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Indore MR-4 Road अधूरी, 10 साल में नहीं बनी 4 KM सड़क — सरकार की लापरवाही पर उठे सवाल, Singhast 2028 खतरे में

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Published On: 10 November 2025
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इंदौर की सड़कें: 10 साल में भी नहीं बन पाई सिर्फ 4 किलोमीटर की एमआर-4, अब सिंहस्थ 2028 से जुड़ी उम्मीदें

इंदौर, मध्य प्रदेश:
मध्य प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर देश के सबसे स्वच्छ और तेजी से विकसित होते शहरों में गिनी जाती है। लेकिन इस विकास के बीच एक सड़क पिछले 10 वर्षों से अधूरी पड़ी हैएमआर-4 (MR-4 Road)
सिर्फ चार किलोमीटर लंबी इस सड़क ने शहर की यातायात योजना को अधूरा बना दिया है। यह सड़क शहर के तीन रेलवे स्टेशनों और दो बस स्टेशनों को जोड़ने वाली “जीवन रेखा मार्ग” कही जा रही है। बावजूद इसके, इसका निर्माण वर्षों से अधर में लटका हुआ है।


2016 में शुरू हुआ था एमआर-4 रोड प्रोजेक्ट

Indore MR-4 Road Project की शुरुआत सिंहस्थ 2016 के समय की गई थी। उस वक्त इसे एक “महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट” माना गया था, जो इंदौर से उज्जैन जाने वाले ट्रैफिक को आसान बनाएगा।
इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) ने पहले चरण में इंदौर रेलवे स्टेशन से बाणगंगा रेलवे क्रॉसिंग तक दो लेन की सड़क बनाई थी। उस समय राज्य सरकार ने 12 करोड़ रुपये इस परियोजना के लिए स्वीकृत किए थे।
लेकिन उसके बाद से प्रोजेक्ट ठप पड़ा रहा।

अब जबकि सिंहस्थ 2028 उज्जैन में आयोजित होने जा रहा है, इस सड़क की अहमियत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। यही कारण है कि इंदौर नगर निगम ने अब इस परियोजना को फिर से शुरू करने की जिम्मेदारी ली है।


क्या है एमआर-4 रोड का रूट और महत्व?

एमआर-4 (Major Road-4) का मार्ग स्वदेशी मिल ब्रिज से शुरू होकर कुमेड़ी में बने नए अंतरराज्यीय बस स्टेशन (ISBT) तक जाता है।
यह सड़क सरवटे बस स्टेशन, ग्वालटोली रेलवे स्टेशन, पार्क रोड रेलवे स्टेशन, और लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन जैसे प्रमुख स्थानों को जोड़ती है।
इसके साथ ही यह बाणगंगा, भागीरथपुरा, श्याम नगर, गौरी नगर, खातीपुरा और सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र जैसे व्यावसायिक और आवासीय इलाकों को भी जोड़ती है।

🚍 इस सड़क के पूर्ण होने पर:

  • शहर के दो बड़े बस स्टेशन — सरवटे और ISBT — सीधे जुड़ जाएंगे।

  • तीन रेलवे स्टेशन — ग्वालटोली, पार्क रोड और लक्ष्मीबाई नगर — एक ही कॉरिडोर से कनेक्ट होंगे।

  • सुपर कॉरिडोर और मध्य शहर के बीच यात्रा का समय आधा हो जाएगा।

  • उज्जैन रोड ट्रैफिक का दबाव कम होगा।


50 हजार वाहनों का ट्रैफिक प्रतिदिन संभावित

एक आधिकारिक सर्वे के मुताबिक, एमआर-4 सड़क बनने के बाद प्रतिदिन 50,000 से अधिक वाहन इस मार्ग से गुजरेंगे।
वर्तमान में उज्जैन जाने वाले वाहन परदेशीपुरा, आईटीआई मार्ग और चंद्रगुप्त मौर्य चौराहा होकर जाते हैं, जिससे रोजाना जाम लगता है।
एमआर-4 के बनने से यह मार्ग सीधा और तेज़ विकल्प बनेगा।

शहर के उत्तरी हिस्से — जहाँ सुपर कॉरिडोर, नए मॉल, होटल और आवासीय प्रोजेक्ट बन रहे हैं — वहां की बढ़ती आबादी के कारण यह सड़क भविष्य की सबसे जरूरी कड़ी बन गई है।

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200 से ज्यादा बाधक निर्माण बने बड़ी रुकावट

सड़क निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती भागीरथपुरा बस्ती और उसके आसपास के 200 से ज्यादा निर्माण हैं।
इनमें औद्योगिक भवन, मकान और छोटे कारखाने शामिल हैं, जो सड़क की ज़मीन पर बने हुए हैं।

पिछले छह महीनों में नगर निगम ने छह उद्योगों के अवैध निर्माण हटाए हैं, जबकि चार अन्य फैक्ट्रियों को हटाना अभी बाकी है।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि जब तक इन बाधक निर्माणों को पूरी तरह हटाया नहीं जाता, तब तक सड़क का काम आगे नहीं बढ़ सकता।


अब 35 करोड़ में बनेगी एमआर-4 सड़क

इंदौर नगर निगम ने एमआर-4 सड़क के लिए अब 35 करोड़ रुपये का नया बजट मंजूर किया है।
सड़क निर्माण के टेंडर जारी हो चुके हैं और प्रशासन ने दावा किया है कि काम जल्द शुरू होगा।
दो महत्वपूर्ण रेलवे क्रॉसिंगों पर फ्लाईओवर ब्रिज का निर्माण भी साथ-साथ किया जा रहा है। इन्हें अगले डेढ़ साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, यदि भूमि और अवरोधक निर्माण समय पर हट गए तो यह सड़क 2027 तक पूरी हो सकती है, जिससे सिंहस्थ 2028 में इसका लाभ सीधे तौर पर मिलेगा।


विशेषज्ञों की राय

नागेश नामजोशी (शहर विकास विशेषज्ञ) कहते हैं —

“एमआर-4 सड़क शहर की कनेक्टिविटी के हिसाब से अत्यंत जरूरी है। यह मार्ग सुपर कॉरिडोर को मध्य शहर से जोड़ेगा। दस साल में यह सड़क बन जानी चाहिए थी। सिंहस्थ 2028 के समय यह सड़क ट्रैफिक के लिए जीवन रेखा साबित होगी।”

वहीं इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा —

“नगर निगम इस परियोजना को पूरी गंभीरता से ले रहा है। बाधक निर्माण हटाने की कार्रवाई जारी है। यह सड़क न सिर्फ सिंहस्थ बल्कि इंदौर की पर्यटन और परिवहन सुविधा के लिए बेहद अहम होगी।”


सिंहस्थ 2028 से पहले क्यों जरूरी है यह सड़क?

सिंहस्थ 2028 उज्जैन में होने वाला है और उस दौरान लाखों श्रद्धालु इंदौर से उज्जैन की ओर जाएंगे।
अभी जो मौजूदा मार्ग है, वह पहले से ही ट्रैफिक बोझ झेल रहा है।
एमआर-4 तैयार होने से:

  • इंदौर से उज्जैन की यात्रा में समय बचेगा।

  • शहर के भीतरी हिस्सों का ट्रैफिक कम होगा।

  • सार्वजनिक परिवहन और यात्रियों के लिए सुविधाजनक मार्ग मिलेगा।

यह सड़क पर्यटन, उद्योग और व्यापारिक गतिविधियों को नई दिशा देने में भी सहायक होगी।


अब आगे की योजना

  1. 200 से अधिक बाधक निर्माणों को हटाया जाएगा।

  2. दो रेलवे क्रॉसिंगों पर फ्लाईओवर का काम 2027 तक पूरा किया जाएगा।

  3. सड़क को डबल लेन से चार लेन में अपग्रेड करने की योजना है।

  4. मार्ग के किनारे स्मार्ट लाइटिंग और ड्रेनेज सिस्टम भी लगाया जाएगा।

  5. सड़क को सुपर कॉरिडोर से सीधे जोड़ने की दिशा में भी कार्य चल रहा है।


इंदौर के विकास में एमआर-4 की भूमिका

इंदौर शहर की लगातार बढ़ती आबादी और उद्योगों के विस्तार के साथ एमआर-4 रोड भविष्य की ट्रैफिक सेफ्टी बेल्ट के रूप में उभर सकती है।
यह सड़क शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से यातायात का बोझ हटाकर एक वैकल्पिक मार्ग देगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह सड़क समय पर बन गई तो यह इंदौर मास्टर प्लान 2041 का सबसे प्रभावशाली घटक साबित होगी।


निष्कर्ष

इंदौर की एमआर-4 सड़क परियोजना सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि शहर की भविष्य की कनेक्टिविटी का आधार है।
10 साल से अधूरा यह प्रोजेक्ट अब सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर फिर चर्चा में है।
नगर निगम और प्रशासन के लिए अब यह सिर्फ विकास नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा का सवाल भी बन चुका है।

अगर सभी बाधाएं समय पर दूर हो गईं, तो आने वाले दो वर्षों में एमआर-4 इंदौर के ट्रैफिक सिस्टम को नई दिशा देगी और शहर के विकास का नया अध्याय लिखेगी।

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