नरक चतुर्दशी 2025: चंबल तट पर पितृ तर्पण, दीपयज्ञ और यमदीप दान का गरिमामय आयोजन
नागदा, 19 अक्टूबर 2025 – कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, जिसे सामान्यतः नरक चतुर्दशी या यम चतुर्दशी कहा जाता है, के पावन अवसर पर नगर के चंबल तट पर एक विशेष पितृ तर्पण और दीपयज्ञ अनुष्ठान संपन्न हुआ। यह आयोजन सहस्त्र औदीच्य ब्राह्मण समाज युवा संगठन एवं ब्राह्मण समाज युवा संस्कार परिवार की ओर से पांचवें वर्ष लगातार किया गया।
आयोजन की शुरुआत प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में हुई और इसमें नगर के सैकड़ों श्रद्धालु, समाज के वरिष्ठजन और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। श्री मुक्तेश्वर महादेव मंदिर परिसर, चंबल तट पर स्थित, इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए मुख्य स्थल बना।
वैदिक रीति से संपन्न हुआ पवित्र अनुष्ठान
कार्यक्रम का संचालन आचार्य पंडित अजय पंड्या एवं पंडित दीपक पंड्या के सान्निध्य में किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ, श्रद्धालुओं ने पितृ तर्पण, यमदीप दान, दीपयज्ञ और श्राद्ध अनुष्ठान में भाग लिया। पितरों की शांति और आत्मशुद्धि की कामना के साथ, श्रद्धालुओं ने चंबल तट पर दीपदान किया।
पंडित निलेश मेहता, जो इस आयोजन के संयोजक हैं, ने बताया कि यह अनुष्ठान पांच वर्षों से निरंतर चल रहा है। उनका कहना था कि इसका मुख्य उद्देश्य पितृ शांति, समाज में वैदिक परंपराओं का संवर्धन और नई पीढ़ी में संस्कार एवं श्रद्धा का संचार करना है।
सामूहिक दीपयज्ञ और यमदीप दान
अनुष्ठान में सामूहिक दीपयज्ञ और यमदीप दान को विशेष महत्व दिया गया। यमदीप दान के माध्यम से श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और उनके आत्मशांति के लिए दीप प्रज्वलित किए। इस अवसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर दीपदान और आतिशबाजी कर छोटी दिवाली की खुशियाँ मनाई।
सहस्त्र औदीच्य ब्राह्मण समाज अध्यक्ष डॉ. रावल ने कहा, “ऐसे आयोजनों से हमारी सनातन संस्कृति का संरक्षण होता है। इससे समाज में धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का प्रचार होता है और नई पीढ़ी में श्रद्धा एवं संस्कार का संचार होता है।”
नगरवासियों की सक्रिय सहभागिता
नागदा के श्रद्धालुजन, वरिष्ठ नागरिक और समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने इस अनुष्ठान में सक्रिय भागीदारी दिखाई। पितृ तर्पण और यमदीप दान के दौरान वैदिक मंत्रों की ध्वनि से पूरा चंबल तट मंत्रमुग्ध हो गया। सभी ने मिलकर पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की और समाज में शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की।
इस अवसर पर विशेष कथा वाचन और दर्पण पिंडदान कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने घर में लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक आरती और देव दीपावली के दौरान आतिशबाजी के साथ हुआ, जिसने आयोजन को और भी यादगार बना दिया।
पांच वर्षों से निरंतर चल रहा आयोजन
सहस्त्र औदीच्य ब्राह्मण समाज युवा संगठन एवं ब्राह्मण समाज युवा संस्कार परिवार इस अनुष्ठान को पाँच वर्षों से निरंतर आयोजित कर रहे हैं। इसका उद्देश्य न केवल पितृ शांति और आत्मशुद्धि करना है, बल्कि वैदिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाना और समाज में धार्मिक संस्कारों को जीवंत रखना है।
डॉ. रावल ने आगे कहा, “इस आयोजन के माध्यम से हम समाज में संस्कार, श्रद्धा और धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा दे रहे हैं। यह कार्यक्रम हमारी संस्कृति और परंपराओं के प्रति लोगों की भक्ति और श्रद्धा को प्रकट करने का अवसर प्रदान करता है।”
कार्यक्रम का विशेष महत्व
नरक चतुर्दशी या यम चतुर्दशी का यह पर्व, अंधकार पर प्रकाश की विजय और पितरों की शांति का प्रतीक है। चंबल तट पर यह पवित्र अनुष्ठान, वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित हुआ और नगरवासियों में इसे लेकर गहरी आस्था और श्रद्धा का भाव देखा गया।
इस अवसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर दीपदान और यमदीप दान किया, जो छोटी दिवाली के रूप में मनाई जाती है। साथ ही, आतिशबाजी और सामूहिक आरती ने धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव को और भी भव्य बनाया।
