92 वर्षीय सोहन देवी कोठारी का मरणोपरांत नेत्रदान: नागदा में मानवता को रोशन करने वाला 874वां पुनीत कार्य
नागदा (निप्र)।
मानवता, संवेदनशीलता और सेवा की अद्भुत मिसाल तब देखने को मिली जब नगर की प्रतिष्ठित नागरिक 92 वर्षीय स्वर्गीय श्रीमती सोहन देवी कोठारी ने दुनिया से विदा लेने के बाद भी अपनी दृष्टि किसी और की जिंदगी में उजाला भरने के लिए दान कर दी। यह नेत्रदान नागदा नगर का 874वां सफल नेत्रदान बनकर मानव सेवा की परंपरा को और भी ऊँचा कर गया।
स्व. सोहन देवी कोठारी, स्वर्गीय हस्तीमलजी कोठारी की धर्मपत्नी थीं और प्रकाशचंद, नरेंद्र, अरविंद एवं संजय की माताजी तथा विकास, नितिन और हृदय की दादीजी थीं। उन्होंने जीवन भर परिवार और समाज की सेवा की तथा देवलोक गमन के उपरांत भी अपनी अंतिम इच्छा के रूप में नेत्रदान कर मानवता को रोशन किया।
नेत्रदान टीम की त्वरित कार्रवाई—874वां नेत्रदान सफलतापूर्वक संपन्न
कोठारी परिवार की प्रेरक सहमति के बाद गीता भवन न्यास समिति के नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी.एल. ददरवाल एवं उनकी टीम के सदस्यों मनीष तलाच और परमानंद पवार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नेत्र निकासी (Eye Retrieval) की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी की।
स्व. सोहन देवी कोठारी का यह नेत्रदान नगर के इतिहास में 874वें नेत्रदान के रूप में दर्ज हुआ।
जैन सोशल ग्रुप नागदा की प्रेरणा—कोठारी परिवार का सराहनीय निर्णय
जैन सोशल ग्रुप नागदा के नेत्रदान प्रभारी ब्रजेश बोहरा की प्रेरणा पर परिवार ने मानवीय सेवा की दिशा में तुरंत सहमति प्रदान की। यह नगर का 46वां नेत्रदान है जो जैन सोशल ग्रुप की प्रेरणा से सम्पन्न हुआ है।
पूर्व पार्षद नरेंद्र कोठारी, जो स्वयं समाजसेवा और जनहित कार्यों में सक्रिय रहते हैं, ने नेत्रदान हेतु परिवार की सहमति सुनिश्चित की। उनके इस निर्णय ने दिवंगत सोहन देवी कोठारी के व्यक्तित्व को और भी गरिमामय बना दिया।
नेत्रदान प्रक्रिया में समाजजन की उपस्थिति
नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया के दौरान
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सीए कमलनयन,
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बसन्तीलाल कोठारी,
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शैलेन्द्र जैन,
तथा कोठारी परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
उनकी इस उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि नेत्रदान केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवीय करुणा, सेवा और प्रेरणा का अद्भुत संगम है।
नवकार मंत्र का जाप—दिवंगत आत्मा की शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना
गीता भवन न्यास समिति एवं जैन सोशल ग्रुप नागदा के सदस्यों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए सामूहिक रूप से तीन बार नवकार मंत्र का जाप कर प्रार्थना की।
इस दौरान माहौल भावनात्मक और श्रद्धा से भरा हुआ था, जहाँ सभी ने स्वर्गीय सोहन देवी के प्रेरक जीवन और उनके परोपकारी निर्णय को नमन किया।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसमूह—आँखों में श्रद्धा, मन में सम्मान
महिदपुर रोड, नागदा स्थित निवास से स्व. सोहन देवी कोठारी की अंतिम यात्रा निकाली गई।
परिजन, समाजजन, परिचित और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
शव वाहन के साथ चल रहे लोगों की भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि उन्होंने अपने जीवन में सभी के हृदयों में सम्मान, स्नेह और विश्वास की अमिट छाप छोड़ी।
नेत्रदान—जीवन के बाद भी जीवन देने वाला पुण्य कार्य
नेत्रदान के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद भी किसी अन्य की जिंदगी में रौशनी भर सकता है।
स्व. सोहन देवी कोठारी का यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी है।
नागदा नगर में बढ़ता नेत्रदान जागरूकता अभियान आज समाज के लिए नई दिशा तय कर रहा है, जहाँ हर आयु वर्ग के लोग इस पवित्र कार्य की महत्ता को समझते हुए आगे आ रहे हैं।
मानवता को रोशन करने वाला अद्वितीय उदाहरण
कोठारी परिवार द्वारा लिया गया यह महत्वपूर्ण निर्णय न केवल उनकी दिवंगत माताजी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है, बल्कि मानवता के चरम आदर्शों को प्रतिबिंबित करता है।
स्व. सोहन देवी कोठारी ने जीवन के अंतिम पड़ाव में भी समाज को यह सीख दी कि—
“मानव जीवन का सर्वोच्च धर्म सेवा है, और नेत्रदान सबसे महान सेवा।”
संवाददाता: जीवनलाल जैन, नागदा
(Mobile: 9179662633)



