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Maa Baglamukhi Mandir Land Case: 200 करोड़ की जमीन वापस सरकार के नाम, हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय

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Published On: 29 November 2025
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Maa Baglamukhi Temple News: बगलामुखी मंदिर भूमि विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार का हक बहाल – 1997 की फर्जी डिक्री रद्द

Maa Baglamukhi Temple: मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर से जुड़ी 200 करोड़ रुपए की कीमती भूमि को लेकर चल रहा दो दशक पुराना विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने राज्य सरकार के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए वर्ष 1997 में बनाई गई फर्जी और संदिग्ध डिक्री को पूरी तरह रद्द कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह डिक्री “धोखे, तथ्यों के दमन और संदेहास्पद दस्तावेजों” पर आधारित थी, इसलिए इसे कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती।

इस फैसले के बाद अब मां बगलामुखी मंदिर परिसर से जुड़ी पूरी भूमि पर राज्य सरकार का अधिकार दोबारा बहाल हो गया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता सनत कुमार और अन्य पक्षों की अपील खारिज कर दी, जिसके बाद प्रशासन ने मौके पर जाकर भूमि पर कब्जा पुनः लेने की प्रक्रिया शुरू भी कर दी।

दो दशक पुराना विवाद—1997 की फर्जी डिक्री पर बड़ा सवाल

आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित Baglamukhi Mandir लंबे समय से अपनी आध्यात्मिक पहचान और करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है। लेकिन वर्ष 1997 में विपक्षी पक्ष ने संदिग्ध परिस्थितियों में एक ऐसी डिक्री हासिल की, जिसके आधार पर वे मंदिर की कीमती जमीन पर दावा करने लगे।

अदालत के अनुसार—

  • विपक्षी पक्ष ने महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए

  • मंदिर और मूर्ति को मुकदमे में पक्षकार नहीं बनाया गया

  • राजस्व दस्तावेजों को दबाया गया

  • विवादित वसीयत संदिग्ध और अविश्वसनीय पाई गई

इसी आधार पर साल 2007 में आगर के अपर जिला न्यायाधीश ने इस डिक्री को अवैध घोषित कर दिया था। हाईकोर्ट ने भी कहा कि ऐसा कोई दस्तावेज मंदिर की संपत्ति पर अधिकार का आधार नहीं बन सकता।

Maa Baglamukhi Temple जमीन: सरकार के अभिलेखों ने केस मजबूत किया

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने विस्तृत और ठोस साक्ष्य अदालत के सामने रखे। जिनमें प्रमुख रूप से—

  • मूल राजस्व रिकॉर्ड

  • औकाफ समिति के दस्तावेज

  • मंदिर की गुरु–चेला परंपरा से जुड़े प्रमाण

  • 2006-07 से कलेक्टर के नाम दर्ज जमीन का आधिकारिक रिकॉर्ड

  • विवादित दस्तावेजों की पूरी श्रृंखला

हाईकोर्ट ने इन अभिलेखों को “भरोसेमंद”, “सुसंगत” और “धोखे की पूरी कहानी उजागर करने वाले” दस्तावेज बताते हुए राज्य सरकार के पक्ष को सही माना।

फैसले के मुख्य बिंदु (SEO Focus Keywords– Maa Baglamukhi Temple, Baglamukhi Mandir Land Case)

  • Maa Baglamukhi Temple परिसर की लगभग 200 करोड़ की जमीन पर सरकार का अधिकार बहाल।

  • हाईकोर्ट ने 1997 की फर्जी डिक्री को पूरी तरह शून्य घोषित किया।

  • 2007 में निचली अदालत द्वारा डिक्री अवैध घोषित करने के आदेश को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा।

  • कोर्ट ने कहा—डिक्री धोखे और दस्तावेजों के दमन पर आधारित थी।

  • मंदिर या मूर्ति को पक्षकार न बनाना गंभीर कानूनी त्रुटि।

  • सरकारी अभिलेख और राजस्व रिकॉर्ड ने केस को मजबूत किया।

  • 2006-07 से भूमि कलेक्टर के नाम धर्मशाला एवं मंदिर संपत्ति के रूप में दर्ज।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद जिला प्रशासन की रातों-रात कार्रवाई

जैसे ही हाईकोर्ट का निर्णय आया, जिला प्रशासन ने 28 नवंबर की रात तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। राजस्व और पुलिस अधिकारियों की टीम नलखेड़ा स्थित मंदिर परिसर में पहुंची और विवादित भूमि का सरकारी कब्जा पुनः बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

कई दुकानदार और निजी उपयोगकर्ता, जो वर्षों से भूमि पर कब्जा जमाए हुए थे, रात में ही दुकानें और सामान हटाते हुए दिखाई दिए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अब यह जमीन पूरी तरह मंदिर एवं सरकार के नाम दर्ज होगी और किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा सहन नहीं किया जाएगा।

यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?

  1. मां बगलामुखी मंदिर मध्यप्रदेश का प्रमुख शक्तिपीठ है – इसलिए मंदिर की संपत्ति पर किसी भी अवैध दावे का निराकरण आवश्यक था।

  2. 200 करोड़ की मूल्यवान भूमि की सुरक्षा – जिसे लेकर लंबे समय से विवाद और तनाव बना हुआ था।

  3. धार्मिक संस्थानों की संपत्ति संरक्षण के लिए मिसाल – यह निर्णय आगे के विवादों के लिए कानूनी दृष्टि से उदाहरण बनेगा।

  4. फर्जी वसीयत, कपटपूर्ण दस्तावेज और तथ्य छिपाने पर अदालत की सख्त टिप्पणी – न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिया कि ऐसे मामलों में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

मां बगलामुखी मंदिर: ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व

नलखेड़ा स्थित Maa Baglamukhi Temple देश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। न्याय, विजय और शत्रु नाश की देवी के रूप में मां बगलामुखी की आराधना विशेष रूप से की जाती है। यहां हर वर्ष लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर से जुड़ी भूमि का विवाद लंबे समय से श्रद्धालुओं के बीच चिंता का विषय बना हुआ था।

अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह विवाद पूरी तरह समाप्त हो चुका है।

निष्कर्ष (Conclusion)

हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने Maa Baglamukhi Mandir की भूमि को लेकर चल रहे दो दशक पुराने विवाद को समाप्त कर दिया है। फर्जी डिक्री को रद्द करते हुए सरकार का नियंत्रण वापस बहाल कर दिया गया है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अब मंदिर की भूमि किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे से मुक्त रहेगी।

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