IHRCT ने सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति को भेजा पत्र: सड़क कुत्तों और पशु देखभालकर्ताओं के संरक्षण की मांग
इंदौर, 10 नवम्बर 2025: भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट (IHRCT) ने आज माननीय मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया और माननीय राष्ट्रपति महोदया के नाम एक औपचारिक पत्र भेजा, जिसमें देश में सड़क कुत्तों और पशु देखभालकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा हेतु न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है। ट्रस्ट ने विशेष रूप से कानून के वैज्ञानिक और करुणामूलक दृष्टिकोण के पालन पर जोर दिया है।
पत्र में ट्रस्ट ने कहा कि हाल ही में पारित न्यायालयीय निर्णयों की गलत व्याख्या के कारण देशभर में पशु प्रेमियों और फीडर्स को प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके चलते सड़क कुत्तों के प्रति हिंसा, विस्थापन और अन्य अमानवीय कार्य बढ़ रहे हैं। IHRCT ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार और न्यायपालिका से कार्रवाई की मांग की है।
प्रमुख बिंदु:
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गलत न्यायालयीय व्याख्या: ट्रस्ट ने कहा कि हाल के निर्णयों की गलत व्याख्या के कारण पशु प्रेमियों और नागरिकों को गलत रूप से अपराधी मान लिया जा रहा है। यह न केवल संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है बल्कि मानवता के सिद्धांतों के भी विपरीत है।
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सड़क कुत्तों के प्रति बढ़ती हिंसा: ट्रस्ट ने सड़क कुत्तों के खिलाफ हिंसा और उनके अनियंत्रित विस्थापन की घटनाओं में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की है।
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संविधान में करुणा का दायित्व: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51(ग) में सभी नागरिकों को सभी जीवों के प्रति करुणा रखने का दायित्व प्रदान किया गया है। ट्रस्ट ने इस संवैधानिक प्रावधान के आधार पर न्यायपालिका से दखल देने का आग्रह किया।
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पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960: ट्रस्ट ने कहा कि इस अधिनियम के तहत सड़क कुत्तों को भोजन, आश्रय और चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध कराना कानूनी अधिकार के रूप में मान्यता प्राप्त है।
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ABC (Animal Birth Control) Rules का उल्लंघन: ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि डॉग रिलोकेशन (स्थानांतरण) ABC Rules के अंतर्गत अवैध है। बावजूद इसके देश के कई नगर निगम और स्थानीय प्रशासन इसका पालन नहीं कर रहे हैं।
IHRCT की मांगें:
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पशु प्रेमियों और फीडर्स की सुरक्षा: ट्रस्ट ने कहा कि जो नागरिक सड़क कुत्तों को भोजन और देखभाल प्रदान कर रहे हैं, उन्हें कानूनी सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए।
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वंध्याकरण और टीकाकरण कार्यक्रम: इन कार्यक्रमों को वैज्ञानिक, व्यवस्थित और दयाभाव आधारित तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
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करुणा-आधारित न्याय: ट्रस्ट ने न्यायपालिका से आग्रह किया कि संवैधानिक मूल्यों और करुणा के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए सड़क कुत्तों और उनके देखभालकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
पदाधिकारियों के संदेश:
राष्ट्रीय अध्यक्ष – सुनील सिंह यादव:
“भारत के सड़क कुत्ते हमारे समाज के सह-जीवी प्राणी हैं। उन्हें सुरक्षा, भोजन और जीवन का अधिकार है। न्यायपालिका और सरकार को करुणा, संविधान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए इन प्राणियों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। IHRCT इस विषय पर राष्ट्रव्यापी जागरूकता आंदोलन जारी रखेगा।”
युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष – कृष्णा यादव:
“देश का युवा वर्ग न्याय, मानवता और संवेदनशीलता में विश्वास रखता है। यदि समाज करुणाहीन हो गया, तो मानवता खो जाएगी। हम यह आवाज लगातार और रचनात्मक ढंग से उठाते रहेंगे।”
राष्ट्रीय सचिव – शिवम तिवारी:
“जागरूकता और संवेदनशीलता इस समस्या का समाधान है। संगठन सभी जिला एवं राज्य इकाइयों को नागरिक सहयोग एवं सूचना प्रसार पर कार्य तेज करने का निर्देश देता है।”
मीडिया प्रभारी – जीवनलाल जैन चाय वाले, भावेश नाहर, अनिल जैन, अंकित जैन, सुश्री सोना जैन:
“यह मुद्दा केवल पशु अधिकार का नहीं, बल्कि मानवता और संवैधानिक मूल्यों का है। मीडिया का दायित्व है कि वह तथ्य आधारित संवाद को सामने लाए।”
इंदौर जिला मंत्री – सुश्री स्वाति जैन:
“सड़क कुत्तों को भोजन कराने वाले नागरिकों को अपराधी की तरह देखना न केवल गलत है, बल्कि अमानवीय भी है। हम समाज में करुणा, दया और सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत करने के लिए प्रयासरत हैं।”
अन्य पदाधिकारी – मनीष गुप्ता, विनायक गुप्ता, युवराज सिंह राठौर, संतोष सिंह पवार, प्रेम कुमार वैद्य, श्रीमती अनीता दुबे, श्रीमती सौंपा चटर्जी, श्रीमती मधु शर्मा:
“यह आंदोलन प्रेम, सेवा, और जीव मात्र के प्रति करुणा पर आधारित है। हम इस आवाज को पूरे देश में संगठित रूप से उठाएंगे।”
निष्कर्ष:
IHRCT का यह पत्र देश में सड़क कुत्तों और पशु देखभालकर्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। ट्रस्ट का मानना है कि पशु संरक्षण, मानवता और संवैधानिक मूल्यों का पालन एक-दूसरे के पूरक हैं। उनका उद्देश्य है कि देश में करुणा, संवेदनशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के माध्यम से सभी जीवों के प्रति समान अधिकार और सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
सड़क कुत्तों के अधिकार, ABC Rules, और पशु देखभालकर्ताओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर यह कदम न्यायपालिका और सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि मानवता, संवेदनशीलता और करुणा को कानून और समाज में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
