गौम्मटगिरी में होगा 10 जैनेश्वरी दीक्षा समारोह का शुभारंभ – भावी दीक्षार्थियों की बिनोली आज शाम 6 बजे निकलेगी
इंदौर, 1 नवंबर 2025। जैन समाज के लिए यह सप्ताह अत्यंत आध्यात्मिक और उल्लासमय होने जा रहा है। तीर्थ क्षेत्र गौम्मटगिरी पर सारस्वत कवि, श्रमणाचार्य श्री 108 विभवसागर जी महाराज की स्वर्ण जयंती महोत्सव एवं आचार्य श्री संघ के मंगलमय सान्निध्य में आयोजित होने वाले 10 जैनेश्वरी दीक्षा समारोह के तहत आज शाम भव्य बिनोली शोभायात्रा निकाली जाएगी।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आज 1 नवंबर शनिवार शाम 6 बजे यह भव्य बिनोली गांधीनगर जैन मंदिर से प्रारंभ होकर तीर्थ क्षेत्र गौम्मटगिरी पहुंचेगी। इस शोभायात्रा में भावी दीक्षार्थियों का स्वागत एवं संयम जीवन के प्रति उनके दृढ़ संकल्प का अभिनंदन किया जाएगा।
बैंड, बाजे, बग्गी और भक्ति का समन्वय
यह बिनोली शोभायात्रा जैन समाज की एकता, आस्था और त्याग भावना का प्रतीक बनेगी। पूरे मार्ग में समाज के विभिन्न संगठनों की भागीदारी रहेगी। बैंड-बाजों, बग्गियों, झांकियों और आकर्षक लवाजमे के साथ यह यात्रा भक्ति और उल्लास के वातावरण में सम्पन्न होगी। समाज के वरिष्ठजन, महिला परिषद, महिला मंडल, महासमिति, सोशल ग्रुप फेडरेशन, सामाजिक सांसद और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि इसमें शामिल होकर भावी दीक्षार्थियों को संयम जीवन की शुभकामनाएं देंगे।
संयम जीवन की प्रेरणा
जैन धर्म में दीक्षा समारोह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, त्याग और तपस्या की ओर बढ़ाया गया महान कदम माना जाता है। भावी दीक्षार्थी सांसारिक मोह-माया का त्याग कर संयममय जीवन का आरंभ करेंगे। आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज के सान्निध्य में यह दीक्षा समारोह समाज में आध्यात्मिक ऊर्जा और सदाचार का संदेश फैलाएगा।
कार्यक्रम संयोजक और आयोजन समिति
कार्यक्रम के संयोजक आकाश पांड्या एवं शोभायात्रा प्रभारी सुरेन्द्र बाकलीवाल, जेनेश झांझरी, वीरेंद्र बड़जात्या, प्रवीण पाटनी ने समाज के सभी साधर्मी बंधुओं और श्रेष्ठिजनों से अनुरोध किया है कि वे इस दिव्य अवसर पर सपरिवार पधारकर दीक्षार्थियों के संयम पद की मंगल कामनाएं करें और कार्यक्रम की भव्यता में सहभागी बनें।
गौम्मटगिरी में उमड़ेगा आस्था का सागर
गौम्मटगिरी तीर्थ पर दीक्षा समारोह के दौरान हजारों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। आयोजन स्थल को आकर्षक रोशनी और पुष्प सज्जा से सजाया गया है। भक्ति संगीत, संयम वंदना और आचार्य श्री के प्रवचनों के बीच यह आयोजन आध्यात्मिक माहौल से भर जाएगा।
जैन समाज में उल्लास और गौरव का वातावरण
जैन समाज में दीक्षा को सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है, क्योंकि यह आत्मा की मुक्ति की ओर पहला कदम है। विभवसागर जी महाराज की स्वर्ण जयंती के अवसर पर यह समारोह समाज के लिए गौरवपूर्ण क्षण है। समाज के सभी संगठन इस आयोजन को ऐतिहासिक और प्रेरणादायी बनाने में जुटे हुए हैं।
राजेश जैन दद्दू ने कहा — “यह दीक्षा केवल दस व्यक्तियों का संयम प्रवेश नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के लिए आत्म-विकास और आध्यात्मिक चेतना का महोत्सव है। हम सभी को इस अवसर पर उपस्थित होकर भावी दीक्षार्थियों के त्याग और समर्पण को नमन करना चाहिए।”
