पाँच दिवसीय दीपोत्सव मेले का शुभारंभ — चित्रकूट में श्रद्धालुओं का विशाल आस्था-समूह
मुख्यमंत्री मोहन यादव आज करेंगे कामदगिरी परिक्रमा
सतना (एम् पी) – प्राचीन पवित्र तीर्थस्थल चित्रकूट में आज से पाँच दिवसीय दीपोत्सव मेला का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। पहले ही दिन लगभग ८ लाख से अधिक श्रद्धालु मां मंदाकिनी के तटों पर पहुँचे और श्री कामदगिरि की परिक्रमा में भाग लिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव भी उपस्थित होकर कामदगिरी की परिक्रमा करेंगे और आस्था-समारोह की गरिमा को बढ़ाएंगे।
मेले का आयोजन और आस्था का संगम
उल्लेखनीय है कि चित्रकूट धाम में मां मंदाकिनी नदी के घाटों तथा कामदगिरि पर्वत पर बसे मत्यगजेंद्रनाथ की बेला पर श्रद्धालुओं की उपस्थिति पहली दिन से ही अभूतपूर्व रही। आयोजन समिति ने बताया कि पहले दिन आठ लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे।
आगामी देर-रात्रि तथा अगले चार-पांच दिनों में यह संख्या लगभग ५० लाख तक पहुँचने की उम्मीद है — जहाँ श्रद्धालु जलाभिषेक, दीपदान और कामदगिरि परिक्रमा में भाग लेंगे।
घाट पर सुबह से ही भक्तों की लहर चल पड़ी थी, परिक्रमा पथ पर साफ-सफाई, पेयजल एवं प्रकाश-व्यवस्था विशेष रूप से व्यवस्थित की गई थी। घाटों-पर पूरी सजावट, दीपमालाएँ और प्रकाश-विजुअल डिस्प्ले ने मेले के माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का विशेष आगमन और महत्व
इस मेले में मुख्यमंत्री मोहन यादव का आगमन विशेष महत्व रखता है। उन्होंने न केवल इस आयोजन को ऐतिहासिक तीर्थ स्थल के रूप में मजबूत करने का आश्वासन दिया है, बल्कि पिछले कुछ समय में चित्रकूट को विकसित तीर्थ एवं पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में भी पहल की है। उदाहरण स्वरूप उन्होंने कहा है कि “चित्रकूट को अयोध्या मॉडल पर विकसित किया जाएगा।”
आज मोहन यादव कामदगिरी परिक्रमा करेंगे तथा श्रद्धालुओं के बीच संवाद करेंगे — इस प्रकार यह आयोजन राजनीतिक-सांस्कृतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
सुरक्षा, व्यवस्था एवं प्रशासनिक तैयारी
मेले की सफलता के लिए आयोजकों ने विस्तृत प्रबंध किए हैं:
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पूरे मेला क्षेत्र को 11 जोनों में विभाजित किया गया है, प्रत्येक जोन में कार्यपालक मजिस्ट्रेट व सुरक्षा बल तैनात हैं।
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सुरक्षा में 1500 से अधिक पुलिस कर्मी ड्यूटी पर हैं।
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पहली बार कमांड सेंटर बनाया गया है, जहाँ सीसीटीवी के माध्यम से भीड़-प्रबंधन एवं सुरक्षा-निगरानी की जा रही है।
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ऑटो-वाहन किराये को निर्धारित किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को उचित सुविधा मिल सके एवं शोषण रोका जा सके।
इन व्यवस्थाओं से यह सुनिश्चित किया गया है कि श्रद्धालुओं को व्यवधान के बजाय सहज एवं सुरक्षित अनुभव मिले।
छाँव-छाँव में आस्था का माहौल
दीपोत्सव मेला चित्रकूट में सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक-सांस्कृतिक मिलन-स्थान भी बन गया है। माँ मंदाकिनी के तट पर लाखों दीपों की जगमगाहट, कामदगिरि की पवित्र परिक्रमा, भक्त-समूहों का उमड़ना — इन सबने इस आयोजन को भव्य रूप दे दिया है।
श्रद्धालुओं ने ना केवल परिक्रमा की, बल्कि घाटों पर स्नान कर आस्था-अनुभव को गहरा किया। प्रशासन द्वारा स्थापित सुविधाएँ (जैसे पेयजल, प्रकाश, सफाई) इस अनुभव को अधिक सुगम बना रही हैं।
क्यों है यह मेला और आस्था-शिखर?
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चित्रकूट का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व: यहाँ भगवान श्री राम ने वनवास काल बिताया था, तथा कामदगिरि पर्वत एवं मंदाकिनी नदी का पावन स्थल माना जाता है।
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इस प्रकार यह मेला भक्तों को संध्या-आरती, दीपदान, परिक्रमा जैसी सामाजिक-धार्मिक अनुभूतियाँ प्रदान करता है।
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मुख्यमंत्री मोहन यादव के सक्रिय हस्तक्षेप से स्थल-विकास का नया अध्याय खुल रहा है — यह सिर्फ एक मेला-घटना नहीं, बल्कि तीर्थस्थान को विकास-परिप्रेक्ष्य में एक नए आयाम से जोड़ने का संकेत है।
आगे क्या होगा?
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आगामी चार दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या वृद्धि पाएगी। आयोजन समिति एवं प्रशासन का लक्ष्य लगभग ५० लाख श्रद्धालुओं के सहभागिता का है।
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मोहन यादव द्वारा आज की परिक्रमा एवं संवाद के बाद संभव है कि विकास-विकल्प, पर्यटन-संवर्धन तथा स्थल-सुविधाओं को और अधिक बढ़ावा मिले।
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मेला समापन तक, आरती, दीपदान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भक्तिमय माहौल लगातार बना रहेगा।
निष्कर्ष
पाँच दिवसीय दीपोत्सव मेले में मोहन यादव का आगमन इस आयोजन को सिर्फ तीर्थ-उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक-राजनीतिक एवं विकास-प्रेरित कार्यक्रम बनाता है। चित्रकूट में पहली दिन आठ लाख से अधिक श्रद्धालुओं का आना इस बात का प्रमाण है कि इस स्थल पर विश्वास और आस्था के साथ-साथ सुचारु-व्यवस्था और प्रशासनिक समर्थन भी मजबूत है। आगामी दिनों में जैसे-जैसे समिति और प्रशासन बढ़ते कदम उठाएंगे, यह मेला स्वयं को एक बड़े तीर्थ-आयोजन के रूप में स्थापित करेगा।
