अणु दर्शन यात्रा में थांदला संघ ने किए गुरुदर्शन, चातुर्मास में आराधना का दौर जारी
✍️ संवाददाता, थांदला
थांदला। जैन धर्म के अनुयायियों के लिए प्रेरणादायी अध्यात्मिक यात्रा ‘अणु दर्शन यात्रा’ के अंतर्गत थांदला श्रीसंघ के प्रतिनिधि मंडल ने पूज्य गुरुदेव श्री गुलाबमुनिजी, कैलाशमुनिजी आदि ठाणा-3 तथा पूज्य पंडित रत्न श्री पंकजमुनिजी आदि ठाणा-4 सहित साध्वीवृंद के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त किया। संघ ने गुरुदर्शन के साथ जिनवाणी श्रवण करते हुए मांगलिक का लाभ लिया और शेषकाल में थांदला पधारने की विनम्र विनंति की।
थांदला संघ का प्रतिनिधि मंडल पहुँचा इंदौर व खरगौन
थांदला संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया के नेतृत्व में निकले प्रतिनिधि मंडल में पूर्वाध्यक्ष रमेशचंद्र चौधरी, महेश व्होरा, भरत भंसाली, कोषाध्यक्ष रजनीकांत शाहजी, वीर पिता अशोक मोदी, वर्षीतप आराधक सूरजमल श्रीमाल, पवन नाहर, वरिष्ठ सदस्य सन्तोष चपलौद, अशोक तलेरा, सुरेशचंद्र चौधरी, कमलेश तलेरा, विमल चौधरी व धर्मेश छाजेड़ सहित कई श्रावक उपस्थित रहे।
संघ ने इंदौर विराजित पूज्य गुरुदेव श्री गुलाबमुनिजी, कैलाशमुनिजी आदि ठाणा-3 एवं खरगौन विराजित पूज्य गुरुदेव पंकजमुनिजी आदि ठाणा-4 के दर्शन कर गुरुदेवों से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने सकल संघ की ओर से सामूहिक क्षमायाचना करते हुए शेषकाल में थांदला पधारने की विनंति रखी।
गुरुदेवों का प्रेरक संदेश
पूज्य गुलाबमुनिजी ने संघजनों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वर्तमान में उनका विहार निमाड़ होते हुए महाराष्ट्र की ओर संभावित है, परंतु जब भी अवसर मिलेगा, थांदला स्पर्शना के साथ चातुर्मास के भाव अवश्य रखे जाएंगे। उन्होंने कहा कि थांदला संघ की एकता और धर्म के प्रति समर्पण अनुकरणीय है।
पूज्य पंकजमुनिजी ने कहा कि संत सानिध्य प्राप्त होना महान योग है, और थांदला जैसे पुण्यस्थल के श्रावक सौभाग्यशाली हैं। उन्होंने संघजनों से कहा कि जहाँ भी संत-सती पधारें, वहाँ की पर्युपासना का अधिकाधिक लाभ लेने की भावना सभी में रहनी चाहिए।
इस अवसर पर पूज्य कैलाशमुनिजी व निशांतमुनिजी ने भी धर्म-संदेश देते हुए कहा कि जैन धर्म का सार तप, त्याग और करुणा में निहित है। संतों के सानिध्य से आत्मशुद्धि और भाव-सुधार की प्रेरणा मिलती है।
संघ का आत्मिक सत्कार एवं साधर्मी सेवा
अणु दर्शन यात्रा के दौरान दोनों ही स्थानों पर थांदला संघ के प्रतिनिधियों का आत्मिक स्वागत किया गया। इंदौर के गुप्त लाभार्थी परिवार और खरगौन के पटवा परिवार ने साधर्मी भोजन का लाभ लिया। थांदला संघजनों ने थांदला की बेटी तोषी के घर भी पहुँचकर आत्मीय मुलाकात की, जहाँ भावेश पाठक और परिजनों ने सभी का चाय-नाश्ते से सत्कार किया।
एकासन की पचरंगी पूर्ण — आराधना का नया आयाम
थांदला चातुर्मास के अंतिम चरण में जैन आराधना की अनुपम झलक देखने को मिल रही है। जिन शासन गौरव पूज्य श्री उमेशमुनिजी की कृपा और प्रवर्तक पूज्य श्री जिनेन्द्रमुनिजी की आज्ञानुवर्ती महासती पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा-4 के पावन सानिध्य में थांदला में एकासन की पचरंगी पूर्ण हुई।
संघ प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि महासती श्री निखिलशीलाजी की प्रेरणा से लगभग 40 श्रावक-श्राविकाओं ने क्रमशः पाँच से एक-एकासन तक तप की आराधना की। यह जैन धर्म के तप-प्रधान सिद्धांतों का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
लघु सर्वतोभद्र तप का शुभारंभ
उन्होंने बताया कि अब कल से ‘स्नान का लघु सर्वतोभद्र तप’ आरंभ हो रहा है, जिसमें भाग लेने वाले आराधक लगभग 100 दिनों में 75 से अधिक दिनों तक बड़े स्नान का त्याग करते हुए अपकाय जीवों की रक्षा करेंगे। इससे पूर्व भी अनेक आराधक सामायिक से लेकर लघु सर्वतोभद्र तक की साधना कर चुके हैं।
संघ प्रवक्ता ने बताया कि थांदला का यह चातुर्मास संपूर्ण क्षेत्र में प्रेरणास्रोत बना हुआ है। संत-सती के सानिध्य में हो रही यह आराधना आत्म-उन्नति और धर्म-प्रेम का जीवंत उदाहरण है।
जैन धर्म के प्रति समर्पण का प्रतीक
अणु दर्शन यात्रा और चातुर्मास की आराधना, दोनों ही कार्यक्रम थांदला जैन समाज की धर्मनिष्ठा और गुरुभक्ति का प्रमाण हैं। पूज्य गुरुदेवों के दर्शन और आशीर्वाद से प्रेरित संघजन अब आगामी दिनों में भी तप-त्याग और सेवा-कार्य में सक्रिय रहेंगे।
थांदला संघ के ये प्रयास न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि सम्पूर्ण जैन समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हैं — जहाँ श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति का संगम ‘अणु दर्शन यात्रा’ के रूप में देखने को मिलता है।
