जैन श्रीराम कथा कोटा: धर्म चक्रवर्ती जयकीर्ति जी गुरुदेव के सान्निध्य में भक्ति, संस्कार और जिनवाणी की अलौकिक गूँज
कोटा (राजस्थान)। कहा गया है— “जिनभक्ति से बढ़कर संसार में कोई दूसरा पुण्य नहीं।” यही दिव्य भाव और गहन आध्यात्मिक ऊर्जा देखने को मिली कोटा के रामपुरा क्षेत्र में, जहाँ विशिष्ट रामकथाकार एवं अनुुष्ठान विशेषज्ञ धर्म चक्रवर्ती, ध्यान दिवाकर मुनि प्रवर 108 श्री जयकीर्ति जी गुरुदेव विराजमान हैं।
21 नवंबर से 30 नवंबर तक चल रही पद्मपुराण आधारित जैन श्रीराम कथा ने कोटा शहर में भक्ति, अध्यात्म और संस्कारों का एक दिव्य वातावरण निर्मित कर दिया है।
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन “पार्श्वमणि” ने बताया कि दूसरे दिन की कथा में श्रद्धा, संस्कार और आत्मकल्याण के अनेक दृश्य उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर गए। बड़ी संख्या में कोटा व आसपास के शहरों से श्रद्धालु प्रतिदिन कथा का लाभ लेने पहुँच रहे हैं।
अकलंक स्कूल के बच्चों द्वारा गुरुदेव का पाद प्रक्षालन—सभी को भाव-विभोर करने वाला दृश्य
दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण रहा—
अकलंक स्कूल के नन्हे विद्यार्थियों द्वारा गुरुदेव का पाद प्रक्षालन।
जब छोटे-छोटे बच्चे हाथों में कलश लेकर भक्ति के साथ आगे बढ़े, तो उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध हो गया। बच्चों द्वारा किया गया यह पाद प्रक्षालन दृश्य यह प्रमाणित कर गया कि बचपन में दिए गए संस्कार जीवनभर साथ रहते हैं।
अकलंक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष पीयूष जैन ने बताया कि विद्यार्थियों के इस विशेष कार्यक्रम ने कथा में एक नई ऊर्जा और पवित्रता का संचार किया।
कथा प्रारंभ से पूर्व परेश जैन द्वारा मंगलाचरण पाठ किया गया।
गणमान्यजनों ने किया दीप प्रज्वलन एवं गुरुदेव की तस्वीर का अनावरण
कथा स्थल पर अनेक समाजजन एवं विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही, जिनमें—
- श्री जे.के. जैन
- श्री नरेश वैद
- श्री एम.के. जैन
- श्री प्रकाश पपड़ीवाल
- श्री भागचंद लोहड़िया
- श्री दीपचंद पहाड़िया
- चेतनप्रकाश जैन
- अनिल श्रीमाल
- कैलाश जैसवाल
- राहुल जैसवाल
- गुलाबचंद लुहाड़िया
- जंबू बड़जात्या
आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
उनके द्वारा दीप प्रज्वलन एवं गुरुदेव की छवि का अनावरण किया गया।
पद्मपुराण पर आधारित दिव्य जैन श्रीराम कथा—भावविभोर करने वाले प्रसंग
गुरुदेव जयकीर्ति जी ने अत्यंत सुंदर, सरल और हृदयस्पर्शी शैली में पद्मपुराण आधारित प्रसंगों का वर्णन किया।
प्रमुख कथा बिंदुओं में—
- राम का वनगमन
- दशरथ का वैराग्य और दीक्षा
- भरत का राम-वियोग
- धुतीाचार्य के माध्यम से गृहस्थ धर्म का महत्व
- जिनवाणी की शरण और मोक्षमार्ग की महिमा
प्रमुख रूप से वर्णित हुए।
गुरुदेव ने स्पष्ट कहा:
“संसार में जितने भी जीव सिद्ध और मुक्त हुए हैं, वे सभी जिनधर्म की शरण लेकर ही हुए हैं। जिनेंद्र भगवान की शरण अचिंत्य फल देने वाली है।”
जिनदर्शन, अष्टद्रव्य पूजन, अभिषेक और दान की महिमा
कथा में गुरुदेव ने—
- अष्ट द्रव्य से पूजन
- जिनप्रतिमा अभिषेक
- चार प्रकार के दान
- मंदिर में रंगोली, छत्र, चंवर, दर्पण जैसे मंगल द्रव्यों
की महिमा का विस्तृत वर्णन किया।
इसी क्रम में राजा वज्रकर्ण की भगवान जिनेंद्र के प्रति अगाध श्रद्धा की कथा ने सभी श्रोताओं को प्रभावित किया।
दूसरे दिन जिनवाणी भेट का सौभाग्य प्राप्त करने वालों में—
श्री चांदमल विमलादेवी परिवार, महेश मीना, प्रमोद–वर्षा, डॉ. सुरभि, अवि, लक्ष्य, डॉ. भव्य गंगवाल परिवार, श्री ओमप्रकाश–साधना, विकास–नेहा, विश्वास–अंजू पाटोदी, गुलाबवाड़ी के अनेक परिवार— उल्लेखनीय रहे।
कथा के संदेश—प्रेरणा, संयम और जीवन मूल्य
गुरुदेव द्वारा प्रस्तुत कथा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मजागृति का महाअनुष्ठान है।
उन्होंने कहा—
- “प्रभु श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने सदैव अनुशासन, कर्तव्य और सत्य को सर्वोपरि रखा।”
- “विपरीत परिस्थितियाँ मनुष्य को गिराती नहीं, बल्कि आकार देती हैं।”
- “महापुरुषों का जीवन सुनने से आत्मबल बढ़ता है, और जीवन जीने की दिशा मिलती है।”
लोगों से अपील—इस दिव्य कथा का लाभ अवश्य लें
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन ‘पार्श्वमणि’ ने बताया कि यह जैन श्रीराम कथा जीवन में नई ऊर्जा, शांति और आत्मबल उत्पन्न करने वाली है।
उन्होंने कहा—
“यह अवसर दुर्लभ है, इसे हाथ से न जाने दें। कथा सुनने भर से जीवन में संयम, श्रद्धा और शक्ति का संचार होता है।”
प्रस्तुति
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी
पारस जैन “पार्श्वमणि” (पत्रकार, कोटा)
मो. 9414764980



