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India– New Zealand FTA: अमेरिकी टैरिफ के बीच भारत की रणनीतिक जीत

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Published On: 23 December 2025
India New Zealand FTA

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India–New Zealand FTA: अमेरिकी टैरिफ के बीच भारत की रणनीतिक जीत

साल 2025 भारत के लिए वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर कई चुनौतियाँ लेकर आया, लेकिन भारत ने इन चुनौतियों को अवसर में बदलने का साहसिक कदम उठाया। अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ के बीच भारत ने अपनी व्यापार नीति को और अधिक आक्रामक और विविधतापूर्ण बनाया। इसी रणनीति का नतीजा है भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच हुआ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA), जिसे 22 दिसंबर 2025 को अंतिम रूप दिया गया।

यह समझौता न केवल भारत के लिए नए बाजारों के द्वार खोलेगा, बल्कि यह भी दिखाता है कि वैश्विक दबावों के बावजूद भारत अपनी शर्तों पर व्यापारिक फैसले लेने में सक्षम है। भारत सरकार इसे वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और निर्यात को नई दिशा देने वाला अहम कदम मान रही है।

अमेरिका के टैरिफ और भारत पर बढ़ता दबाव

साल की शुरुआत में अमेरिका ने कई देशों को टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी और बाद में भारत सहित कुछ देशों पर मनमाने टैरिफ लागू कर दिए। भारत पर कुल मिलाकर लगभग 50% तक टैरिफ लगाया गया, जिसमें रूसी तेल खरीदने के आधार पर 25% अतिरिक्त पेनाल्टी भी शामिल रही। इस फैसले का सीधा असर भारत के स्टील, एल्यूमिनियम, टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, ऑटो पार्ट्स और कुछ इंजीनियरिंग उत्पादों पर पड़ा।

हालांकि पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका के रिश्ते मजबूत हुए हैं, लेकिन इस टैरिफ नीति को भारत पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस दबाव के जरिए अपने कुछ उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलवाना चाहता है, जबकि भारत अपने घरेलू उद्योगों के हितों से समझौता करने के मूड में नहीं है। इसी कारण भारत ने अमेरिकी टैरिफ का कूटनीतिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया और साथ ही वैकल्पिक बाजारों की तलाश तेज कर दी।

Bharat – New Zealand FTA: 9 महीनों में पूरी हुई अहम डील

अमेरिका के साथ बढ़ते कारोबारी तनाव के बीच भारत ने न्यूज़ीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते को तेजी से आगे बढ़ाया। इस FTA पर बातचीत मार्च 2025 में शुरू हुई थी, जब न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री भारत के दौरे पर आए थे। केवल 9 महीनों में इस समझौते को अंतिम रूप देना भारत की सक्रिय और निर्णायक व्यापार नीति को दर्शाता है।

इस समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड के लगभग 95% निर्यात उत्पादों पर भारत में आयात शुल्क या तो पूरी तरह खत्म कर दिए जाएंगे या काफी हद तक कम कर दिए जाएंगे। खास बात यह है कि FTA लागू होते ही अधिकांश उत्पाद पहले दिन से ही ड्यूटी-फ्री हो जाएंगे। दोनों देशों की सरकारें इस समझौते को 2026 की शुरुआत में औपचारिक रूप से साइन करने की योजना बना रही हैं।

निवेश, व्यापार और सेवाओं को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

Bharat– New Zealand FTA सिर्फ व्यापारिक लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निवेश और सेवाओं के क्षेत्र में भी बड़े अवसर पैदा करेगा। न्यूज़ीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की प्रतिबद्धता जताई है। इससे भारत में कृषि प्रसंस्करण, फूड इंडस्ट्री, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

 New Zealand के वाणिज्य और उद्योग मंत्री टॉड मैक्ले के अनुसार, इस समझौते से आने वाले दशक में न्यूज़ीलैंड के निर्यात में सालाना 1.1 से 1.3 अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर तक की बढ़ोतरी संभव है। इससे वहां के घरेलू उत्पादकों, खासकर कृषि और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बड़ा फायदा होगा।

दोनों देशों को क्या-क्या मिलेगा फायदा
  • न्यूज़ीलैंड के लिए अवसर

न्यूज़ीलैंड के लिए भारत एक विशाल और तेजी से बढ़ता उपभोक्ता बाजार है। भारत की बढ़ती मध्यमवर्गीय आबादी में कृषि उत्पादों, फलों, ऊन, लकड़ी, डेयरी और ड्राई फ्रूट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। FTA लागू होने के बाद न्यूज़ीलैंड के इन उत्पादों को भारत में बेहतर कीमत और आसान बाजार पहुंच मिलेगी।

  • भारत के लिए लाभ

भारत इस समझौते के जरिए अपने फार्मास्यूटिकल्स, मेडिसिन, टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, मशीनरी, ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग उत्पादों को न्यूज़ीलैंड के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर बेच सकेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी टैरिफ से हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई करने में मदद मिलेगी।

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कीवी फल: समझौते का बड़ा उदाहरण

न्यूज़ीलैंड कीवी फल का प्रमुख उत्पादक देश है, लेकिन भारत में कुल कीवी आयात में उसकी हिस्सेदारी फिलहाल केवल करीब 5% है। साल 2023 में भारत ने लगभग 55,000 टन कीवी आयात किया था, जिसमें से केवल 2,700 टन कीवी न्यूज़ीलैंड से आया था। भारत में कीवी का सबसे बड़ा सप्लायर चिली है, जबकि ग्रीस, इटली, ईरान और अफगानिस्तान भी प्रमुख सप्लायर हैं।

FTA लागू होने के बाद न्यूज़ीलैंड के कीवी निर्यातकों के लिए भारत एक बड़ा अवसर बन सकता है। इससे न केवल न्यूज़ीलैंड की कृषि और खाद्य उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं को भी बेहतर कीमतों पर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध होंगे।

भारत–न्यूज़ीलैंड व्यापार का मौजूदा स्वरूप

साल 2024 में भारत का न्यूज़ीलैंड से आयात करीब 507 मिलियन डॉलर रहा, जबकि भारत ने न्यूज़ीलैंड को लगभग 617 मिलियन डॉलर का निर्यात किया। भारत न्यूज़ीलैंड से लकड़ी, ऊन, फल, खनिज ईंधन, एल्यूमिनियम और औद्योगिक सामान आयात करता है। वहीं न्यूज़ीलैंड भारत से फार्मा प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल, मशीनरी, ऑटो पार्ट्स, खनिज तेल उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदता है।

2025 में भारत का कारोबारी ‘चौका’

न्यूज़ीलैंड के अलावा भारत ने 2025 में ब्रिटेन और ओमान के साथ नए FTA/CEPA किए हैं, जबकि EFTA समूह (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन) के साथ समझौता लागू हो चुका है। इसके साथ ही भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच FTA पर बातचीत अंतिम चरण में है। भारत-चिली और भारत-कतर के साथ भी व्यापार समझौतों पर मंथन जारी है।

आगे की राह: दबाव नहीं, रणनीति से आगे बढ़ता भारत

अमेरिकी टैरिफ से पैदा हुई चुनौती को भारत ने अवसर में बदलने का काम किया है। न्यूज़ीलैंड के साथ हुआ यह FTA दिखाता है कि भारत अब वैश्विक व्यापार में केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर रणनीति तय करने वाला मजबूत खिलाड़ी बन चुका है। आने वाले वर्षों में ऐसे समझौते भारत की अर्थव्यवस्था, निर्यात और वैश्विक प्रभाव को और मजबूत करेंगे।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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