दिल्ली लाल किला ब्लास्ट मामले में सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और दिल्ली पुलिस इस मामले में कई स्तरों पर जांच कर रही हैं। संदिग्धों की गिरफ्तारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई और मेडिकल व शैक्षणिक संस्थानों तक जांच के चलते इस आतंकी मॉड्यूल की कई परतें उजागर हो रही हैं। सरकार इसे बड़े आतंकी नेटवर्क का हिस्सा मानकर हर कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
जैश-ए-मोहम्मद व्हाट्सऐप चैनल किया ब्लॉक

जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का व्हाट्सऐप चैनल ब्लॉक कर दिया गया है। यह चैनल “मार्कज़ सय्यदना तमीम दारी (MSTD)” नाम से संचालित हो रहा था और इसके 13,000 से अधिक फॉलोअर थे। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि चैनल का इस्तेमाल आतंकी संदेश फैलाने, भर्ती और प्रचार के लिए किया जा रहा था। इसके अलावा अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया। तलाशी में कई डिजिटल और दस्तावेज़ी सबूत बरामद हुए हैं, जो ब्लास्ट मॉड्यूल की फंडिंग से जुड़े हो सकते हैं।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी के एमबीबीएस के छात्रों को किया गया गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे एमबीबीएस थर्ड ईयर छात्र को देवबंद से हिरासत में लिया। जांच में पाया गया कि इस छात्र के कई संपर्क आतंकी उमर मोहम्मद से थे, जिसने ब्लास्ट के दौरान खुद को कार सहित उड़ा लिया था।
पुलिस उसके फोन, चैट और संपर्कों की गहन जांच कर रही है। कानपुर के लक्ष्मीपत सिंघानिया इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी ने सरकार को पत्र लिखकर डॉ. आरिफ की सेवाओं की समीक्षा और जांच की अनुशंसा की है। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस में SCO समिट में कहा कि दुनिया को आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ शून्य सहिष्णुता अपनानी चाहिए और आतंक का कोई औचित्य नहीं हो सकता।
