देश भर में प्रभु सेवा-संयोजन के साथ 134वें अवतरण-दिवस पर विशिष्ट आयोजन
शनिवार, 1 नवम्बर 2025 (मुम्बई) – देश की विभिन्न स्थानों पर आचार्य देव श्रीमद् विजय तीर्थेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का 134वाँ अवतरण-दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। महाराष्ट्र की मायानगरी मुम्बई के कमाटीपुरा जैन संघ में आयोजित “गुणानुवाद सभा” सहित भक्ति-संगीत, स्नात्र महापूजन, जीव-दया-मानव-सेवा जैसे उत्कृष्ट कार्यों द्वारा यह दिवस विशेष रूप से यादगार बना।
देश भर से प्राप्त जानकारी अनुसार, उज्जैन-झाबुआ-मद्रास-बैंगलोर-बामनवाड़ी-विजयवाड़ा आदि स्थानों पर भी आचार्य देव जी की स्मृति सुदृढ़ करते हुए विविध धार्मिक-मानव-सेवापरक कार्यक्रम आयोजित हुए।
मुख्य कार्यक्रम स्थान एवं रुप-रेखा
मुम्बई में कमाटीपुरा जैन संघ के प्रांगण में विस्तृत प्रारूप में गुणानुवाद सभा और भक्ति-समारोह का आयोजन हुआ। आचार्य देव जी के प्रथम शिष्यरत्न आचार्य देव श्रीमद् विजय धनचंद्रसूरीश्वरजी म.सा. के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में मंत्र-भजन, पाठ-उपासना के साथ-साथ सामाजिक-सेवा-उपक्रमों पर भी जोर दिया गया।
कहीं स्नात्र-महापूजन हुआ, कहीं जिवदया-मानव-सेवा के तहत रक्तदान, वृद्धाश्रम-संबल, वस्तुदान इत्यादि कृत्यों का संचालन। परम-गुरू-भक्त आकाश बाफना (खरसोद कला) के अनुसार:
“देश भर में गुरूदेव का 134 वाँ अवतरण-दिवस, कहीं गुणानुवाद सभा हुई, कहीं भक्ति का आयोजन, कहीं स्नात्र महापूजन, कहीं पूजन, कहीं जिवदया, कहीं मानव सेवा, जैसे उत्कृष्ट कार्य का आयोजन हुआ।”
विशाल प्रसार एवं सामाजिक-संघटनात्मक अनुभूति
इस आयोजन का विशेष महत्व इसलिए भी रहा क्योंकि यह सिर्फ स्मृति-दिवस नहीं था, बल्कि आचार्य देव जी के आदर्शों को जीवन स्तर पर जीने और आगे ले जाने का अवसर था। मुम्बई-जैक्शन के साथ-साथ मध्य-प्रदेश (खरसोद कला, झाबुआ), गुजरात-मद्रास-बैंगलोर जैसे दूरस्थ स्थानों में सेवा-कार्य और धार्मिक-समारोह किये गए।
भक्ति, सेवा और संगठित आयोजन का संयोजन
गुणानुवाद सभा में आचार्य देव जी के जीवन-प्रतिष्ठित गुणों का वर्णन, उनके शिष्यों द्वारा भावपूर्णिनुकरण एवं संस्कार-प्रसार किया गया। भक्ति-संगीत एवं पाठ-उपासना ने जनसमूह को आध्यात्म-अनुभव से जोड़ने का कार्य किया। मानव-सेवा-उपक्रमों—विशेषकर जिवदया तथा सामाजिक संवेदनशीलता से प्रेरित कार्यक्रमों—ने आयोजन को एक सामाजिक-सांस्कृतिक महाप्रयास में बदल दिया।
भाव-उल्लास और भविष्य-दृष्टि
श्रीमद् विजय तीर्थेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के प्रथम शिष्यरत्न आचार्य देव श्रीमद् विजय धनचंद्रसूरीश्वरजी म.सा. की प्रेरणा-रेखा ने इस आयोजन को उत्सव-स्वरूप दिया। विशेषतः इस बात का अभिप्राय है कि “अवतरण-दिवस” केवल स्मरणोत्सव नहीं, बल्कि गुरुओं के आदर्शों का अक्षुण्ण प्रसार का माध्यम है।
प्रस्तावना एवं निष्कर्ष
इस प्रकार, 1 नवम्बर 2025 को मुम्बई में कमाटीपुरा जैन संघ द्वारा तथा देश के अन्य अनेक स्थानों पर आचार्य देव श्रीमद् विजय तीर्थेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के 134वें अवतरण-दिवस के अवसर पर गुणानुवाद सभा, भक्ति आयोजन, स्नात्र महापूजन, जिवदया-मानव-सेवा जैसे विविध कार्यक्रम बड़े हर्षोल्लास से सम्पन्न हुए। यह आयोजन सामाजिक-सांस्कृतिक और आध्यात्म-उन्नायक दोनों दृष्टियों से अहम रहा।
आने वाले वर्षों में भी ऐसे आयोजन-प्रयासों द्वारा आचार्य देव जी के आदर्शों को जीवन में निरंतर जीवंत बनाए रखने का संकल्प इसलिए प्रमुख होगा।



