इंदौर समाचार: जिंसी चौराहे का चौड़ीकरण बना विवाद का केंद्र — 200 साल पुराने मकान-दुकान तोड़ने की तैयारी, बिना मुआवजा सैकड़ों लोगों के रोजगार पर संकट
इंदौर शहर के पुराने और ऐतिहासिक इलाकों में से एक जिंसी चौराहा इन दिनों विवादों के केंद्र में है। नगर निगम ने इस क्षेत्र की सड़कों को नए मास्टर प्लान के तहत 79 फीट तक चौड़ा करने का प्रस्ताव रखा है। यह योजना जिंसी चौराहे से लेकर रानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा तक और नेमीनाथ चौराहे से जिंसी चौराहे तक की सड़कों को कवर करती है। लेकिन इस योजना ने सैकड़ों परिवारों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि इस चौड़ीकरण के दौरान 200 साल पुराने घर और दुकानें तोड़े जाने की आशंका है — वह भी बिना किसी मुआवजे के।
पुराने बाजार पर बुलडोजर की आहट
इस इलाके में अधिकांश मकान और दुकानें होलकर शासन काल (लगभग 1830 के दशक) से अस्तित्व में हैं। यहां की कई इमारतें न केवल व्यापारिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, उनके पूर्वजों ने होलकर राज में वैध रूप से जमीन खरीदी थी। बाद में जब नगर निगम अस्तित्व में आया, तब अधिकांश ने अपने मकानों और दुकानों के नक्शे निगम से पास करवाए थे।
अब अचानक निगम द्वारा नोटिस भेजे जा रहे हैं कि लोग स्वयं अपनी इमारतें हटा लें, क्योंकि यह हिस्सा सड़क चौड़ीकरण में आएगा। यह खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में भय और विरोध का माहौल है।
रहवासियों का कहना – “बिना मुआवजा सबकुछ बर्बाद कर रहे हैं”
स्थानीय दुकानदारों और रहवासियों ने कहा है कि अगर सड़कों को 79 फीट तक चौड़ा किया गया तो उनकी पूरी दुकानें और मकान समाप्त हो जाएंगे।
संजय खानविलकर, जो पिछले 70 वर्षों से इस इलाके में रह रहे हैं, ने कहा —
“हमारी दुकानें और घर पुश्तैनी हैं। हमने यहां की हर ईंट अपनी मेहनत से लगाई है। बिना मुआवजा दिए तोड़फोड़ करना अन्याय है। हम आंदोलन जारी रखेंगे जब तक न्याय नहीं मिलता।”
कई रहवासियों ने निगम के निर्णय को एकतरफा और अव्यावहारिक बताया है। उनका कहना है कि सड़क चौड़ीकरण से केवल व्यापारिक नुकसान नहीं होगा, बल्कि इस क्षेत्र की संस्कृति और पहचान भी मिट जाएगी।
1835 में खरीदा था घर — अब टूटने की कगार पर
जिंसी रोड के पुराने निवासी गोविंद शर्मा ने बताया कि उनके पूर्वजों ने यह घर 1835 में होलकर शासनकाल में खरीदा था।
“हमारे पास उस समय की रजिस्ट्री और दस्तावेज मौजूद हैं। आजादी के बाद हमने नगर निगम से घर का नक्शा पास करवाया। पहले कहा गया था सड़क 40 फीट चौड़ी होगी, फिर 60 फीट कर दी गई। अब अचानक 79 फीट का प्रस्ताव आ गया। अगर ऐसा हुआ तो हमारी दुकानें पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।”
बढ़ता विरोध, नेताओं ने भी जताई चिंता
इस पूरे मामले पर क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता कृपाशंकर शुक्ला ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि चौड़ीकरण व्यावहारिक होना चाहिए।
“जिंसी रोड शहर का एक मुख्य व्यापारिक इलाका है। अगर इसे 79 फीट चौड़ा किया गया तो पूरा बाजार बर्बाद हो जाएगा। हजारों लोगों का रोजगार छिन जाएगा। हमने महापौर पुष्यमित्र भार्गव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से इस विषय पर चर्चा की है। हमें उम्मीद है कि कोई संतुलित समाधान निकलेगा।”
यह इलाका मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र में आता है, इसलिए इस मुद्दे पर राजनीतिक सक्रियता भी बढ़ गई है।
पार्षद का कहना — “रहवासियों से संवाद जारी है”
क्षेत्र की पार्षद भावना मिश्रा ने बताया कि वह लगातार रहवासियों और अधिकारियों के बीच संवाद बनाए हुए हैं।
“हमने महापौर से निवेदन किया है कि पहले माइक्रो सर्वे कराया जाए ताकि देखा जा सके कि कितनी इमारतें वाकई प्रभावित होंगी। महापौर ने आश्वासन दिया है कि सर्वे के बाद ही कोई कार्रवाई होगी और रहवासियों की पूरी मदद की जाएगी।”
निगम की दलील — “ट्रैफिक दबाव कम करने की जरूरत”
नगर निगम का तर्क है कि यह इलाका शहर के मध्य भाग में आता है, जहां ट्रैफिक का दबाव बहुत अधिक है।
शाम के समय यहां जाम लगना आम बात है। ट्रैफिक पुलिस को कई बार यहां स्पेशल ड्यूटी टीमें लगानी पड़ती हैं।
निगम अधिकारियों के अनुसार, सड़क चौड़ी होने के बाद जाम की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी और नागरिकों को राहत मिलेगी।
हालांकि स्थानीय लोग इस तर्क को उचित नहीं मानते। उनका कहना है कि ट्रैफिक प्रबंधन और पार्किंग व्यवस्था में सुधार से भी इस समस्या का समाधान हो सकता है, बिना तोड़फोड़ के।
60 फीट चौड़ी सड़क पर सहमति की संभावना
कई रहवासी और व्यापारी 60 फीट तक सड़क चौड़ी करने पर सहमत हैं। उनका कहना है कि इससे ट्रैफिक भी सुधरेगा और उनका व्यवसाय भी पूरी तरह खत्म नहीं होगा।
शंकर नागवानी, जो इस क्षेत्र में कई वर्षों से रह रहे हैं, ने बताया —
“हमने महापौर से मुलाकात की है। उन्होंने माइक्रो सर्वे की बात कही है। अगर सड़क 60 फीट तक चौड़ी की जाती है तो अधिकतर लोग राजी हैं। लेकिन 79 फीट चौड़ी सड़क पूरे क्षेत्र को खत्म कर देगी।”
आंदोलन की तैयारी, समर्थन में बढ़ी भीड़
रहवासियों ने अब आंदोलन तेज करने की घोषणा की है। जिंसी चौराहे और आसपास के बाजारों में लगातार बैठकें और रैलियां आयोजित की जा रही हैं।
स्थानीय नेताओं, समाजसेवियों और व्यापारिक संगठनों ने भी रहवासियों का समर्थन किया है। उनका कहना है कि बिना मुआवजा दिए किसी का घर-दुकान तोड़ना कानूनन और नैतिक रूप से गलत है।
इतिहास और संस्कृति से जुड़ा क्षेत्र
जिंसी चौराहा न केवल एक व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र है, बल्कि यह इंदौर की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। यहां की कई इमारतें 19वीं सदी की वास्तुकला का उदाहरण हैं।
पुराने लकड़ी के खंभे, नक्काशीदार दरवाजे और पारंपरिक हवेलियां आज भी इस क्षेत्र की पुरातन पहचान बनाए हुए हैं।
रहवासियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण से इन ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व मिट जाएगा, जिससे शहर की संस्कृतिक विरासत को भी गहरी चोट पहुंचेगी।
अब क्या होगा आगे?
नगर निगम ने फिलहाल क्षेत्र का माइक्रो सर्वे कराने की बात कही है। इस सर्वे में यह देखा जाएगा कि कितनी इमारतें चौड़ीकरण में प्रभावित होंगी और किनका वैकल्पिक समाधान संभव है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी रहवासी या व्यापारी के साथ अन्याय नहीं होगा।
हालांकि, विरोध करने वाले नागरिकों का कहना है कि जब तक उन्हें लिखित रूप से मुआवजे और पुनर्वास की गारंटी नहीं मिलती, वे पीछे नहीं हटेंगे।
निष्कर्ष
जिंसी चौराहे का यह मामला विकास बनाम विरासत की बहस को फिर से जीवित कर रहा है।
एक ओर नगर निगम शहर को ट्रैफिक जाम से मुक्त और आधुनिक बनाना चाहता है, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों परिवार अपनी पुश्तैनी जमींदारी और आजीविका बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
देखना यह होगा कि प्रशासन इन दोनों के बीच ऐसा रास्ता निकाल पाता है या नहीं, जिससे विकास भी हो और इंदौर की ऐतिहासिक पहचान भी सुरक्षित रहे।
