जैन गणितीय पांडुलिपियों की प्रदर्शनी भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और पुनर्पाठ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जैन दर्शन में गणित, ज्योतिष और तर्कशास्त्र का जो समृद्ध योगदान रहा है, उसे आमजन और शोधकर्ताओं तक पहुँचाने का यह एक सार्थक प्रयास है।
जैन गणितीय पांडुलिपियों की प्रदर्शनी का शुभारंभ
जैन गणितीय पांडुलिपियों की प्रदर्शनी का शुभारंभ 12 दिसंबर से 23 दिसंबर तक देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV), इंदौर के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा जैन गणित केंद्र में किया गया। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन जैन अध्ययन केंद्र, लंदन के प्रख्यात विद्वान प्रोफेसर पीटर फ्लूगेल द्वारा किया गया।
यह प्रदर्शनी जैन गणित की उस समृद्ध परंपरा को सामने लाती है, जिसने प्राचीन भारत में संख्याओं, मापन पद्धतियों, अनंत की अवधारणा और ज्यामिति को नई दिशा दी।
प्रोफेसर पीटर फ्लूगेल का उद्बोधन
प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए प्रोफेसर पीटर फ्लूगेल ने जैन गणितीय पांडुलिपियों की प्रदर्शनी को “वैश्विक शोध के लिए अत्यंत मूल्यवान” बताया। उन्होंने कहा कि—
- इन पांडुलिपियों का वैज्ञानिक प्रकाशन समय की आवश्यकता है
- प्राथमिक स्रोतों पर आधारित शोध को बढ़ावा दिया जाना चाहिए
- जैन गणित अंतरराष्ट्रीय अकादमिक विमर्श का हिस्सा बन सकता है
उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप और पश्चिमी देशों में जैन गणित पर शोध की व्यापक संभावनाएँ हैं।
जैन गणित केंद्र डीएवीवी का योगदान
DAVV का जैन गणित केंद्र भारतीय ज्ञान परंपरा को अकादमिक मंच प्रदान कर रहा है। केंद्र के प्रमुख डॉ. अनुपम जैन ने बताया कि—
- प्रदर्शनी में दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियाँ शामिल हैं
- सामग्री संस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश में है
- गणितीय सूत्रों के साथ दार्शनिक दृष्टि भी समाहित है
जैन गणितीय पांडुलिपियों की प्रदर्शनी शोध और संरक्षण—दोनों दृष्टियों से मील का पत्थर है।
पांडुलिपियों का ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व
जैन गणित की विशेषताएँ
- अनंत (Infinity) की गहन अवधारणा
- बड़ी संख्याओं का वर्गीकरण
- ज्यामितीय रचनाएँ
- कालगणना और ब्रह्मांडीय संरचना
जैन गणितीय पांडुलिपियों की प्रदर्शनी यह प्रमाणित करती है कि जैन आचार्यों ने आधुनिक गणित से सदियों पहले जटिल अवधारणाओं को विकसित किया था।
शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए अवसर
यह प्रदर्शनी शोधार्थियों, पीएचडी छात्रों और इतिहासकारों के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला है। यहां—
- मूल पांडुलिपियों का अध्ययन
- तुलनात्मक शोध
- अंतरविषयक अध्ययन (गणित + दर्शन)
जैसे अवसर उपलब्ध हैं।
आयोजन में उपस्थित प्रमुख विद्वान
प्रदर्शनी के अवसर पर अनेक विद्वान एवं जिज्ञासु उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख हैं—
- डॉ. अनुपम जैन (प्रमुख, जैन गणित केंद्र)
- प्रो. संजीव टोकेकर (विभागाध्यक्ष)
- डॉ. वीणा जैन
- शोधार्थी, विद्यार्थी एवं समाजजन
सभी ने जैन गणितीय पांडुलिपियों की प्रदर्शनी की सराहना की।
भारतीय ज्ञान परंपरा और जैन गणित
वैश्विक संदर्भ में जैन गणित
भारतीय ज्ञान परंपरा का जैन गणित एक सशक्त स्तंभ है। यह प्रदर्शनी—
- भारत की बौद्धिक विरासत को वैश्विक मंच देती है
- नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ती है
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निष्कर्ष
जैन गणितीय पांडुलिपियों की प्रदर्शनी न केवल एक अकादमिक आयोजन है, बल्कि यह भारतीय सभ्यता की वैज्ञानिक चेतना का उत्सव भी है। डीएवीवी इंदौर का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी धरोहर सिद्ध होगा।
विज्ञप्ति प्रेषक
राजेश जैन दद्दू
धर्म समाज प्रचारक
