इंदौर: बीडीडीएस के तीन पुलिस जवानों पर कार्रवाई—बिना हेलमेट और हाथ में शराब की बोतल लेकर रील बनाने का वीडियो हुआ वायरल, डीसीपी ने जारी किया शो-कॉज नोटिस
इंदौर।
मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में पुलिस अनुशासन और जिम्मेदारी पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बीडीडीएस (BDDS) में पदस्थ तीन आरक्षक बिना हेलमेट बाइक पर बैठे हुए हाथों में शराब की बोतल लेकर रील बनाते नजर आ रहे हैं। वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस विभाग एक्शन मोड में आ गया है और तीनों पुलिसकर्मियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है।
यह वीडियो इंदौर की डीआरपी लाइन का बताया जा रहा है, जहां पुलिसकर्मियों द्वारा रील बनाना न सिर्फ विभागीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पुलिस की साख को भी नुकसान पहुंचाने वाला कदम माना जा रहा है।
वायरल वीडियो में क्या दिखा?
वायरल वीडियो में बीडीडीएस के तीन पुलिसकर्मी—
- जयवीर सिकरवार
- उत्तम
- कुलदीप
एक बाइक पर बैठे दिखाई देते हैं। तीनों ने न तो हेलमेट पहना है और न ही पुलिस अनुशासन का पालन किया गया है। वीडियो में एक पुलिसकर्मी हाथ में शराब की बोतल पकड़े हुए नजर आता है और हंसते-मुस्कुराते रील बनाते दिखाई देते हैं। वीडियो में जयवीर सिकरवार पैदल डीआरपी लाइन के अंदर जाते हैं, जहां उनके साथी उन्हें रोककर शराब की बोतल दिखाते हैं और साथ चलने के लिए इशारा करते हैं।
यह पूरा वीडियो एक इंस्टाग्राम रील जैसा शूट किया गया है, जिसके बैकग्राउंड में संगीत भी जोड़ा गया है।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल—पुलिस की छवि पर असर
यह वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड होते ही तेज़ी से वायरल हो गया। खास बात यह है कि जयवीर सिकरवार के इंस्टाग्राम पर 4 लाख 46 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं, और उनकी रीलें अक्सर वायरल होती रहती हैं। लेकिन सोशल मीडिया की लोकप्रियता के चलते कुछ पुलिसकर्मी विभागीय मर्यादाओं को भूलते दिखाई देते हैं।
वीडियो वायरल होने पर आम लोगों ने सवाल उठाए कि—
- जहां पुलिस ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्ती करती है, वहीं खुद पुलिसकर्मी हेलमेट के बिना बाइक क्यों चला रहे हैं?
- पुलिस परिसर में शराब की बोतल के साथ वीडियो बनाना कैसे स्वीकार्य है?
- क्या अनुशासनहीनता पर कड़ी कार्रवाई होगी?
जनता की इन प्रतिक्रियाओं ने मामले को और संवेदनशील बना दिया।
पुलिस नियमों का सीधा उल्लंघन
पुलिस परिसर में रील बनाना, हथियार, शराब या अन्य संवेदनशील वस्तुओं को सार्वजनिक रूप में दिखाना, और वर्दी की गरिमा का उल्लंघन करना विभागीय अनुशासन के खिलाफ है। जिस वीडियो के चलते विवाद हुआ, उसमें—
बिना हेलमेट बाइक चलाना
शराब की बोतल दिखाना
पुलिस लाइन परिसर में शूटिंग
वर्दी में सोशल मीडिया कंटेंट बनाना
जैसे कई उल्लंघन शामिल हैं।
पुलिस विभाग का एक्शन—तीनों आरक्षकों को जारी हुआ शो-कॉज नोटिस
वीडियो सामने आने के बाद उच्च अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। डीसीपी ने तीनों पुलिसकर्मियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि—
- उन्होंने विभागीय नियमों का उल्लंघन क्यों किया?
- पुलिस परिसर में शराब की बोतल के साथ वीडियो बनाने की अनुमति किसने दी?
- इस व्यवहार से पुलिस विभाग की छवि को हुए नुकसान की भरपाई कैसे होगी?
तीनों आरक्षकों से निर्धारित समय सीमा में जवाब मांगा गया है।
पुलिसकर्मियों ने जारी किया माफीनामा वीडियो
नोटिस जारी होने के बाद तीनों पुलिसकर्मियों ने सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो जारी कर अपने कृत्य के लिए माफी मांगी है। वीडियो में उन्होंने कहा—
- उनका उद्देश्य पुलिस की छवि खराब करना नहीं था
- यह वीडियो मनोरंजन के लिए बनाया गया था
- वे आगे से अनुशासन का पालन करेंगे
हालांकि, कई वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि माफी मांगना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि इस घटना ने पुलिस विभाग पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रोजाना सख्ती दिखाने वाली पुलिस खुद लापरवाही की शिकार
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इंदौर पुलिस आम जनता को—
- हेलमेट न पहनने पर चालान
- शराब पीकर वाहन चलाने पर कार्रवाई
- नियम उल्लंघन पर दंड
जैसे मामलों में सख्ती दिखाती है। ऐसे में जब पुलिसकर्मी खुद नियम तोड़ते पकड़े जाते हैं तो विभाग की साख पर सीधा असर पड़ता है।
कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर नाराजगी जताई और लिखा—
“जो खुद नहीं मानते, वे जनता को कैसे सिखाएंगे?”
BDDS क्या है और क्यों महत्वपूर्ण?
BDDS (Bomb Detection and Disposal Squad) पुलिस की वह विशेष शाखा है जो—
- विस्फोटक की खोज
- बम निष्क्रिय करना
- हाई-प्रोफाइल सुरक्षा कार्यक्रमों में तैनाती
जैसे महत्वपूर्ण कार्य करती है।
ऐसी टीम के सदस्यों से अनुशासन और सतर्कता की उम्मीद अधिक रहती है।
इसलिए यह मामला और भी संवेदनशील माना जा रहा है।
वीडियो घटना ने उठाए पुलिस सोशल मीडिया पॉलिसी पर सवाल
इंदौर पुलिस ने पहले भी कई बार अपने कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि—
- वर्दी में रील न बनाएं
- संवेदनशील स्थानों पर वीडियो शूट न करें
- पुलिस ड्यूटी से जुड़ा कंटेंट पब्लिक प्लेटफॉर्म पर पोस्ट न करें
इसके बावजूद ऐसी घटनाएँ समय-समय पर सामने आ जाती हैं।
निष्कर्ष: विभागीय कार्रवाई के बाद भी प्रश्न अनुत्तरित
हालांकि शो-कॉज नोटिस जारी कर विभाग ने प्राथमिक कार्रवाई कर दी है, लेकिन इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—
- क्या सोशल मीडिया की लोकप्रियता पुलिस अनुशासन से बड़ी हो गई है?
- क्या विभाग कड़ी कार्रवाई करेगा या मामला माफी के साथ ही शांत हो जाएगा?
- क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त नियम बनाए जाएंगे?
फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया और पुलिस महकमे दोनों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
