भायंदर में आचार्य नित्यसेनसूरीश्वरजी का मंगल प्रवेश: अंजनशालाका, प्रतिष्ठा और दीक्षा महोत्सव के लिए भव्य तैयारियाँ पूर्ण
भायंदर (ब्रजेश बोहरा)
भायंदर जैन समाज इन दिनों अद्भुत आध्यात्मिक उमंग और धार्मिक उत्साह से सराबोर है। श्री थराद त्रिस्तुतिक जैन संघ, मुंबई के तत्वावधान में आगामी अंजनशालाका, प्रतिष्ठा महोत्सव और दीक्षा महोत्सव के शुभ आयोजन को लेकर तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। जैन समाज के लिए यह पर्व अत्यंत पावन, विरल और पुण्यदायी अवसर है, जहाँ भक्तिभाव, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास का समागम देखने को मिल रहा है।
संघ द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार माघशर सुद बीज, शनिवार 22 नवम्बर 2025 को परम पूज्य हृदयसम्राट, धर्मदिवाकर, वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराज साहेब (Acharya Nityasensuriswarji) अपने समस्त श्रमण–श्रमणी वृंद सहित भायंदर की पावन भूमि पर मंगल प्रवेश करेंगे। इस विशेष आगमन को लेकर पूरे भायंदर में श्रद्धालुओं में अत्यंत हर्ष का वातावरण है।
नया शिखरबंदी जिनालय और नई प्रतिमाओं की अंजनशालाका–प्रतिष्ठा
भायंदर और बोरिवली जैन समाज के लिए यह क्षण ऐतिहासिक होने जा रहा है। भायंदर में निर्मित नवनिर्मित शिखरबंदी जिनालय तथा बोरिवली जैनालय में प्रतिष्ठापित होने वाली परमात्मा, गणधर भगवान और गुरुदेव की नई प्रतिमाओं की अंजनशालाका एवं प्रतिष्ठा विधि, पूज्य आचार्यश्री के वरदहस्तों से सम्पन्न होगी।
अंजनशालाका और प्रतिष्ठा महोत्सव जैन धर्म में अत्यंत दुर्लभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस शुभ अवसर को लेकर जैन समाज में गहरी आस्था और दिव्य ऊर्जा का वातावरण है। जैन संघ के कार्यकर्ता, महिलाएँ, मुमुक्षु, युवक–युवतियाँ सभी पूरी निष्ठा और भक्ति के साथ तैयारियों में जुटे हुए हैं।
भायंदर में लगेगी भव्य धार्मिक मंगल ध्वजाएँ व सजेगा पूरा नगर
भायंदर जैन समाज ने इस बड़े आयोजन को लेकर शहर को धार्मिक रंगों से सजा दिया है। मुख्य मार्गों, चौकों, प्रवेश द्वारों और भवनों पर ध्वजा, तोरण, बंदनवार, पोस्टर्स, आध्यात्मिक संदेश, और LED वेलकम बोर्ड लगाए गए हैं। शहर के कई स्थानों पर स्वागत–द्वार स्थापित किए गए हैं, जहाँ श्रद्धालुगण आचार्यश्री का अभिनंदन करने हेतु उत्सुक हैं।
भायंदर जैन समाज की विभिन्न समितियाँ — सेवा समिति, शोभायात्रा समिति, भोजन समिति, स्वागत समिति, संस्कृति समिति आदि — अत्यंत योजनाबद्ध तरीके से कार्यक्रम को सफल बनाने में लगी हैं।
मीरारोड से मंगल विहार — शोभायात्रा बनेगी आकर्षण का केंद्र
संघ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पूज्य आचार्य नित्यसेनसूरीश्वरजी शनिवार की प्रातः मीरारोड से विहार करते हुए श्री नवकारा पार्श्वनाथ जिनालय (60 फुट रोड) पर पधारेंगे। इसके बाद प्रातः 8:15 बजे भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ होगा।
शोभायात्रा की विशेषताएँ:
-
धर्म–ध्वजा वाहकों का दल
-
आरती–धुन के साथ बालक–बालिकाएँ
-
कलश–यात्रा
-
पुष्पवर्षा
-
रथ में आगमन करते श्रमण–श्रमणी वृंद
-
जैन धर्म के संदेशों वाले झाँकियाँ
-
भक्ति गीतों से सजी सांस्कृतिक टोली
यह शोभायात्रा शहर के मुख्य राजमार्गों से होते हुए श्री राज जयंत वाटिका (D-Mart के सामने) पहुँचेगी।
प्रेरक प्रवचन और प्रतिष्ठा महोत्सव के चढ़ावे का बोलावणा
शोभायात्रा के पश्चात् पूज्य आचार्यश्री द्वारा एक प्रेरक प्रवचन होगा, जिसमें वे धर्म, साधना, संयम, जिनवाणी और जीवन सुधार के मार्ग पर विशेष मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। प्रवचन के बाद प्रतिष्ठा महोत्सव से संबंधित शेष चढ़ावे (बोलावणा) भी कराए जाएँगे।
यह बोलावणा कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए अद्भुत और दुर्लभ अवसर है, क्योंकि प्रतिष्ठा के चढ़ावे — जैसे ध्वजारोहण, कलश, ज्योत, नेत्रार्पण, पुष्पार्चन, अभिषेक आदि — अत्यंत महापुण्यकारी माने जाते हैं।
सकल श्रीसंघ की नवकारशी – आध्यात्मिक शुरुआत
समस्त भायंदर श्रीसंघ की नवकारशी प्रातः 7:30 बजे से
श्री राज जयंत वाटिका स्थित आभू संघवी भोजनखंड में आयोजित की गई है।
इस नवकारशी में शहर के हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। नवकारशी के साथ ही इस दिव्य पर्व का आधिकारिक शुभारंभ माना जाएगा।
पूरे शहर को धर्मलाभ लेने का सादर निमंत्रण
श्री थराद त्रिस्तुतिक जैन संघ ने जैन समाज के समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे इस पावन आयोजन में समय पर पधारकर ‘‘धर्मलाभ’’ ग्रहण करें। यह अवसर बार–बार जीवन में नहीं मिलता और आचार्यश्री के दर्शन–स्पर्श, प्रवचन और प्रतिष्ठा जैसे कार्यक्रम जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देते हैं।
निष्कर्ष
भायंदर में होने वाला यह अंजनशालाका–प्रतिष्ठा–दीक्षा महोत्सव जैन समाज के लिए एक अविस्मरणीय और अत्यंत पवित्र अध्याय बनने जा रहा है। पूज्य आचार्य नित्यसेनसूरीश्वरजी महाराज का आगमन पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से सिंचित करेगा। समाज के सभी श्रद्धालुओं में इस दिव्य समारोह को लेकर अपार उत्साह और भक्ति की लहर है।

