PTM में बच्चों के मूल्यांकन का सही अर्थ: ग्रेड से ऊपर है प्यार और समझ
(लेखक: डॉ. सुरेन्द्र मीणा, संवाददाता जीवन लाल जैन नागदा की रिपोर्ट)
स्कूल का माहौल उस दिन कुछ खास होता है जब पूरे परिसर में पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग (PTM) की चहल-पहल नजर आती है। बिना स्कूल बैग के, अपने माता-पिता का हाथ थामे बच्चे जब मुस्कुराते हुए अपनी कक्षाओं की ओर बढ़ते हैं, तो वातावरण में उत्सुकता और भावनाओं का एक अद्भुत मिश्रण दिखाई देता है।
क्लासरूम के अंदर टीचर्स, पैरेंट्स और बच्चे – तीनों एक ही फ्रेम में होते हैं। टीचर एक-एक करके हर अभिभावक से संवाद करते हैं। कभी तारीफ, कभी शिकायत और कभी सुझावों के बीच एक अनोखी पारदर्शिता झलकती है। बच्चे मासूम निगाहों से टीचर और पैरेंट्स की बातचीत सुनते रहते हैं — जैसे अपनी ही कहानी किसी और के मुंह से सुन रहे हों।
रिपोर्ट कार्ड की सच्चाई: ग्रेड्स बनाम भावनाएँ
जब रिपोर्ट कार्ड हाथ में आता है —
हिंदी में A ग्रेड,
इंग्लिश में B,
मैथ्स में C,
सोशल साइंस में D,
और साइंस में E ग्रेड।
यह दृश्य लगभग हर क्लासरूम में देखने को मिलता है। पैरेंट्स के चेहरे पर कई भाव एक साथ उभर आते हैं — चिंता, गर्व, उलझन और कभी-कभी असंतोष। कुछ माता-पिता बच्चे को गले लगा लेते हैं, जबकि कुछ की भौंहें तन जाती हैं और वे दूसरे बच्चों से तुलना करने लगते हैं।
पर सवाल यह है —
क्या बच्चे का मूल्यांकन सिर्फ ग्रेड्स से किया जा सकता है?
क्या एक रिपोर्ट कार्ड किसी बच्चे की पूरी क्षमताओं, उसकी मेहनत या उसकी भावनात्मक प्रगति को माप सकता है?
पेरेंट्स और आत्ममूल्यांकन की जरूरत
हर PTM के बाद जब अभिभावक घर लौटते हैं, तो वे अक्सर यही सोचते हैं कि बच्चे का परफॉरमेंस क्यों गिर गया। लेकिन शायद ही कभी वे यह सोचते हैं कि बच्चे की गिरती ग्रेड्स के पीछे क्या वे खुद भी एक कारण हो सकते हैं?
क्या हमने अभिभावक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का पूरा निर्वहन किया है?
क्या हमने कभी PTM के अलावा टीचर से बच्चे की प्रगति पर चर्चा की है?
क्या हमने अपने बच्चे को समय दिया है, उसकी जिज्ञासाओं को सुना है, उसके साथ बैठकर पढ़ाई को मजेदार बनाया है?
बच्चे का परफॉरमेंस सिर्फ क्लासरूम से नहीं, बल्कि घर के माहौल से भी जुड़ा होता है। अगर घर में संवाद और स्नेह की कमी है, तो बच्चा पढ़ाई में पिछड़ सकता है।
तुलना नहीं, प्रेरणा की जरूरत
अक्सर देखा जाता है कि रिपोर्ट कार्ड में जब कोई विषय कमजोर आता है, तो माता-पिता की पहली प्रतिक्रिया होती है — डांटना या तुलना करना। “देखो, शर्मा जी का बेटा तो A लाया है!” — यह वाक्य शायद हर बच्चे ने कभी न कभी सुना होगा।
लेकिन क्या यह तुलना उसे बेहतर बना देती है? नहीं। बल्कि यह उसके आत्मविश्वास को तोड़ देती है।
हर बच्चा अलग है, उसकी सीखने की गति अलग है, उसकी रुचियाँ अलग हैं। कोई गणित में अच्छा है, तो कोई संगीत में, कोई चित्रकला में, तो कोई खेलों में।
बच्चों को उनकी क्षमताओं के आधार पर समझना और उन्हें उसी दिशा में प्रोत्साहित करना ही वास्तविक पेरेंटिंग है।
बच्चों को सजा नहीं, संबल दीजिए
अगर ग्रेड्स उम्मीद से कम आए हैं, तो उस पर गुस्सा करने के बजाय बच्चे का हाथ थामिए।
उसे यह एहसास कराइए कि ग्रेड्स जीवन की मंज़िल नहीं, बल्कि एक पड़ाव हैं।
बच्चे की मेहनत की तारीफ कीजिए, उसके छोटे-छोटे सुधारों को नोटिस कीजिए।
कभी-कभी एक प्यार भरी झप्पी, एक सच्चा प्रोत्साहन और एक मुस्कुराता चेहरा — किसी बच्चे के लिए सबसे बड़ा मोटिवेशन होता है।
याद कीजिए अपना बचपन
हर अभिभावक को एक पल के लिए अपना बचपन याद करना चाहिए।
क्या तब आपके ग्रेड्स हमेशा अच्छे थे?
क्या तब आपके माता-पिता ने हर गलती पर डांट लगाई थी, या कुछ मौकों पर आपका हौसला बढ़ाया था?
शायद तब की परिस्थितियाँ अलग थीं, लेकिन भावनाएँ वही थीं — समझ और स्नेह की।
आज जब आपके बच्चे आपके पास हैं, तो उन्हें वही भरोसा दीजिए जो आपको कभी मिला था या जो आप पाना चाहते थे।
सकारात्मक PTM: बदलाव की शुरुआत
PTM केवल बच्चों की प्रगति का रिपोर्ट देने का मंच नहीं होना चाहिए, बल्कि एक “साझा संवाद” का अवसर होना चाहिए —
जहां टीचर बच्चे की ताकत और कमियों पर खुले मन से बात करें,
और अभिभावक समाधान के लिए साथ मिलकर कदम बढ़ाएं।
अगर स्कूल और घर मिलकर बच्चे के लिए सहयोगी माहौल बनाएँगे, तो निश्चित ही उसका प्रदर्शन बेहतर होगा।
निष्कर्ष: प्यार ही असली प्रेरणा है
बच्चे को झिड़कने या डराने से नहीं, बल्कि उसे अपनाने और समझने से सुधार आता है।
हर रिपोर्ट कार्ड के पीछे मेहनत की एक कहानी होती है — उसे पहचानिए।
हर कम ग्रेड एक अवसर है — उसे सुधारने का, सीखने का, और आगे बढ़ने का।
इसलिए, जब अगली बार आप PTM में जाएँ, तो ग्रेड्स की जगह बच्चे की मुस्कान पर ध्यान दीजिए।
उसे प्यार कीजिए, दुलार दीजिए, और सच्चे मन से प्रेरित कीजिए।
बस, यही आपका स्नेह और हौसला उसके लिए सबसे बड़ी पूंजी है —
जो उसे जीवनभर आगे बढ़ने की ताकत देगा।
