सुप्रिया श्रीनेत का शशि थरूर पर पलटवार: “पीएम मोदी के भाषण में मुझे कुछ भी सराहनीय नहीं लगा” – कांग्रेस में उठी नई बहस
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया भाषण को लेकर कांग्रेस के भीतर एक अलग ही बहस छिड़ गई है। जहां पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने पीएम मोदी के संबोधन की कुछ बातों की तारीफ की, वहीं कांग्रेस की तेजतर्रार प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने थरूर की सकारात्मक प्रतिक्रिया से सख्त असहमति जताई है। श्रीनेत ने दो-टूक कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में मुझे सराहने जैसा कुछ भी नहीं दिखा।”
यह मुद्दा इसलिए चर्चा में है क्योंकि एक ही पार्टी के दो प्रमुख चेहरे किसी केंद्रीय विषय पर बिल्कुल विपरीत रुख अपनाते दिखे। इससे न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ी है, बल्कि मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर भी यह बयानबाजी तेजी से वायरल हो रही है।
सुप्रिया श्रीनेत ने शशि थरूर को दिया करारा जवाब
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने शशि थरूर द्वारा की गई पीएम मोदी की प्रशंसा पर सीधे पलटवार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का भाषण उन्हें “तुच्छ, पक्षपातपूर्ण और तथ्यहीन” लगा।
उन्होंने कहा कि—
“मुझे प्रधानमंत्री के भाषण में सराहनीय कुछ भी नहीं मिला। उन्होंने उस कार्यक्रम में भी कांग्रेस को निशाना बनाया। ऐसे में मुझे समझ नहीं आता कि शशि थरूर को सराहना की कौन-सी वजह दिख गई।”
सुप्रिया श्रीनेत ने आगे कहा कि पीएम मोदी ने देश के सबसे जरूरी मुद्दों को छुआ ही नहीं। उनके मुताबिक जनता को यह बताया जाना चाहिए था कि—
1. निष्पक्ष पत्रकारिता से उन्हें दिक्कत क्यों है?
श्रीनेत ने कहा कि पीएम मोदी जिस अखबार के कार्यक्रम में मौजूद थे, वहां उन्हें मीडिया और सरकार के बीच बढ़ते तनाव पर खुलकर बात करनी चाहिए थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार “अनुकूल न दिखने वाली पत्रकारिता” से लगातार असहज रहती है और इसकी वजह प्रधानमंत्री को स्पष्ट करनी चाहिए।
2. सच बोलने वालों से नाराज़गी क्यों?
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार उन पत्रकारों और बुद्धिजीवियों से परेशान रहती है जो सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं।
उनके अनुसार—
“अगर प्रधानमंत्री सच बोलने वालों से खुश नहीं हैं, तो उन्हें बताना चाहिए कि आखिर समस्या क्या है।”
3. विपक्ष की नकारात्मक आलोचना कब तक?
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि प्रधानमंत्री हर मंच पर विपक्ष की आलोचना करते हैं, लेकिन देश के वास्तविक मुद्दों का समाधान प्रस्तुत नहीं करते।
शशि थरूर ने पीएम मोदी के भाषण में क्या सराहा था?
वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण को लेकर एक सकारात्मक टिप्पणी की थी। थरूर ने कहा कि उन्होंने कार्यक्रम में शिरकत की और उन्हें प्रधानमंत्री का संबोधन कई मायनों में “विचारोत्तेजक” लगा।
शशि थरूर ने मोदी के भाषण के जिन बिंदुओं की प्रशंसा की, वे ये हैं—
1. भारत की “रचनात्मक अधीरता” (Creative Impatience)
थरूर ने लिखा कि प्रधानमंत्री ने बताया कि आज भारत विकास के लिए एक “रचनात्मक अधीरता” से भरा हुआ है—यानी तेजी और नवाचार के साथ आगे बढ़ने की इच्छा।
2. उपनिवेशवादी मानसिकता से मुक्ति पर जोर
पीएम मोदी ने मैकाले की 200 साल पुरानी औपनिवेशिक सोच को खत्म करने और भारतीय भाषाओं, ज्ञान और विरासत को आगे लाने की बात कही।
थरूर ने इस संदेश को “महत्वपूर्ण और सकारात्मक” बताया।
3. भारत को ‘उभरते बाजार’ नहीं, ‘उभरते मॉडल’ के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश
थरूर के अनुसार पीएम ने देश के आर्थिक लचीलेपन (economic resilience) पर जोर दिया और कहा कि भारत अब दुनिया के लिए एक “मॉडल” बन सकता है।
4. चुनावी नहीं, भावनात्मक मूड में होने का दावा
थरूर ने लिखा कि प्रधानमंत्री ने भाषण में यह भी कहा कि वे केवल चुनावी मूल्यों में नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से राष्ट्र के विकास के प्रति समर्पित हैं।
5. स्वास्थ्य समस्या के बावजूद कार्यक्रम में शामिल होना
थरूर ने यह भी नोट किया कि प्रधानमंत्री तेज सर्दी और खांसी के बावजूद कार्यक्रम में मौजूद थे, जो “समर्पण” का संकेत है।
कांग्रेस में दो आवाजें — राजनीतिक संदेश क्या?
सुप्रिया श्रीनेत और शशि थरूर के बयानों ने कांग्रेस के भीतर विचारों की विविधता को एक बार फिर उजागर किया है।
जहां थरूर अक्सर अपने ‘उदार विचारों’ के लिए जाने जाते हैं, वहीं सुप्रिया श्रीनेत पार्टी लाइन पर सख्ती से खड़ी रहने वाली नेताओं में शामिल हैं।
इस विवाद से तीन बड़े राजनीतिक संकेत निकलते हैं—
1. कांग्रेस में एकरूपता की चुनौती
एक ही भाषण पर पूरी तरह अलग राय पार्टी की अंदरूनी रणनीति को कमजोर भी कर सकती है।
2. बीजेपी के भाषणों को लेकर विभाजित दृष्टिकोण
कांग्रेस के कुछ नेता पीएम मोदी की बातों में सकारात्मक पहलू खोजते हैं, जबकि अन्य बिल्कुल विरोध में रहते हैं।
3. सोशल मीडिया में प्रभाव
सुप्रिया श्रीनेत का बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिससे विषय को मिली चर्चा कई गुना बढ़ गई।
क्या यह सिर्फ बयानबाजी है या राजनीतिक रणनीति?
राजनीति विशेषज्ञों के अनुसार, कांग्रेस के भीतर नेताओं की दो अलग राय होना एक सामान्य घटना है। लेकिन जब मुद्दा प्रधानमंत्री के भाषण का हो और पार्टी के भीतर ऐसी तीखी प्रतिक्रिया आ जाए, तो यह एक राजनीतिक संदेश भी बन जाता है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है:
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थरूर अपनी ‘moderate’ और intellectual छवि के अनुरूप व्यवहार कर रहे हैं।
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जबकि सुप्रिया श्रीनेत पार्टी के आक्रामक रुख को आगे बढ़ा रही हैं, ताकि कांग्रेस की विपक्षी धार तेज दिखे।
यह घटना 2024 के बाद के राजनीतिक माहौल में कांग्रेस की विचारधारा और रुख को भी प्रभावित करती दिखती है।
पीएम मोदी का भाषण – विवाद क्यों?
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कई मुद्दे उठाए—
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भारतीय भाषाओं और ज्ञान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की जरूरत
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उपनिवेश काल की मानसिकता से मुक्ति
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आर्थिक मजबूती और वैश्विक मॉडल बनने की क्षमता
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मीडिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका
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राजनीतिक दलों की जिम्मेदारियां
हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाषण में विपक्ष की बार-बार अनावश्यक आलोचना की गई, जिससे “तकनीकी चर्चा की जगह राजनीतिक कटाक्ष अधिक दिखा।”
निष्कर्ष: बहस अभी जारी रहेगी
सुप्रिया श्रीनेत और शशि थरूर के इस विपरीत रुख ने राष्ट्रीय राजनीति को एक नई बहस दे दी है।
जहां एक तरफ थरूर ने पीएम मोदी के भाषण के कुछ सकारात्मक तत्वों को स्वीकार किया, वहीं सुप्रिया श्रीनेत ने उसी भाषण को “तुच्छ, अपमानजनक और राजनीतिक रूप से एकतरफा” बताया।
दोनों की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि कांग्रेस के भीतर विभिन्न विचारधाराएं मौजूद हैं और राजनीतिक मुद्दों पर नेताओं की समझ व दृष्टिकोण अलग-अलग हो सकते हैं।
