कार्तिक पूर्णिमा पर जैन समाज ने मनाया महापर्व – महिदपुर रोड पर भाव यात्रा, आरती व पुरस्कार वितरण
आज बुधवार को महिदपुर रोड के जैन समाज द्वारा कार्तिक पूर्णिमा महापर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस भावपूर्ण कार्यक्रम में प्रमुख जीवनदान-कार्यों, श्रावक-श्राविकाओं उनकी उपस्थिति व पुरस्कृत वितरण की श्रृंखला रही, जिससे जैन धर्मीय आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण निर्मित हुआ।
देवन्दन व आरती
दोपहर 2 बजे एक सामूहिक देवन्दन कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें समाज के श्रद्धालुओं ने मिलकर भगवन् आदि नाथ भगवान को अभिनंदन किया। इसके बाद 4:30 बजे से निकाली गई भाव यात्रा में श्रद्धालु परिवार-समूह सहित निकले और शत्रुंजय महा तीर्थ की याद में आरती का समापन किया गया। इस क्रम में गुरुदेव राजेंद्र सुरिश्वर जी की आरती की गई, जिससे परिसर “जय आदि नाथ” के जयकारों से गूंज उठा।
श्रावक-श्राविकाओं का पुरस्कार वितरण
आयोजन के उपरांत वर्ष भर सामायिक आने वाले 46 श्रावक-श्राविकाओं को विशेष रूप से पुरस्कृत किया गया। इसके अतिरिक्त, समाज सहयोगी परिवार-प्रमुख (प्रकाश चंद सागरमल बोहरा एवं डॉक्टर दिनेश कुमार अपूर्व यादव परिवार) की ओर से इन लाभार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए।
अतः स्थानीय विधायक दिनेश जैन बौस, रमेश चंद, राजेश कुमार, राहुल कुमार बोथरा परिवार आदि ने महिला, बहू, तरुण व बालिकाओं के लिए परिषदों को ₹11,000 राशि भेंट स्वरूप दी। साथ ही नियमित पाठशाला आने वाले बच्चों को भी पुरस्कार दिए गए।
साधार्मिक वात्सल्य कार्यक्रम
इस महापर्व के अवसर पर सकल जैन श्री संघ द्वारा एक साधार्मिक वात्सल्य (धार्मिक एवं सामाजिक मेल-जोल) का आयोजन भी किया गया। इस कार्यक्रम ने समाज के वरिष्ठ महानुभावों, नवयुवकों, महिलाओं, बालिकाओं सहित समस्त वर्गों को एक साथ आने का सुअवसर प्रदान किया।
मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी (जैन समाज) ने जानकारी देते हुए कहा कि यह आयोजन मात्र धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक एकता, पारिवारिक सहभागिता एवं आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।
कार्तिक पूर्णिमा व जैन धर्म में इसका महत्व
कार्तिक पूर्णिमा जैन धर्म में एक अत्यंत पवित्र दिवस है। जैन धर्मग्रंथ इस दिन को “स्वर्ण के समान” बताते हैं — क्योंकि यह आध्यात्मिक शुद्धि, तपस्या और मोक्ष-प्राप्ति का अवसर बन जाता है।
विशेष रूप से, चातुर्मास (चार माह का व्रत-काल) समाप्त होकर साधु-साध्वियों का विहार पुनः प्रारंभ होता है और साथ ही शत्रुंजय तीर्थ yatra पुनः आरंभ होती है।
जैन मान्यता के अनुसार, इस पर्व पर ले जाने वाली yatra द्वारा कर्म-शत्रुओं पर विजय-प्राप्ति का प्रतीक माना गया है।
इसके अतिरिक्त, यह दिन इसलिए भी विशेष है कि भगवन् आदि नाथ ने तीरथ स्तल को पवित्र किया, उपदेश दिया व हजारों साधुओं-साध्वियों ने मोक्ष-प्राप्ति की कथा जुड़ी है।
महिदपुर रोड पर कार्यक्रम के विशेष बिंदु
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मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी के अनुसार, कार्यक्रम का नेतृत्व स्थानीय जैन समाज ने किया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों (महिला, तरुण, बालिका परिषद्) के लिए पुरस्कृत-वितरण हुआ।
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विधायक दिनेश जैन बौस सहित प्रमुख समाजसदस्य उपस्थित रहे, जिससे आयोजन का सामाजिक प्रभाव और बढ़ा।
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कार्यक्रम में गुरु-देवाचार्य की आरती, सामूहिक देवन्दन, पुरस्कार वितरण एवं साधार्मिक वात्सल्य जैसी प्रगतिशील-धार्मिक गतिविधियाँ सम्मिलित रहीं।
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समाज-मंच द्वारा यह संदेश दिया गया कि धर्म सेवा, सामाजिक सहभागिता व आध्यात्मिक उन्नति एक साथ संभव है।
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भाव यात्रा का शुभारंभ दोपहर बाद हुआ, पूजन-आरती के माध्यम से श्रद्धालुओं ने स्वयं को पवित्रता की अनुभूति दी।
निष्कर्ष
इस प्रकार, महिदपुर रोड पर जैन समाज द्वारा आयोजित कार्तिक पूर्णिमा महापर्व न केवल धर्माधारित रहा, बल्कि सामाजिक सहभागिता, पुरस्कृत वितरण और आध्यात्मिक उत्सव का जीवंत उदाहरण बना। इस आयोजन ने यह दिखाया कि धार्मिक पर्व केवल पूजा-आराधना का माध्यम नहीं बल्कि समुदाय-उत्थान, नवयुवक-प्रोत्साहन और सामाजिक एकता का पटल भी हो सकते हैं।
इस अवसर पर “जय आदि नाथ” के जयकारों से गूंजा परिसर, और कार्यक्रम में शामिल सभी वर्गों – श्रावक-श्राविकाओं, बच्चों, युवा-प्रवर्ग, वरिष्ठ समाजसदस्यों – ने धर्म लाभ एवं प्रेरणा का अनुभव किया।


