आर्यिका पूर्णमति माता राष्ट्रपति भवन में मंगल प्रवेश के साथ जैन श्रमण संस्कृति का गौरव बढ़ा। राष्ट्रपति से आध्यात्मिक व राष्ट्रहित पर सार्थक संवाद।
राजेश जैन दद्दू
इंदौर
भूमिका: ऐतिहासिक आध्यात्मिक क्षण
आर्यिका पूर्णमति माता राष्ट्रपति भवन—ये शब्द आज केवल एक समाचार नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, उसकी सनातन जैन श्रमण परंपरा और राष्ट्र के सर्वोच्च संवैधानिक मंच के आध्यात्मिक संगम का प्रतीक बन गए हैं।
भारत की राजधानी नई दिल्ली में स्थित Rashtrapati Bhavan में आर्यिका पूर्णमति माता का मंगल प्रवेश जैन समाज ही नहीं, बल्कि समूचे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय रहा।
आर्यिका पूर्णमति माता राष्ट्रपति भवन में मंगल प्रवेश
श्रमण संस्कृति के महामहिम समाधिष्ठ आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं नवाचार आचार्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज की सुयोग्य शिष्या, भारत गौरव आर्यिका पूर्णमति माता जी ने अपने संघ सहित राष्ट्रपति भवन में मंगल प्रवेश किया।
उनके चरणों की पद-रज से राष्ट्रपति भवन आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा।
आर्यिका पूर्णमति माता :श्रमण संस्कृति और जैन परंपरा की गरिमा
जैन श्रमण परंपरा त्याग, तप, करुणा और अहिंसा का जीवंत दर्शन है। आर्यिका पूर्णमति माता उसी परंपरा की सशक्त प्रतिनिधि हैं।
उनका राष्ट्रपति भवन आगमन यह संदेश देता है कि भारत का संविधान और भारत की आत्मा—दोनों अध्यात्म से जुड़े हैं।
आर्यिका पूर्णमति माता :राष्ट्रपति से आध्यात्मिक एवं राष्ट्रहित संवाद
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आर्यिका पूर्णमति माता की भेंट केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि यह देशहित, नैतिकता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और अहिंसा जैसे विषयों पर गंभीर आध्यात्मिक विमर्श था।
यह संवाद इस बात का प्रमाण है कि भारत में नीति और नैतिकता एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।
आर्यिका पूर्णमति माता :दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष की भव्य अगवानी
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता द्वारा राष्ट्रपति भवन में आर्यिका पूर्णमति माता की भव्य अगवानी की गई।
यह सम्मान केवल एक संत के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण जैन समाज और श्रमण संस्कृति के लिए था।
‘नमोस्तु शासन जयवंत हो’ से गूंजा राष्ट्रपति भवन
जब राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में “आचार्य श्री का जयघोष” और “नमोस्तु शासन जयवंत हो” का निनाद हुआ—तो यह दृश्य इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।
जैन समाज और राष्ट्र के लिए संदेश
आर्यिका पूर्णमति माता का संदेश स्पष्ट है:
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अध्यात्म केवल मंदिरों तक सीमित नहीं
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राष्ट्र निर्माण में नैतिकता अनिवार्य
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अहिंसा ही स्थायी विकास का मार्ग
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संयम से ही सशक्त भारत का निर्माण
सोशल मीडिया और जनमानस में प्रभाव
यह समाचार सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।
जैन समाज, साधु-संत, बुद्धिजीवी और युवा वर्ग इसे “Spiritual Power Moment of India” बता रहे हैं।
निष्कर्ष: अध्यात्म और राष्ट्र का संगम
आर्यिका पूर्णमति माता राष्ट्रपति भवन में मंगल प्रवेश केवल एक समाचार नहीं, बल्कि यह संदेश है कि भारत की आत्मा आज भी अध्यात्म से संचालित है।
जब संत और संविधान एक मंच पर मिलते हैं—तब राष्ट्र सशक्त होता है।
