Missing Children India SC News हर 8 मिनट में 1 बच्चा लापता… सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र को 9 दिसंबर तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश |
भारत में लापता बच्चों (Missing Children) की बढ़ती संख्या एक गंभीर राष्ट्रीय चिंता बनती जा रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए। एक मीडिया रिपोर्ट जिसमें दावा किया गया था कि “देश में हर 8 मिनट में एक बच्चा लापता हो जाता है”—उसके बाद कोर्ट ने इस विषय को अत्यंत गंभीर बताया और सरकार को 9 दिसंबर 2025 तक ठोस कदम उठाने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों वाली पीठ—जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन—ने कहा कि लापता बच्चों का मुद्दा केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चिंता और बच्चों की सुरक्षा की गारंटी से जुड़ा हुआ है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर सिस्टम की धीमी कार्यशैली पर कोर्ट ने नाराज़गी प्रकट की और केंद्र को तुरंत कार्रवाई के लिए बाध्य किया।
हर 8 मिनट में 1 बच्चा लापता—SC की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा:
“मैंने अखबार में पढ़ा कि देश में हर 8 मिनट में एक बच्चा लापता हो जाता है। आंकड़ा कितना सही है, यह अलग बात है, लेकिन यह एक बेहद गंभीर स्थिति है।”
उनके इस बयान से स्पष्ट है कि देश में लापता बच्चों की स्थिति चिंताजनक है और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।
कोर्ट ने कहा कि बच्चों के अपहरण, मानव तस्करी, गुमशुदगी और ट्रैकिंग में देरी जैसी समस्याएँ सरकार और संस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती हैं।
SC ने 6 हफ्ते की मोहलत ठुकराई, 9 दिसंबर तक रिपोर्ट देने का आदेश
केंद्र सरकार की ओर से पेश ASG ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट से कहा कि राज्यों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने और प्रक्रिया पूरी करने में लगभग 6 हफ्ते लगेंगे।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह तर्क सिरे से खारिज करते हुए कहा—
“इस मुद्दे में देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। 9 दिसंबर तक पूरी प्रक्रिया पूरी करें।”
कोर्ट ने केंद्र को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में नोडल अधिकारी (Nodal Officer for Missing Children) नियुक्त करे और बच्चों के ट्रैकिंग सिस्टम को मज़बूत करे।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निम्नलिखित बड़े आदेश दिए:
1. 9 दिसंबर 2025 तक नोडल अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य
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देश के हर राज्य व केंद्र शासित प्रदेश में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए।
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यह अधिकारी लापता बच्चों के मामलों की मॉनिटरिंग, ट्रैकिंग और समन्वय का ज़िम्मेदार होगा।
2. 6 हफ्ते की मांग अस्वीकार
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केंद्र ने प्रक्रिया पूरी करने के लिए 6 हफ्ते मांगे थे, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।
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कोर्ट का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामले में देरी नहीं की जा सकती।
3. गोद लेने (Adoption) की प्रक्रिया सरल करने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
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भारत में adoption process अत्यधिक जटिल है।
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गोद लेने की धीमी प्रक्रिया बच्चों के भविष्य को प्रभावित करती है।
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सरकार को इस प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना चाहिए।
भारत में लापता बच्चों की स्थिति: एक बड़ी चुनौती
भारत में लापता बच्चों के मामले लंबे समय से बढ़ते रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और कई रिपोर्टों के अनुसार:
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हर साल लाखों बच्चे लापता होते हैं।
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कई बच्चे मानव तस्करी, बाल श्रम, जबरन विवाह, यौन अपराध, और स्मगलिंग रैकेट का शिकार बन जाते हैं।
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FIR दर्ज होने में देरी और जांच के धीमे होने से बच्चों को ढूंढने की संभावना कम हो जाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर राज्य की पुलिस, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC), और अन्य संस्थानों के बीच समन्वय की कमी एक बड़ी समस्या है।
क्यों जरूरी है हर राज्य में ‘Nodal Officer for Missing Children’?
नोडल अधिकारी की नियुक्ति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:
◆ वह लापता बच्चों के सभी मामलों की मॉनिटरिंग करेगा।
◆ राज्यों के बीच सूचना का आदान-प्रदान बेहतर होगा।
◆ पुलिस, CWC, और सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय तेज़ होगा।
◆ राष्ट्रीय पोर्टल पर अपडेट्स समय पर डाले जाएंगे।
◆ हाई-रिस्क मामलों पर तुरंत कार्रवाई हो सकेगी।
यह कदम पूरे देश में लापता बच्चों की रिकवरी रेट को बढ़ाने में कारगर साबित हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट सख्त क्यों है?
कुछ प्रमुख कारण जिनसे SC ने इस मामले को गंभीर बताया:
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बच्चों की सुरक्षा संवैधानिक जिम्मेदारी है।
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लापता बच्चों के मामलों में वृद्धि ने पूरे सिस्टम की कमज़ोरियां उजागर की हैं।
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राज्यों में मॉनिटरिंग मैकेनिज़म प्रभावी नहीं है।
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Adoption प्रक्रिया बेहद जटिल और धीमी है।
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केंद्र व राज्यों की लापरवाही से बच्चों का भविष्य खतरे में है।
कोर्ट ने कहा कि बच्चों के मामले में “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जानी चाहिए।
गोद लेने की प्रक्रिया क्यों बनी समस्या?
भारत में गोद लेने से जुड़े कानून और प्रक्रियाएँ अत्यधिक जटिल मानी जाती हैं:
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कई दंपति वर्षों तक मंजूरी का इंतजार करते हैं।
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फाइलें और कागज़ी कार्यवाही में अत्यधिक समय लगता है।
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अनाथालयों में रहने वाले बच्चों का भविष्य इसी वजह से अटक जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि adoption rules को:
✔ सरल
✔ पारदर्शी
✔ और तेज़
बनाया जाए, ताकि बच्चों को जल्दी सुरक्षित परिवार मिल सके।
9 दिसंबर 2025: केंद्र सरकार के लिए अहम तारीख
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि 9 दिसंबर तक केंद्र को:
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सभी राज्यों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
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लापता बच्चों के मामलों की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी।
अगर केंद्र देरी करता है, तो सुप्रीम कोर्ट और भी सख्त कदम उठा सकता है।
निष्कर्ष: “हर 8 मिनट में 1 बच्चा लापता”—एक चेतावनी, सिर्फ आंकड़ा नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने देश को साफ संदेश दिया है कि:
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बच्चों की सुरक्षा में कोई लापरवाही नहीं चलेगी।
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यह सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का दायित्व है।
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सिस्टम में पारदर्शिता, मजबूती और तेजी लाना अब अनिवार्य है।
9 दिसंबर को केंद्र क्या रिपोर्ट देता है, यह तय करेगा कि आगे सुप्रीम कोर्ट देश के बच्चों की सुरक्षा के लिए कौन से बड़े कदम उठाएगा।

