Asaram Bail Update: सुप्रीम कोर्ट से आसाराम को बड़ी राहत, 6 महीने की अंतरिम जमानत बरकरार – हाईकोर्ट को 3 महीने में सुनवाई निपटाने का निर्देश
नाबालिग से रेप के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू संत आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दी गई 6 महीने की अंतरिम जमानत को बरकरार रखते हुए जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। इससे पहले हाईकोर्ट ने उपचार संबंधी कारणों को देखते हुए आसाराम को अस्थायी राहत दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को आसाराम के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वह लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देकर मानवता के आधार पर जमानत की मांग कर रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं किया हस्तक्षेप?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत आदेश में हस्तक्षेप नहीं करेगा। अदालत ने Rajasthan High Court को निर्देश दिया कि वह इस मामले की सुनवाई को तेज गति से आगे बढ़ाए और अधिकतम तीन महीने के भीतर इसका अंतिम निपटारा करे।
शीर्ष अदालत के अनुसार, चूंकि हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य कारणों को ध्यान में रखते हुए अपना आदेश दिया था, इसलिए फिलहाल उसे बदलने की आवश्यकता नहीं है।
आसाराम के वकील ने कोर्ट में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से उनके वकील ने बेहद गंभीर दलीलें पेश कीं। उन्होंने बताया कि:
- आसाराम की शारीरिक स्थिति अत्यंत नाजुक है।
- वे लगभग लाचार अवस्था में हैं।
- दैनिक गतिविधियों जैसे—शौच, मूत्र विसर्जन, उठना-बैठना—सभी में उन्हें अन्य व्यक्तियों की मदद की आवश्यकता होती है।
- उनका शरीर अब ‘वेजिटेटिव स्टेट’ जैसी स्थिति में पहुंच चुका है, अर्थात वे लगभग अचेत अवस्था में हैं।
वकील ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य की गंभीरता को देखते हुए जमानत मानवीय आधार पर दी जानी चाहिए थी, जो कि हाईकोर्ट ने सही तरीके से की है।
पीड़ित पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध किया
जहां एक ओर आसाराम की ओर से स्वास्थ्य के आधार पर राहत की मांग की गई, वहीं पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में इस जमानत का जोरदार विरोध किया।
पीड़ित की वकील शोभा गुप्ता ने अदालत से कहा कि—
- आसाराम की हालत उतनी गंभीर नहीं है, जितनी कोर्ट को बताई जा रही है।
- उनके नाम पर की गई चिकित्सा जमानत का दुरुपयोग हो रहा है।
- जमानत रद्द की जानी चाहिए और उन्हें वापस जेल भेजा जाना चाहिए।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों पर विस्तार से चर्चा न करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और कहा कि हाईकोर्ट ही इस पर अंतिम निर्णय ले।
पहले भी मिल चुकी है जमानत – राजस्थान और गुजरात हाईकोर्ट का रुख
29 अक्टूबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम को इलाज के लिए 6 महीने की अंतरिम जमानत दी थी।
इसके तुरंत बाद, 6 नवंबर को गुजरात हाईकोर्ट ने भी उन्हें हृदय संबंधी बीमारी के आधार पर 6 महीने के लिए अंतरिम जमानत प्रदान की थी।
गुजरात कोर्ट में बताया गया कि:
- आसाराम की हार्ट कंडीशन गंभीर है।
- जोधपुर कोर्ट यानी राजस्थान हाईकोर्ट से उन्हें पहले ही राहत मिल चुकी है।
दोनों अदालतों ने चिकित्सा दस्तावेजों और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर राहत दी।
12 साल बाद पहली बड़ी राहत — जमानत का इतिहास
आसाराम वर्ष 2013 से जेल में बंद हैं और आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।
करीब 12 साल जेल में रहने के बाद, 7 जनवरी 2025 को उन्हें पहली बार चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत मिली थी।
इसके बाद:
- जुलाई 2025 में जमानत अवधि बढ़ाई गई
- अगस्त 2025 में भी राहत जारी रही
लेकिन 27 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी थी।
इसके बाद 30 अगस्त को उन्हें सरेंडर करना पड़ा।
अब सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश के बाद आसाराम को एक बार फिर राहत मिली है।
आसाराम केस: क्या है मामला? (संक्षेप में)
- आसाराम पर एक नाबालिग लड़की से यौन शोषण का गंभीर आरोप था।
- जोधपुर कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
- कई बार जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।
- स्वास्थ्य आधार पर मिली जमानतों पर लगातार विवाद होता रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने दो महत्वपूर्ण बातें कही:
1. जमानत रद्द करने की मांग में कोई तत्काल हस्तक्षेप नहीं
चूंकि हाईकोर्ट ने चिकित्सा अहवालों के आधार पर निर्णय लिया है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट उसमें बदलाव नहीं करेगी।
2. हाईकोर्ट को 3 महीने में सुनवाई पूरी करने का आदेश
यह सुनिश्चित करेगा कि मामला लंबा न खिंचे और सभी पक्षों को न्याय मिले।
क्या आगे हो सकता है?
कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि:
- हाईकोर्ट स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट की दोबारा समीक्षा कर सकता है।
- पीड़ित पक्ष जमानत रद्द करने के लिए नए आधार पेश कर सकता है।
- यदि स्वास्थ्य सुधार दिखता है, तो जमानत कम की जा सकती है।
- यदि हालत गंभीर साबित होती है, तो जमानत बढ़ भी सकती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
Asaram Bail Update से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बेहद अहम है।
एक ओर पीड़ित पक्ष राहत पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर अदालत ने स्वास्थ्य कारणों को प्राथमिकता दी है।
फिलहाल:
- 6 महीने की अंतरिम जमानत बरकरार है
- हाईकोर्ट को 3 महीनों में निर्णय देने का आदेश मिला है
- आसाराम को फिर से एक बड़ी कानूनी राहत प्राप्त हुई है
आने वाले महीनों में इस केस की दिशा हाईकोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी।
