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सावित्री एम्पायर कॉलोनी में नर्मदेश्वर महादेव प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न, भव्य कलश यात्रा और वैदिक अनुष्ठानों से शिवमय हुआ पूरा परिसर

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Published On: 17 November 2025
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सावित्री एम्पायर कॉलोनी में नर्मदेश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न

भव्य कलश यात्रा, धार्मिक अनुष्ठानों और भक्तिमय वातावरण ने पूरे क्षेत्र को किया शिवमय

भानगढ़ स्थित सावित्री एम्पायर कॉलोनी में रविवार का दिन अध्यात्म, भक्ति और उत्साह से परिपूर्ण रहा। कॉलोनी परिसर में स्थापित किए गए नर्मदेश्वर महादेव के पवित्र शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा का महाअनुष्ठान अत्यंत हर्षोल्लास, श्रद्धा और विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ। सुबह से ही वातावरण में शिव नाम की गूँज सुनाई दे रही थी और श्रद्धालुओं की भीड़ अपने आराध्य के दिव्य रूप के दर्शन करने उमड़ पड़ी।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह की शुरुआत भव्य कलश यात्रा से हुई। धार्मिक परंपराओं और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सुगंधित पुष्पवृष्टि, शंख-नाद, ढोल-नगाड़ों की धुन और भक्तों की जयकारों ने पूरे मार्ग को पावन और ऊर्जा से भर दिया। कलश यात्रा में महिलाएँ सिर पर कलश धारण कर पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुईं, वहीं बच्चे और युवा डीजे तथा नृत्य की धुनों के साथ उत्साहपूर्वक आगे बढ़ते दिखाई दिए। पूरा वातावरण “जय शिव शंकर”, “हर हर महादेव”, “बोल बम” जैसे मंगल घोष से गूंजता रहा।

कलश यात्रा के समारोह के बाद आयोजन स्थल पर मुख्य अनुष्ठान प्रारम्भ हुआ। विद्वान पंडितों द्वारा विधिपूर्वक गणपति पूजन, मंडल पूजन, नवग्रह पूजन, शिवाभिषेक, रुद्रपाठ और प्राण प्रतिष्ठा की सभी वैदिक क्रियाएँ सम्पन्न कराई गईं। शिवलिंग पर जल, दुग्ध, मधु, दही, घृत, गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक किया गया। मनोहारी भजनों और मंत्रोच्चारण से पूरा वातावरण शिवमय हो उठा।

आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में श्री मुन्ना ठेकेदार जी तथा श्री विवेक खरे जी उपस्थित रहे। दोनों ही अतिथियों ने प्राण प्रतिष्ठा के इस महाअनुष्ठान को समाज में धार्मिक एकता, सद्भाव और सामूहिक सहभागिता का प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल समाज को जोड़ते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों में धार्मिक परंपराओं के प्रति आस्था और संस्कार भी विकसित करते हैं।

कार्यक्रम में गोपाल यादव, दिलीप वाडेकर, संदीप थांगे, जितेंद्र कोल्हे, अजय चौधरी, अमित पगारे, कृष्ण तिवारी, प्रकाश रघुवंशी, जितेंद्र सरवाड़े, अनिल कुमावत, अजय शर्मा और रवेंद्र दुबे सहित कॉलोनी के अनेक गणमान्य नागरिकों ने सक्रिय सहयोग किया। सभी ने आयोजन को सफल बनाने के लिए अपने-अपने स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कॉलोनी के वरिष्ठजनों ने आयोजन की व्यवस्था और अनुशासन के लिए सराहनीय योगदान दिया, जबकि युवा वर्ग ने स्वागत, जलपान व्यवस्था, प्रसाद वितरण, स्टेज प्रबंधन और सजावट का कार्य उत्साहपूर्वक संभाला।

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पूरे परिसर को फूलों, झालरों, रंग-बिरंगी लाइटों और पारंपरिक थीम से सजाया गया था। प्रवेश द्वार पर भगवान शिव की विशाल आकर्षक प्रतिमा के साथ कलात्मक स्वागत तोरण लगाया गया, जिसका दृश्य कार्यक्रम में आने वाले हर व्यक्ति के मन को भा गया। छोटे बच्चों द्वारा बनाए गए भगवान शिव के चित्र और पेंटिंग्स भी विशेष आकर्षण का केंद्र बने।

प्राण प्रतिष्ठा के दौरान पंडितों ने शिव पुराण और धर्मग्रंथों में वर्णित प्राण प्रतिष्ठा की महिमा, इसके धार्मिक महत्व और घर-परिवार में भगवान शिव की उपस्थिति से मिलने वाले आशीर्वाद पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नर्मदा नदी से प्राप्त नर्मदेश्वर शिवलिंग को विशेष पवित्र माना गया है, क्योंकि यह स्वयंभू ऊर्जा का प्रतीक होता है और शिवभक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करता है।

अनुष्ठान के पश्चात सामूहिक आरती का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तजन शामिल हुए। आरती के पश्चात सभी भक्तों को महाप्रसाद वितरित किया गया। भक्तों ने इस आयोजन को अपने जीवन का अविस्मरणीय अध्यात्मिक अनुभव बताया। कई लोगों ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन न केवल परिवार और समाज को जोड़ते हैं बल्कि मन, विचार और वातावरण को भी सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं।

कॉलोनी के सभी निवासियों का कहना था कि यह आयोजन लंबे समय से उनकी सामूहिक इच्छा थी, और आज उसका पूरा होना भगवान शिव की कृपा और सामूहिक एकता का परिणाम है। कॉलोनी के निवासियों ने मिलकर भविष्य में भी इसी प्रकार के धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति की ओर से सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया। समिति ने कहा कि इस पूरे आयोजन की सफलता कॉलोनीवासियों की एकजुटता और सेवा भावना का सशक्त उदाहरण है।

सावित्री एम्पायर कॉलोनी में संपन्न नर्मदेश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा न केवल एक धार्मिक कार्यक्रम था, बल्कि कॉलोनी की सामाजिक और सांस्कृतिक एकजुटता का भी प्रतीक बन गया। रविवार का यह दिन वर्षों तक लोगों की स्मृतियों में भक्ति, आनंद, समर्पण और शिव कृपा के रूप में अंकित रहेगा।

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