पुना में आयोजित सुसमारोह में रूपल चोरडिया को “भारत उद्योग रत्न 2025” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस गौरवशाली सम्मान से उन्हें “जैन साहित्य में प्रेरक व्यक्तिमत्व” की श्रेणी में चुना गया। पुरस्कार प्रदान करने का श्रेय जाने-माने मेगा इवेंट संगठन केपीएम मीडिया एंड टेक एलएलपी को जाता है, जिनकी योजना और आयोजन ने इस अवसर को विशेष और यादगार बना दिया।
इस अवसर पर प्रसिद्ध अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी ने स्वयं आकर रूपल चोरडिया को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया। उनकी मौजूदगी ने समारोह की गरिमा को और बढ़ाया। इस मौके पर मंच पर यह भी कहा गया कि सम्मान का चयन प्रक्रिया पारदर्शी तथा समाज के हित और साहित्यिक योगदान को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
रूपल चोरडिया ने पुरस्कार स्वीकार करते हुए कहा कि “जैन परंपरा मैगज़ीन” उनका आत्मप्रेरित प्रयास है, जिसके माध्यम से उन्होंने जैन धर्म के विभिन्न समुदायों में किए गए शासन हितैषी कार्यों, सामाजिक योगदानों और साहित्यिक पहलों को व्यापक स्तर पर पहुँचाया है। उनका मानना है कि किसी समुदाय का विकास और उसकी उपलब्धियों का अनुभूत होना, समाज को और अधिक प्रेरित करता है।
उन्होंने आगे कहा, “यह पुरस्कार सिर्फ मेरा नहीं है — यह मेरे परिवार, मित्रों और उन सभी सहयोगियों का है जिन्होंने इस सफर में मेरा साथ दिया।” चोरडिया ने आयोजकों का विशेष धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें यह सम्मान देने के पीछे उनका विश्वास और मान्यता अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पुरस्कार उनके लिए एक नई प्रेरणा है — जैन साहित्य, संस्कृति एवं धर्म के प्रचार-प्रसार में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर।
रूपल चोरडिया की पहचान “मैगज़ीन जैन परंपरा” की संपादिका के रूप में है। पहले से ही इस पत्रिका ने पिछले चार दशकों से अधिक समय से जैन समाज में चल रहे विकासात्मक कार्यों, सामाजिक अभियानों, धर्मोपदेशों और सांस्कृतिक आंदोलनों को उजागर करने का काम किया है। इसके संस्थापक संपादक फूलचंद कटारिया की सेवाएं भी इस सफलता में अनदेखी नहीं की जा सकती। उनका योगदान इस पत्रिका की नींव से ही जुड़ा है, और उन्होंने ही इसे एक ऐसी मंच बनाया जो जैन धर्म एवं साहित्य की नई दिशाएँ खोल सके।
इस पुरस्कार कार्यक्रम ने न केवल रूपल चोरडिया के योगदान को मान्यता दी, बल्कि यह संदेश भी दिया कि समाज-धर्म और साहित्य संबंधी कार्यों को बढ़ावा देना कितना महत्वपूर्ण है। पुरस्कार समारोह के दौरान उपस्थित विद्वानों, धार्मिक समाजों और मीडिया प्रतिनिधियों ने इस अवसर की सराहना की तथा कहा कि इस तरह के सम्मान सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।
इस प्रकार, भारत उद्योग रत्न 2025 से सम्मानित रूपल चोरडिया ने न केवल अपने सिद्ध कार्यों को नई ऊँचाई दी, बल्कि जैन धर्म-समुदाय को यह दिखाया कि समर्पण, लेखन और प्रचार-प्रसार की शक्ति कितनी बड़ी होती है। यह पुरस्कार न सिर्फ उनके past योगदान की स्वीकृति है, बल्कि आने वाले वर्षों में और अधिक सशक्त रूप से सेवा करने की जिम्मेदारी का प्रतीक भी है।
