गोवर्धन पर्व 2025: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रकृति से सह-अस्तित्व और समग्र विकास का संदेश
भोपाल: दीपावली की रोशनी के साथ ही मध्यप्रदेश में एक और महत्वपूर्ण पर्व आ जाता है — गोवर्धन पूजन। यह पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि प्रकृति, गौ-वंश, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण-संरक्षण के प्रति भारतीय दृष्टिकोण का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि गोवर्धन पर्व प्रकृति से सह-अस्तित्व और समग्र विकास का उत्सव है, जो हमें पर्यावरण, पशुधन और मानव जीवन के संतुलन की प्रेरणा देता है।
🌿 पर्व का प्रतीक और पौराणिक अर्थ
गोवर्धन पर्व उस ऐतिहासिक घटना का प्रतीक है जब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों और उनके गौ-धन की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था। यह कथा हमें सिखाती है कि मानव और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह पर्व हमें याद दिलाता है कि पर्वत, जल, पशु और मनुष्य का संतुलन ही सतत विकास की नींव है।
🌾 मध्यप्रदेश में गोवर्धन पर्व का समग्र दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार गोवर्धन पर्व को ग्रामीण विकास, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ रही है। प्रदेश के सभी जिलों में लोक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और गौ-संवर्धन योजनाओं से यह पर्व मनाया जा रहा है।
इस दौरान पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नवाचार करने वाले उद्यमियों को सम्मानित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा —
“हमारी परंपराएँ केवल पूजन नहीं, बल्कि पर्यावरण-जागरूकता और आर्थिक आत्मनिर्भरता की प्रेरणा हैं।”
📈 मुख्य योजनाएँ और उपलब्धियाँ
मध्यप्रदेश सरकार ने गौ-वंश संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर ग्राम्य समृद्धि की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं।
- गौ-शालाओं का सशक्तिकरण:
सरकार ने गौ-शालाओं को मिलने वाले अनुदान को ₹20 से बढ़ाकर ₹40 प्रति गौ-वंश प्रति दिन किया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि यह निर्णय न केवल गौ-धन की देखभाल में सहायक है, बल्कि ग्रामीण रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। - बजट में ऐतिहासिक वृद्धि:
गौ-संवर्धन हेतु बजट ₹90 करोड़ से बढ़ाकर ₹250 करोड़ किया गया है और लक्ष्य ₹600 करोड़ तक पहुंचाने का है। - दुग्ध उत्पादन मिशन:
“दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान” के अंतर्गत गांव-गांव में पशुपालकों को नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण और पशु पोषण की तकनीकी जानकारी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का लक्ष्य देश के दुग्ध उत्पादन में 9% से बढ़कर 20% योगदान देना है। - नवीन गौ-शालाओं का निर्माण:
राज्य में वर्तमान में 2,900 गौ-शालाएँ हैं, जिनमें से 2,203 मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना के अंतर्गत संचालित हैं।
केवल एक वर्ष में 1,000 से अधिक नई गौ-शालाएँ प्रारंभ की गई हैं। - विशेष उदाहरण:
भोपाल में 69.18 एकड़ भूमि पर 10,000 गौ-वंश क्षमता वाली आधुनिक गौ-शाला का निर्माण हो रहा है।
ग्वालियर में देश की पहली आत्मनिर्भर गौ-शाला में Compressed Biogas Plant स्थापित किया गया है, जिससे गोबर से CNG उत्पादन हो रहा है।
🐄 गौ-वंश: ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि गौ-माता केवल श्रद्धा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मूल आधार हैं।
राज्य में गौ-संवर्धन को महिला आत्मनिर्भरता से जोड़ा गया है। दूध, गोबर और गौ-उत्पादों से महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि मध्यप्रदेश को देश का “दुग्ध कैपिटल” बनाया जाए।
🌏 पर्यावरणीय दृष्टि और प्रकृति-संरक्षण
गोवर्धन पर्व हमें सिखाता है कि पर्वत, नदी, गाय और मनुष्य का संबंध पर्यावरण संतुलन का आधार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “पर्वत जल संरक्षण और ऋतु संतुलन के प्रतीक हैं; गौ-वंश जैविक कृषि और ऊर्जा उत्पादन के साधन हैं।”
प्रदेश में गोबर से बायोगैस और जैविक खाद उत्पादन की दिशा में भी नवाचार हो रहे हैं।
🎉 सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश
गोवर्धन पर्व ग्रामीण संस्कृति और लोक परंपरा का जीवंत उत्सव है।
गांवों में गोबर से पर्वत बनाकर उसकी पूजा की जाती है — यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चा विकास तभी संभव है जब प्रकृति, पशु और मानव के बीच संतुलन बना रहे।
🌺 निष्कर्ष: आत्मनिर्भर और हरित मध्यप्रदेश का संकल्प
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गोवर्धन पर्व पर प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि —
“हम सब मिलकर प्रकृति-संरक्षण, गौ-वंश संवर्धन और पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प लें।
यह पर्व हमें आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण की दिशा में प्रेरित करता है।”
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की समृद्धि, आत्मनिर्भरता और सतत विकास पर्वतों, गौ-वंश और पर्यावरण के संरक्षण से जुड़ा है।
गोवर्धन पर्व के माध्यम से प्रदेश सरकार यह संदेश दे रही है कि सांस्कृतिक परंपराएँ ही आधुनिक विकास का आधार बन सकती हैं।
