टीकमगढ़ में लोकायुक्त को धक्का देकर भागा रिश्वतखोर आरक्षक, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज | मैहर में हथकड़ी समेत आरोपी फरार
मध्य प्रदेश में रिश्वतखोरी और पुलिस लापरवाही के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। ताज़ा घटनाओं ने राज्य के पुलिस प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। टीकमगढ़ में जहां लोकायुक्त की टीम को एक आरक्षक को रंगे हाथ पकड़ना था, वहीं आरोपी ने टीम को धक्का देकर फिल्मी अंदाज में भागने में सफलता पा ली। दूसरी ओर मैहर में कोर्ट पेशी से लौटते समय तीन आरोपी पुलिस को धक्का देकर भाग निकले, जिनमें से एक अब भी हथकड़ी सहित फरार है।
लोकायुक्त की कार्रवाई के दौरान टीकमगढ़ में रिश्वतखोर आरक्षक फरार
टीकमगढ़ में गुरुवार रात लोकायुक्त पुलिस की टीम ने आरक्षक पंकज यादव को रिश्वत लेते हुए पकड़ने की कोशिश की, लेकिन आरोपी टीम को धक्का देकर मौके से फरार हो गया। यह घटना कलेक्ट्रेट के पास हुई, जहां पुलिस विभाग में पदस्थ आरक्षक फरियादी से घूस की रकम ले रहा था।
कैसे हुआ पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, आवेदक अंकित तिवारी के खिलाफ कुछ दिन पहले कोतवाली थाना में एससी-एसटी एक्ट का मामला दर्ज हुआ था। इसी केस में जमानत दिलाने और बचाने के नाम पर आरक्षक पंकज यादव ने 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। फरियादी पहले ही 8 हजार रुपए दे चुका था, जबकि शेष 12 हजार रुपए गुरुवार रात देने तय थे।
जैसे ही राशि का लेन-देन हुआ, लोकायुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर छापा मारा। टीम ने आरोपी को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन आरक्षक ने लोकायुक्त निरीक्षकों को धक्का दिया और अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला। टीम उसके पीछे दौड़ी, लेकिन वह फरार होने में सफल रहा।
मौके से मिली महत्वपूर्ण बरामदगी
भागते समय आरोपी अपनी जैकेट और कार मौके पर ही छोड़ गया, जिसे लोकायुक्त ने जब्त कर देहात थाना में रखा है।
लोकायुक्त निरीक्षक कमल सिंह उइके ने बताया कि इस मामले में कोतवाली निरीक्षक बृजेंद्र चाचौंदिया और आरक्षक पंकज यादव दोनों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। निरीक्षक के पास रिश्वत मांगने का एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है।
अनुकंपा नियुक्ति से आया था पुलिस विभाग में, अब रिश्वतखोरी का आरोपी
आरक्षक पंकज यादव को वर्ष 2014 में अनुकंपा नियुक्ति के तहत पुलिस विभाग में रखा गया था। उसके पिता की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने के बाद, परिवार की सहायता के लिए उसे नौकरी दी गई थी। लेकिन एक दशक बाद वह भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और लोकायुक्त से धक्का-मुक्की जैसे मामलों में आरोपी बन चुका है।
इस घटना ने पुलिस विभाग के कार्यप्रणाली और आंतरिक नैतिकता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मैहर में पुलिस को धक्का देकर तीन आरोपी फरार, हथकड़ी समेत एक अब भी गायब
टीकमगढ़ की घटना के कुछ घंटों बाद ही मध्य प्रदेश के मैहर से एक और सनसनीखेज मामला सामने आया। कटनी जेल में बंद तीन आरोपियों को मैहर कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया था। पेशी पूरी होने के बाद वापस ले जाते समय हाईवे पर वाहन रोकते ही तीनों आरोपियों ने पुलिसकर्मियों को अचानक धक्का देकर भागना शुरू कर दिया।
कैसे भागे आरोपी?
जब पुलिस वाहन में हवा भर रही थी, तभी आरोपियों ने मौका देखते ही एक साथ हमला किया। पुलिसकर्मी कुछ समझते, उससे पहले ही तीनों आरोपी नजदीकी झाड़ियों की ओर अंधेरे में दौड़ पड़े।
पुलिस ने पीछा किया और दो आरोपियों को थोड़ी ही दूरी पर पकड़ लिया, लेकिन करण उर्फ टीच हथकड़ी सहित फरार हो गया। यह गंभीर सुरक्षा चूक बताती है कि आरोपी को पर्याप्त निगरानी में नहीं रखा गया था।
मैहर सीएसपी महेंद्र सिंह के अनुसार, तीनों आरोपी लूट के मामलों में वांटेड थे और इनके खिलाफ अमरदा और मैहर थानों में कई मामले दर्ज हैं।
सर्च अभियान तेज, पुलिस-प्रशासन में हड़कंप
फरार आरोपी की तलाश में पुलिस ने क्षेत्र में नाकेबंदी, गांवों व खेतों में सर्च ऑपरेशन और आसपास के जंगलों में खोज अभियान तेज कर दिया है। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
मध्य प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार और सुरक्षा चूक पर गंभीर सवाल
इन दो घटनाओं ने एक बार फिर मध्य प्रदेश की कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है—
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एक ओर लोकायुक्त पुलिस को ही धक्का देकर भाग रहे हैं भ्रष्ट पुलिसकर्मी
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दूसरी ओर हथकड़ी लगे आरोपी पुलिस को धक्का देकर फरार हो रहे हैं
राज्य सरकार जहां भ्रष्टाचारियों को पकड़ने वालों को 3 करोड़ तक का इनाम घोषित कर चुकी है, वहीं ऐसे मामले दिखाते हैं कि जमीनी स्तर पर सुधार की जरूरत बहुत अधिक है।
