दिगंबर जैन तीर्थों के संरक्षण और संवर्धन में इंदौर जैन समाज की सक्रिय भागीदारी, जैन तीर्थ निर्देशिका गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज
इंदौर: देशभर में फैले दिगंबर जैन तीर्थ और मंदिर हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा हैं। इन्हें सुरक्षित रखना और उनका संवर्धन करना सिर्फ जैन समाज की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है। यही संदेश रविवार को रविंद्र नाट्यगृह में आयोजित दिगंबर जैन तीर्थ निर्देशिका के विमोचन समारोह में प्रमुख वक्ताओं ने दिया। इस अवसर पर निर्देशिका को गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया, जो जैन समाज के लिए गौरव का क्षण है।
तीर्थों के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि देशभर में फैले दिगंबर जैन तीर्थ और मंदिर जैनत्व की पहचान हैं। यदि ये तीर्थ संरक्षित नहीं रहेंगे तो जैन समाज की पहचान और अस्तित्व दोनों पर संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने समाज से अपील की कि वह अपने तन, मन और धन से तीर्थों के संरक्षण और संवर्धन में सहयोग करें।
इस अवसर पर भारत वर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जम्बूप्रसादजी जैन (गाजियाबाद) ने मुख्य अतिथि के रूप में भाषण देते हुए बताया कि तीर्थों का संरक्षण और संवर्धन योजनाबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक तीर्थ और मंदिर का मास्टर प्लान और डिजिटल रिकॉर्ड होना चाहिए, ताकि उनकी प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व सुरक्षित रह सके।
दिगंबर जैन तीर्थ निर्देशिका का गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम
समारोह में दिगंबर जैन तीर्थ निर्देशिका की एक लाखवीं प्रति के प्रकाशन और विमोचन का विशेष अवसर था। इसे गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। निर्देशिका का विमोचन वरिष्ठ समाजसेवी दंपत्ति श्री आजाद कुमार और श्रीमती रवि देवी जैन ने किया। इसके साथ ही डॉ. मनीष बिश्नोई, एशिया हेड, गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड, ने निर्देशिका प्रकाशन समिति के अध्यक्ष श्री हंसमुख गांधी, प्रधान संपादक डॉ अनुपम जैन, और कोषाध्यक्ष श्री सुभाष भाचावत को प्रमाणपत्र प्रदान किया।
इंदौर नगर निगम के महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव भी इस भव्य अवसर पर उपस्थित रहे। इस अवसर पर श्री गांधी ने बताया कि पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित यह निर्देशिका अब 12वें संस्करण में प्रवेश कर चुकी है। इस संस्करण की एक लाख प्रतियां प्रकाशित की गई हैं।
निर्देशिका का विवरण और उपयोग
इस 400 पेज की निर्देशिका में देशभर के 267 दिगंबर जैन तीर्थों का विस्तृत विवरण और तीर्थ यात्रियों के लिए आवश्यक जानकारी शामिल है। प्रत्येक तीर्थ का विवरण QR कोड के साथ दिया गया है, जिससे तीर्थ यात्रियों को डिजिटल माध्यम से भी जानकारी प्राप्त हो सकती है।
धार्मिक नेताओं ने भी इस अवसर पर शुभकामनाएँ दी। आचार्य विशुद्ध सागर जी, गणिनी आर्यिका ज्ञानमती माताजी, आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी, मुनि आदित्य सागर जी, और मुनि प्रणुतसागरजी ने वीडियो संदेश के माध्यम से दिगंबर जैन तीर्थ निर्देशिका के प्रकाशन और तीर्थों के संरक्षण के महत्व पर अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त की।
समाज की भागीदारी और जागरूकता
समारोह में समाज के विभिन्न प्रतिनिधि और वरिष्ठ समाजसेवी उपस्थित थे। इनमें इंदौर, मालवा और निर्माण क्षेत्र के जैन तीर्थों के अध्यक्ष, नगर में निवासरत जैन समाज की उपजातियों के सदस्य शामिल थे। प्रमुख उपस्थितियों में श्रीमती पुष्पा कासलीवाल, बहन सरिता दीदी, रॉकस्टार चिंतन बाकी वाला, श्री राजकुमार पाटोदी, मनोहर झांझरी, सुशील पांडया, डॉ. जैनेंद्र जैन, नरेंद्र वेद, अमित कासलीवाल, होलास सोनी, विजय लुहाडिया, संदीप (मौरिया), संजय पापड़ीवाल, डॉ जीवन प्रकाश जैन, जवाहरलाल जैन, जयकुमार जैन और अन्य समाजश्रेष्ठी शामिल थे।
राजेश जैन दद्दू ने बताया कि समाज की सक्रिय भागीदारी और जागरूकता से ही तीर्थों का संरक्षण और संवर्धन संभव है। उन्होंने कहा कि समाज को यह समझना चाहिए कि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है।
विमोचन समारोह की खासियत
समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसे श्री महेंद्र कुमार जैन बड़जात्या ने किया। वहीं, ध्वजारोहण श्री आर के जैन ने किया। कार्यक्रम के दौरान जैनेश झांझरी ने तीर्थों के सर्वेक्षण और उनकी डिजिटल रिकॉर्डिंग के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
इस अवसर पर दिगंबर जैन महा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक बड़जात्या ने भी वर्तमान समय में जैन तीर्थों और मंदिरों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर तीर्थ और मंदिर का मास्टर प्लान होना चाहिए, जिससे उनकी ऐतिहासिक प्राचीनता सुरक्षित रहे।
तीर्थ संरक्षण और डिजिटल रिकॉर्डिंग की पहल
समाज के वरिष्ठ नेता और तीर्थ क्षेत्र समिति ने बताया कि देशभर के दिगंबर जैन तीर्थों का सर्वेक्षण और डिजिटल रिकॉर्डिंग की योजना प्रारंभ की जा रही है। इससे तीर्थों का विवरण सुरक्षित रहेगा और भविष्य में उनकी देखरेख और संवर्धन में आसानी होगी।
राजेश जैन दद्दू ने कहा कि इस दिशा में समाज को भी सहयोग करना होगा। केवल सरकार या समिति के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समाज का जागरूक होना और वित्तीय, सामाजिक और तकनीकी सहायता प्रदान करना आवश्यक है।
निष्कर्ष
दिगंबर जैन तीर्थ और मंदिर हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन करना प्रत्येक जैन और समाजजन की जिम्मेदारी है। दिगंबर जैन तीर्थ निर्देशिका का गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
समाज को चाहिए कि वह तीर्थों की सुरक्षा, संवर्धन और विकास के लिए आगे आए। डिजिटल और पारंपरिक माध्यमों से तीर्थों का विवरण सुरक्षित करना, मास्टर प्लान बनाना, और समाज के प्रत्येक सदस्य का सहयोग सुनिश्चित करना ही इन पवित्र स्थलों को आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित रखने का रास्ता है।
दिगंबर जैन तीर्थों की सुरक्षा केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को बचाने का भी मार्ग है। इंदौर जैसे शहरों में आयोजित ऐसे कार्यक्रम समाज में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरक हैं और यह दिखाते हैं कि जैन समाज अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति कितना सजग है।


