—Advertisement—

, , ,

जबलपुर EOW केस: कैलाश देवबिल्ड द्वारा फर्जी दस्तावेज़ से 226 करोड़ का टेंडर घोटाला उजागर, MP पावर ट्रांसमिशन स्कैम FIR दर्ज

Author Picture
Published On: 3 December 2025
Untitled 4 copy

—Advertisement—

फर्जी दस्तावेज लगाकर 226 करोड़ रुपये का टेंडर हासिल—कैलाश देवबिल्ड पर EOW ने किया बड़ा मामला दर्ज

जबलपुर | मध्यप्रदेश में एक बड़ा टेंडर घोटाला सामने आया है, जिसमें कैलाश देवबिल्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के संचालकों पर फर्जी परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट लगाकर 226 करोड़ रुपये के तीन बड़े टेंडर हासिल करने का आरोप साबित हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर ने विस्तृत जांच के बाद कंपनी के संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र सहित कई गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। यह मामला मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (MPPTCL) के बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़ा बताया जा रहा है।

शिकायत पर शुरू हुई जाँच, सामने आया बड़ा घोटाला

EOW जबलपुर को शिकायत मिली थी कि हाथीताल, जबलपुर निवासी कैलाश देवबिल्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने MP पावर ट्रांसमिशन कंपनी के उच्च लागत वाले टेंडर प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया है।
शिकायत मिलते ही SP अनिल विश्वकर्मा के निर्देश पर जांच शुरू की गई। जाँच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कंपनी ने जिन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए अपनी क्षमता साबित करने हेतु परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट लगाया था, वह पूरी तरह कूटरचित (forged) था।

जाँच में यह भी पाया गया कि टेंडर प्रक्रिया में कंपनी ने फर्जी अनुभव दिखाकर पात्रता हासिल की और करोड़ों का काम अवैध तरीके से ले लिया।

कैसे की गई फर्जीवाड़े की कोशिश?

जाँच रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने MPPTCL के तीन महत्वपूर्ण टेंडर —

  • टी.आर. 36/16
  • टी.आर. 13/20
  • टी.आर. 35/20

को हासिल करने के लिए यह दावा किया कि वह हाईटेंशन लाइनों और बड़े सब-स्टेशनों के निर्माण का अनुभव रखती है।
इसी अनुभव को सिद्ध करने के लिए उसने इनॉक्सविंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेस लिमिटेड, नोएडा का दिनांक 2 मार्च 2017 का परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट लगाया।

इस सर्टिफिकेट में दावा किया गया था कि कैलाश देवबिल्ड ने 220 केवी सब स्टेशन निर्माण का काम सफलतापूर्वक पूरा किया है।

लेकिन जब EOW ने सीधे इनॉक्सविंड कंपनी से इस सर्टिफिकेट की पुष्टि चाही, तो उन्होंने साफ कहा—

“यह परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट हमारी कंपनी द्वारा जारी ही नहीं किया गया है।”

यानी कंपनी ने पूरा सर्टिफिकेट खुद तैयार करवाकर एक बड़ा सरकारी टेंडर हासिल कर लिया।

jabalpur EOW files FIR against company MD two directors for forged documents and tender worth Rs 226 crore

EOW की कार्रवाई: तीन संचालकों पर दर्ज हुआ मामला

पूरी जांच पूरी होने के बाद EOW जबलपुर ने कंपनी के तीन प्रमुख जिम्मेदार व्यक्तियों पर FIR दर्ज की है। इनमें शामिल हैं—

  • कैलाश कुमार शुक्ला – प्रबंध संचालक
  • सीमा शुक्ला – डायरेक्टर
  • भानू शुक्ला – डायरेक्टर

इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराएं 34, 420, 465, 468, 471 और 120-B के तहत मामला दर्ज किया गया है।
ये धाराएं धोखाधड़ी, जालसाजी, दस्तावेजों की कूट रचना और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित हैं, जिनमें सख्त सजा का प्रावधान है।

कंपनी पर क्या आरोप लगे?

जाँच रिपोर्ट के अनुसार—

  • फर्जी परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट तैयार करवाया गया
  • गलत दस्तावेजों के आधार पर पात्रता शर्तें पूरी बताई गईं
  • MP पावर ट्रांसमिशन कंपनी से 226 करोड़ रुपये के टेंडर प्राप्त किए
  • सरकारी विभाग को भ्रमित करके आर्थिक लाभ प्राप्त किया गया

यह साबित हुआ कि इनॉक्सविंड कंपनी ने ऐसा कोई सर्टिफिकेट जारी ही नहीं किया था, और न ही उन्होंने कैलाश देवबिल्ड को इस तरह का प्रोजेक्ट पूरा करने की पुष्टि दी थी।

EOW की जाँच में क्या सामने आया?

EOW अधिकारियों ने नोएडा स्थित इनॉक्सविंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस लिमिटेड के कॉर्पोरेट कार्यालय से संपर्क किया।
कंपनी ने बताया—

  • हाँ, कैलाश देवबिल्ड को 220 KV विंड फार्म पूलिंग सब स्टेशन बनाने का ठेका दिया गया था
  • लेकिन परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट उनके द्वारा जारी नहीं किया गया
  • प्रस्तुत दस्तावेज नकली है और कंपनी का नहीं है

इसके बाद EOW ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका उपयोग करके सरकारी धन व कार्य प्राप्त करने की पुष्टि की।

226 करोड़ का बड़ा टेंडर घोटाला—सरकारी खजाने पर सीधी चोट

MP पावर ट्रांसमिशन कंपनी के लिए यह प्रोजेक्ट ऊर्जा ढाँचा विकास से जुड़ा था, जिसमें—

  • उच्च क्षमता वाली HT लाइनों का निर्माण
  • बिजली सब स्टेशनों का निर्माण
  • पावर सप्लाई सुधार के प्रोजेक्ट

शामिल थे।
ऐसे कामों के लिए कंपनियों का अनुभव प्रमाणित होना अनिवार्य है।
लेकिन फर्जी दस्तावेज लगाकर कंपनी ने पात्रता हासिल कर ली, जो सीधे तौर पर सरकारी राजस्व, सार्वजनिक हित और नियमों का उल्लंघन है।

आगे क्या होगा?

EOW अब—

  • धन के प्रवाह की जांच
  • टेंडर अनुमोदन प्रक्रिया की जांच
  • शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच
  • कंपनी द्वारा किए गए कार्यों की वास्तविक स्थिति की जाँच

कर रही है।
साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि टेंडर लेने के लिए और कौन-कौन से दस्तावेज फर्जी या भ्रामक थे।

निष्कर्ष

कैलाश देवबिल्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर लगाया गया यह आरोप मध्यप्रदेश में हुए बड़े टेंडर घोटालों में से एक है।
फर्जी परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट के आधार पर 226 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स हासिल करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी तंत्र और पारदर्शिता पर बड़ा हमला भी है।
EOW की एफआईआर के बाद अब इस मामले में आगे कई और खुलासे होने की संभावना है।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp