सकता है। ध्यान केवल साधना नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।