—Advertisement—

परिषद स्थापना दिवस 2025: पुण्य सम्राट आचार्य राजेन्द्रसूरीश्वर जी महाराज के आशीर्वाद से जैन परिषद बनी गुरु स्वप्न की साकार प्रेरणा

Author Picture
Published On: 3 November 2025
WhatsApp Image 2025 11 03 at 7.08.36 AM 1

—Advertisement—

परिषद स्थापना दिवस पर पुण्य सम्राट का आलोकिक आशीर्वाद — गुरु स्वप्न का साकार रूप बनी परिषद

✍️ अर्चना जैन

“जहाँ परिषद का ध्वज लहराएगा, वहाँ धर्म का सूरज कभी ढलेगा नहीं।”

प्रातः स्मरणीय आचार्य श्री राजेन्द्रसूरीश्वर जी महाराज साहब


गुरुकृपा की छाँव में खिला संगठन का वटवृक्ष

आया, आया, आसमां के उस पार से पुण्य सम्राट का आलोकिक आशीर्वाद आया…
आज परिषद स्थापना दिवस के पावन अवसर पर संपूर्ण जैन समाज गुरुदेव श्री राजेन्द्रसूरीश्वर जी महाराज साहब की प्रेरणा को नमन कर रहा है।
परिषद — केवल एक संस्था नहीं, बल्कि गुरुदेव के स्वप्न का साकार रूप, समर्पण की शक्ति और धर्म सेवा की मिसाल है।

यतिंद्र गुरु ने जो पौधा बोया, उसे पुण्य सम्राट ने अपने आशीष से सींचा।
वर्षों की तपस्या और गुरुकृपा के संचार से वही पौधा आज धर्म, संगठन और समर्पण का विराट वटवृक्ष बन चुका है।


1959: मोहनखेड़ा की भूमि से प्रारंभ हुई यात्रा

सन 1959, मोहनखेड़ा की पवित्र भूमि पर जब नवयुवक परिषद की स्थापना हुई, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह दीप आगे चलकर इतना विराट प्रकाश फैलाएगा।
युवाओं के इस संगठन ने गुरु आज्ञा को जीवन का मंत्र बनाया और जिन शासन के प्रचार-प्रसार में नई ऊर्जा भरी।
आज वही दीपक युवाशक्ति के सूर्य के रूप में पूरी दुनिया में प्रकाश फैला रहा है।


1973: महिला परिषद ने जगाई नारीत्व की ज्योति

वर्ष 1973 में महिला परिषद के गठन ने जैन समाज की नारीशक्ति को नई पहचान दी।
संस्कार, सेवा और संवेदना को आधार बनाकर महिला परिषद ने नारीत्व की नई ज्योति जगाई।
धर्म कार्य, सेवा अभियान और गुरु आज्ञा पालन में महिलाओं की यह भूमिका आज समाज के हर क्षेत्र में प्रेरणा बन चुकी है।


1999: तरुण परिषद — भविष्य का उजाला

14 नवम्बर 1999, राजगढ़ — यही वह दिन था जब तरुण परिषद की स्थापना हुई।
गुरुदेव के स्वप्न ने भविष्य को दिशा दी, और भक्ति से भरे बाल मनों में विश्वास का दीप जला दिया।
तरुण परिषद आज उस नई पीढ़ी का प्रतीक है, जो धर्म के साथ-साथ आधुनिकता में भी संतुलन बनाकर चल रही है।


परिषद: गुरु की सांसों का संगीत

परिषद केवल एक संगठन नहीं — यह गुरुदेव की सांसों का संगीत है।
इसके हर कार्य में उनकी प्रेरणा है, हर अभियान में उनकी आराधना।
हर परिषद कार्यकर्ता, गुरु वचन का पालन और जिन शासन का उजियारा फैलाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है।

गुरुदेव का आशीर्वचन सदा मार्गदर्शन देता है —

“जहाँ परिषद का ध्वज लहराएगा, वहाँ धर्म का सूरज कभी ढलेगा नहीं।”


धर्म, सेवा और समर्पण का युगध्वज

परिषद स्थापना दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि गुरु आज्ञा पालन, सेवा भाव और त्याग की भावना का प्रतीक है।
हर परिषद सदस्य का लक्ष्य है —
भक्ति श्रृंगार बने, सेवा संस्कार बने, त्याग तेज बने, और गुरु आज्ञा ही परमार्थ बने।

आज परिषद का हर अभियान समाज में एकता, संस्कार और संगठन की नई मिसाल बन रहा है।
धर्म के प्रचार-प्रसार से लेकर सामाजिक सेवा, शिक्षा, पर्यावरण और संस्कृति तक — परिषद ने हर क्षेत्र में जिन शासन के उजियारे को फैलाया है।


युवाशक्ति, नारीशक्ति और बालसंस्कार — परिषद की त्रिवेणी

  • नवयुवक परिषद से युवा शक्ति का जोश

  • महिला परिषद से संवेदना और सेवा का भाव

  • तरुण परिषद से भविष्य की दिशा

  • बालिका परिषद से संस्कारों की नींव

इन सभी धाराओं से मिलकर परिषद आज जैन समाज की धड़कन और शक्ति बन चुकी है।


परिषद: गुरु का विस्तार, समाज का उद्धार

आज जब परिषद स्थापना दिवस मनाया जा रहा है, तो हर दिशा में एक ही स्वर गूंज रहा है —
“जय पुण्य सम्राट! जय गुरु आज्ञा! जय परिषद परिवार!”

परिषद सचमुच गुरु का विस्तार है —
उनकी दृष्टि का साकार रूप, युग की धड़कन और समाज का उद्धार है।
हर सदस्य के मन में यही संकल्प है कि —

“हमारा हर कार्य हो समर्पण की मिसाल,
हमारी हर सांस बने सेवा का ख्याल।”

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp