परम पूज्य आचार्यश्री चैत्य सागर जी महाराज ने पारस जैन “पार्श्वमणि” को दिया मंगल आशीर्वाद
आगरा, उत्तर प्रदेश: धर्म प्राण नगरी आगरा में परम पूज्य आचार्यश्री चैत्य सागर जी महाराज ने राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार कोटा को प्रसन्नचित मुद्रा में विशेष मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर आचार्यश्री ने पारस जैन के द्वारा पिछले 35 वर्षों में किए गए जैन धर्म प्रचार प्रसार और धार्मिक कवरेज की समीक्षा की और उन्हें सराहा।
आचार्यश्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पारस जैन का योगदान संपूर्ण भारत में जैन धर्म के प्रचार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे शिक्षा संस्थानों के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाना चाहिए। आचार्यश्री ने अपने हाथों को शिर और पीठ पर रखकर उन्हें तीन बार आशीर्वाद दिया और कहा कि “इसके लिए आप पूरा प्रयास करें और पूरी ताकत लगाएं।”
इस मौके पर अ. भा. जैन पत्रकार संपादक संघ के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन (आगरा), महामंत्री अखिल बंसल (जयपुर), अजितकुमार जैन पवई, डॉ. श्रीमती मीना जैन (उदयपुर), डॉ. ज्योति जैन (खतौली), कल्पना जैन (नोएडा), भरत सेठ घुवारा, जयेंद्र जैन निप्पू चंदेरी, जीवन लाल जैन (नागदा), हुकम गोधा (आगरा) सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
आचार्यश्री ने सभी पत्रकार बंधुओं को वात्सल्य मूर्ति संत शिरोमणि विमलसागर जी महाराज की जन्मस्थली कोसमा (जिला एटा) दर्शनार्थ भेजा। कोसमा में भव्य जैन मंदिर निर्माण कार्य द्रुत गति से चल रहा है, जहां विशाल पंच कल्याणक समारोह का आयोजन जल्द ही प्रस्तावित है। मंदिर परिसर में धर्मशाला और मानव सेवा हेतु चिकित्सालय भी संचालित है, जिसमें लगभग 40 डॉक्टर विभिन्न बीमारियों का इलाज करते हैं।
कोसमा में 1008 श्री नेमीनाथ भगवान का प्राचीन मंदिर भी स्थित है, जहां की छोटी सी मनोहारी मूर्ति मात्र के दर्शन से भी अंतर्मन में दिव्य शांति का अनुभव होता है। इसी परिसर में आचार्यश्री 108 विमलसागर जी महाराज की भव्य मूर्ति स्थापित है। मंदिर में शिव-पार्वती लिंग, हनुमान जी और देवी अम्बा जी की मूर्तियां भी दर्शनीय हैं।
कोसमा कस्बे की आबादी लगभग 3,500 है, परंतु यहाँ एक भी जैन परिवार नहीं होने के बावजूद इतने बड़े धार्मिक और सामाजिक कार्य चल रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से परम पूज्य आचार्य विमलसागर जी महाराज के अदृश्य आशीर्वाद का फल है।
इस अवसर पर सुप्रसिद्ध भजन गायक रविंद्र जैन जी द्वारा गाया गया भजन भी कार्यक्रम का हिस्सा रहा, जो धार्मिक वातावरण को और अधिक भावपूर्ण बना गया।
इस आयोजन से न केवल जैन धर्म प्रचार को बल मिला, बल्कि पूरे भारत में धार्मिक और सामाजिक चेतना को भी एक नई दिशा मिली। पारस जैन “पार्श्वमणि” के माध्यम से जैन धर्म और मानव सेवा कार्यों का यह कवरेज मीडिया में भी व्यापक रूप से प्रकाशित हुआ।
