75 वर्षीय गोपाल अरोड़ा का मरणोपरांत नेत्रदान—नागदा में मानवता को रोशन करने वाला 875वां पुनीत कार्य
नागदा (निप्र)।
मानवता, सेवा और संवेदना की वह रोशनी, जो किसी के जीवन के बाद भी किसी और की दुनिया को उजाला दे जाए—ऐसा प्रेरक कार्य आज नागदा में देखने को मिला। नगर के प्रतिष्ठित अरोड़ा परिवार के मुखिया स्वर्गीय कृष्ण गोपाल जी अरोड़ा (ऊँची पेढ़ी वाले) का देवलोकगमन 6 दिसम्बर को हो गया था। दुःख और शोक के इस कठिन क्षण में भी परिवार ने जनसेवा की अमूल्य मिसाल पेश करते हुए उनका मरणोपरांत नेत्रदान कराकर समाज को प्रेरित किया।
यह नेत्रदान केवल एक धार्मिक या सामाजिक कर्तव्य नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए नई उम्मीद है, जिनकी आंखों को रोशनी की आवश्यकता है। स्व. गोपाल अरोड़ा के द्वारा किया गया यह नेत्रदान गीता भवन न्यास समिति बड़नगर का 875वां तथा जैन सोशल ग्रुप नागदा के सहयोग से नगर में हुआ 47वां सफल नेत्रदान रहा।
अरोड़ा परिवार ने दुःख की घड़ी में किया प्रेरक निर्णय
स्व. कृष्ण गोपाल जी अरोड़ा, नागदा के सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हुए हमेशा मानवता और सेवा के मार्ग पर चलते थे। उनके देहावसान के बाद परिजनों ने दुख की इस घड़ी में भी समाज के प्रति उनकी सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए नेत्रदान कराने का निर्णय लिया।
यह महत्वपूर्ण निर्णय जैन सोशल ग्रुप नागदा के नेत्रदान प्रभारी ब्रजेश बोहरा, महेन्द्र सिंह (विरू) तथा दिलीप ओरा की प्रेरणा से लिया गया।
दिवंगत के भाई रामचंद्र जी अरोड़ा, लालचंद जी अरोड़ा और गणेश जी अरोड़ा ने तुरंत सहमति प्रदान कर मानवता के इस उज्ज्वल कार्य को साकार किया।
परिवार द्वारा गीता भवन न्यास समिति, बड़नगर को 6200 रुपये नेत्रदान सेवा हेतु दान स्वरूप प्रदान किए गए, जो परिवार की संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकार को दर्शाता है।
नेत्र ऊतक ग्रहण प्रक्रिया—जी.एल. ददरवाल टीम ने संभाला दायित्व
नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया गीता भवन न्यास समिति के नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी.एल. ददरवाल और उनकी टीम के सदस्यों मनीष तलाच तथा परमानंद पवार द्वारा पूरी की गई।
उनकी टीम के सहयोग से यह महत्वपूर्ण नेत्र ऊतक ग्रहण कार्य समयबद्ध रूप से सम्पन्न हुआ, जिससे नेत्र प्रत्यारोपण हेतु जरूरी प्रक्रिया आगे बढ़ सकी। यह कार्य न केवल तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि हर नेत्रदान के साथ टीम समाज में एक नई रोशनी की किरण जगाती है।
जैन सोशल ग्रुप नागदा का सक्रिय सहयोग
नेत्रदान प्रक्रिया के दौरान जैन सोशल ग्रुप नागदा के कई सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें—
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अमित बम
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यशवंत धूपिया
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दीपक गांग
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गिरीश भटेवरा जैन
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अर्पित सिसोदिया
इन सभी ने परिवार को हिम्मत देकर इस प्रेरक कदम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जैन सोशल ग्रुप वर्षों से नेत्रदान जागरूकता और मानव सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देता आ रहा है, जिसके चलते नागदा नगर में नेत्रदान की परंपरा निरंतर बढ़ रही है।
श्रद्धांजलि—गायत्री मंत्र जप के साथ दिवंगत आत्मा को नमन
नेत्रदान प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उपस्थितजनों द्वारा गायत्री मंत्र का जाप किया गया। यह भावपूर्ण क्षण दिवंगत आत्मा की शांति, पुण्य स्मरण और परिवार के संबल का प्रतीक रहा।
सभी ने स्व. गोपाल जी अरोड़ा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी सेवा भावना को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन और नेत्रदान का यह निर्णय सदैव समाज को प्रेरित करता रहेगा।
अंतिम यात्रा की सूचना
स्वर्गीय कृष्ण गोपाल जी अरोड़ा की अंतिम यात्रा दिनांक 7 दिसम्बर, प्रातः 10 बजे
ऑल इज़ वेल, महात्मा गांधी मार्ग से मोक्षधाम के लिए निकलेगी।
नगरवासियों, परिजनों, परिचितों और समाजसेवियों से अंतिम संस्कार में उपस्थित होकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि देने का अनुरोध किया गया है।
नेत्रदान—जीवन के बाद भी जीवन देने की अनमोल सेवा
नागदा नगर में बढ़ते नेत्रदान कार्यों की श्रंखला समाज को यह संदेश देती है कि एक व्यक्ति मृत्यु के बाद भी किसी की आंखों की रोशनी बन सकता है।
स्व. कृष्ण गोपाल जी अरोड़ा का यह 875वां नेत्रदान नगर के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
उनका जीवन सेवा से प्रेरित था और उनका नेत्रदान समाज में उम्मीद, संवेदना और इंसानियत का उजाला फैलाता रहेगा।



